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लोकतंत्र की आत्मा है संवाद,आलोचना को व्यक्तिगत नहीं, परिष्कार का माध्यम मानें: मुख्यमंत्री

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Dainik India News

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लोकतंत्र की आत्मा है संवाद,आलोचना को व्यक्तिगत नहीं, परिष्कार का माध्यम मानें: मुख्यमंत्री

“सत्यमेव जयते” की ज्योति से आलोकित पत्रकारिता: गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रखर उद्बोधन

200 वर्षों की हिन्दी पत्रकारिता की गौरवगाथा का स्मरण, पत्रकारों को राष्ट्रनिर्माण में अग्रदूत बनने का आह्वान

दैनिक इंडिया न्यूज़,गोरखपुर, 06 अप्रैल 2026। गोरखपुर की ऐतिहासिक धरती पर उस समय एक वैचारिक आलोक प्रस्फुटित हुआ, जब योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह में पत्रकारिता के मूल्यों, दायित्वों और उसकी नैतिक शक्ति पर अत्यंत गहन एवं प्रेरणादायी उद्बोधन दिया। उनके शब्द केवल भाषण नहीं थे, बल्कि लोकतंत्र के उस प्राणतत्व की पुनः स्मृति थे, जो संवाद, सत्य और जनविश्वास पर आधारित है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट कहा कि पत्रकारिता ने हर चुनौतीपूर्ण कालखंड में भारत और उसके लोकतंत्र को सुदृढ़ आधार प्रदान किया है। उन्होंने रेखांकित किया कि लोकतंत्र का संचालन संवाद से होता है—और संवाद में आलोचना स्वाभाविक है, किंतु उस आलोचना को व्यक्तिगत द्वेष के रूप में ग्रहण करना लोकतांत्रिक चेतना के विपरीत है। “जब मनःस्थिति निर्मल होती है, तब ही परिणाम भी श्रेष्ठ होते हैं”—यह कहते हुए उन्होंने पत्रकारिता को आत्मानुशासन और निष्पक्षता का मार्ग अपनाने का संदेश दिया।
उन्होंने पत्रकारिता को “समाज का दर्पण” बताते हुए कहा कि जिस दृष्टिकोण से मीडिया समाज की घटनाओं को प्रस्तुत करता है, समाज भी उसी दृष्टि से उन्हें ग्रहण करता है। अतः यह अनिवार्य है कि वास्तविकता और मनःस्थिति में कोई द्वंद्व न हो, क्योंकि ऐसा द्वैत जनविश्वास पर प्रत्यक्ष प्रहार के समान है। उनके इन शब्दों ने पत्रकारिता के नैतिक दायित्व को अत्यंत सशक्त रूप में परिभाषित किया।

कार्यक्रम को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य प्रदान करते हुए मुख्यमंत्री ने हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्षों की गौरवमयी यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 30 मई 1826 को जुगल किशोर शुक्ल द्वारा कोलकाता से प्रकाशित ‘उदन्त मार्तण्ड’ ने हिन्दी पत्रकारिता की नींव रखी थी—वह भी उस कालखंड में, जब देश पराधीनता की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था। यह केवल एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि स्वतंत्रता के स्वर को मुखर करने का माध्यम था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी उसी ऐतिहासिक परंपरा की उत्तराधिकारी है, जिसने बिना रुके, बिना थके और बिना किसी सहारे के पत्रकारिता को निरंतर आगे बढ़ाया है। उन्होंने इसे “अभिनंदनीय और प्रेरणादायी” बताते हुए कहा कि यह यात्रा केवल समय की नहीं, बल्कि संकल्प, साहस और सत्यनिष्ठा की यात्रा है।
उन्होंने गोरखपुर की सामाजिक-आर्थिक भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि लगभग तीन करोड़ से अधिक जनसंख्या शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजगार के लिए इस क्षेत्र पर निर्भर है। पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमोत्तर बिहार और नेपाल के तराई क्षेत्र तक इसकी व्यापकता है। ऐसे में यहाँ की पत्रकारिता का स्वर राष्ट्रभक्ति, जनजागरण और सकारात्मक परिवर्तन का वाहक होना चाहिए—यह केवल आवश्यकता नहीं, बल्कि दायित्व है।

मुख्यमंत्री ने गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब के इतिहास का स्मरण करते हुए बताया कि वर्ष 1998 में इसकी स्थापना हुई थी और इसे तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का संरक्षण प्राप्त था। उन्होंने संस्थापक अध्यक्ष डॉ. एस.पी. त्रिपाठी और सचिव अरविन्द शुक्ला के योगदान को भी स्मरण करते हुए कहा कि आज जो भव्य स्वरूप इस संस्थान को प्राप्त है, वह ‘डबल इंजन सरकार’ की प्रतिबद्धता का परिणाम है।

अपने उद्बोधन में उन्होंने भारतीय पत्रकारिता की वैचारिक जड़ों को उपनिषदों से जोड़ते हुए ‘सत्यमेव जयते’ के सिद्धांत को इसका मूल आधार बताया। उन्होंने कहा कि विघटनकारी शक्तियाँ सदैव पत्रकारिता की स्वतंत्रता को बाधित करने का प्रयास करती रही हैं, किंतु इन चुनौतियों से विचलित हुए बिना सत्य के मार्ग पर अग्रसर रहना ही पत्रकारिता का धर्म है।

मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम में पत्रकारिता की भूमिका का उल्लेख करते हुए महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय तथा गणेश शंकर विद्यार्थी जैसी विभूतियों को स्मरण किया, जिन्होंने पत्रकारिता को राष्ट्रसेवा का माध्यम बनाकर उसे नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान को भी रेखांकित किया।

आधुनिक युग की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पत्रकारिता अनेक स्वरूपों—प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और सोशल मीडिया—में विस्तारित हो चुकी है। ऐसे में इन सभी माध्यमों के बीच समन्वय स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने चेताया कि “यदि एक ही समाचार विभिन्न माध्यमों में भिन्न रूप में प्रस्तुत होता है, तो वह समाज में भ्रम और अस्थिरता उत्पन्न करता है।”
उन्होंने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को स्वीकार करते हुए कहा कि इसे भी पत्रकारिता के मानकों और आचार संहिता से जोड़ना होगा, ताकि यह बेलगाम न होकर उत्तरदायी माध्यम बन सके। यह कथन आज के डिजिटल युग की सबसे बड़ी चुनौती और समाधान दोनों को एक साथ प्रस्तुत करता है।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार मूल्य आधारित पत्रकारिता के साथ दृढ़ता से खड़ी है। उन्होंने अपराध और भ्रष्टाचार के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति, पत्रकारों के लिए आवासीय योजनाओं, कैशलेस चिकित्सा सुविधा तथा मान्यता प्राप्त पहचान पत्र जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने नवनिर्वाचित कार्यकारिणी को प्रमाण-पत्र प्रदान किए और उन्हें शपथ दिलाई। इस अवसर पर सांसद श्री रवि किशन शुक्ल, नवनिर्वाचित अध्यक्ष ओंकारधर द्विवेदी, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह, महापौर डॉ. मंगलेश कुमार श्रीवास्तव सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने समारोह की गरिमा को और भी ऊँचाई प्रदान की।

अंततः यह आयोजन केवल एक शपथ ग्रहण समारोह नहीं रहा—यह पत्रकारिता के मूल्यों का पुनः उद्घोष, सत्य के प्रति प्रतिबद्धता का संकल्प और लोकतंत्र की आत्मा को सशक्त करने का एक प्रेरणादायी क्षण बनकर इतिहास में अंकित हो गया।

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