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BSNL की सेवाएं और नियमों की अनदेखी: कंपनी की गिरती प्रतिष्ठा

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Dainik India News

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BSNL की सेवाएं और नियमों की अनदेखी: कंपनी की गिरती प्रतिष्ठा

दैनिक इंडिया न्यूज़ ,लखनऊ :भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) आज भी ट्राई (TRAI) के नियमानुसार डिजिटल बायोमेट्रिक सत्यापन को लागू करने में निजी कंपनियों से बहुत पीछे है। जहां प्रमुख निजी दूरसंचार कंपनियों ने डिजिटल बायोमेट्रिक सिस्टम को सफलतापूर्वक लागू किया है, वहीं BSNL अभी भी फिजिकल दस्तावेज़ों पर निर्भर है। उदाहरण के तौर पर, सिम खो जाने पर BSNL उपयोगकर्ताओं से फिजिकल डॉक्यूमेंट की मांग करता है, जबकि निजी कंपनियां बायोमेट्रिक सत्यापन के माध्यम से ही नया सिम प्रदान करती हैं।

BSNL की सिम पुनः जारी करने की प्रक्रिया भी काफी अव्यवस्थित है। उपयोगकर्ता को अपने दस्तावेज़ BSNL कार्यालय में जमा करने के बाद भी यह सुनिश्चित नहीं किया जा सकता कि उनकी सिम किसी और के हाथों में नहीं जाएगी। इसके विपरीत, निजी कंपनियां सिम बदलते समय उपयोगकर्ता की लाइव फोटोग्राफी और पहचान की पुख्ता जाँच करती हैं। इसमें उनकी पहचान का सटीक सत्यापन किया जाता है, जबकि BSNL के पास यह प्रक्रिया निष्प्रभावी और पुरानी साबित होती है।

भारत सरकार लगातार BSNL को अपनी सेवाओं को बेहतर करने के निर्देश और सलाह देती आ रही है, ताकि उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिल सकें। इसके बावजूद BSNL अपने सुधारों पर ध्यान देने के बजाय अपनी सेवाओं को और खराब करने में लगा हुआ है।

TRAI के नियमों के अनुसार, नया सिम और डुप्लीकेट सिम दोनों ही मामलों में बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य है, लेकिन BSNL के लिए इन नियमों का कोई विशेष महत्व नहीं दिखता। कंपनी अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रही है और उपभोक्ताओं की सुरक्षा और सेवा सुधार के प्रति उदासीन है।

BSNL की एक और बड़ी खामी उसकी कमजोर नेटवर्क सेवाएं हैं। दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में भी BSNL का नेटवर्क उपलब्ध नहीं होता, जबकि अन्य कंपनियां 5G सेवाएं प्रदान कर रही हैं। इतना ही नहीं, BSNL अब तक 4G सेवाओं को भी पूरी तरह से लागू करने में असफल रही है।

ग्राहकों के प्रति BSNL का व्यवहार आज भी पुराने जमाने जैसा है। सुविधाएं प्रदान करने में जहां अन्य कंपनियां तेज़ी से सुधार कर रही हैं, BSNL पुराने ढर्रे पर चल रही है। इसका नतीजा है कि ग्राहकों को लगातार असुविधाओं का सामना करना पड़ता है और वे अन्य विकल्पों की ओर रुख करते हैं।

अगर BSNL इसी तरह से अपनी सेवाओं और प्रक्रियाओं में सुधार नहीं करती, तो भविष्य में 5 से 10 सालों में इसका अस्तित्व संकट में पड़ सकता है। तेज़ी से बदलती डिजिटल दुनिया में पिछड़ने का मतलब बाजार से बाहर हो जाना हो सकता है, और BSNL इस दिशा में बढ़ रही है।

BSNL के लिए जरूरी है कि वह अपने सिस्टम में सुधार करे, डिजिटल बायोमेट्रिक प्रक्रिया को अपनाए, और अपने नेटवर्क और ग्राहक सेवा में सुधार लाए, ताकि भविष्य में वह प्रतिस्पर्धा में बने रह सके।

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