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निषाद राज जयंती पर गूंजा सामाजिक समरसता का संदेश, मंत्री ए.के. शर्मा ने केवट–राम प्रसंग से जोड़ी सांस्कृतिक चेतना

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निषाद राज जयंती पर गूंजा सामाजिक समरसता का संदेश, मंत्री ए.के. शर्मा ने केवट–राम प्रसंग से जोड़ी सांस्कृतिक चेतना

“निष्ठा और समर्पण ही भारतीयता की पहचान” — समाज के अंतिम पंक्ति तक विकास पहुँचाने का संकल्प दोहराया


दैनिक इंडिया न्यूज़, मधुबन (मऊ)। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने मधुबन तहसील के मर्यादपुर में आयोजित निषाद राज जयंती समारोह में भाग लेते हुए सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकात्मता का सशक्त संदेश दिया। उन्होंने निषाद समाज के ऐतिहासिक योगदान को राष्ट्रीय चेतना का अभिन्न अंग बताते हुए इसके गौरवशाली अतीत को नमन किया।अपने संबोधन में मंत्री शर्मा ने रामचरितमानस के केवट–राम प्रसंग को केंद्र में रखते हुए भारतीय संस्कृति की मूल आत्मा को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भगवान राम और निषादराज गुह्य की मित्रता केवल एक प्रसंग नहीं, बल्कि सामाजिक समानता, अटूट विश्वास और मानवीय संबंधों की सर्वोच्च मिसाल है। विपरीत परिस्थितियों में निषादराज द्वारा निभाई गई मित्रता यह सिद्ध करती है कि भारतीय समाज की आत्मा भेदभाव नहीं, बल्कि समर्पण और अपनत्व में बसती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आज जब समाज अनेक चुनौतियों से गुजर रहा है, तब ऐसे प्रेरक प्रसंगों से सीख लेकर सामाजिक सौहार्द, विश्वास और एकजुटता को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। “सबका साथ, सबका विकास” केवल नारा नहीं, बल्कि सरकार की कार्यसंस्कृति का मूल आधार है, जिसके माध्यम से समाज के वंचित और पिछड़े वर्गों को सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।


मंत्री शर्मा ने कहा कि शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में व्यापक सुधार कर राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे आत्मनिर्भरता को लक्ष्य बनाकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।


इस अवसर पर रुद्रपुर (देवरिया) के विधायक जयप्रकाश निषाद ने निषाद समाज की एकजुटता और संघर्षशील परंपरा को रेखांकित करते हुए संगठित प्रयासों से समाज को नई दिशा देने पर बल दिया।कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, स्थानीय नागरिकों एवं समाज के गणमान्य व्यक्तियों की व्यापक उपस्थिति रही, जिसने इस आयोजन को जनआस्था और सामाजिक जागरूकता का सशक्त मंच बना दिया।


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