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आजादी का अमृत, नई पीढ़ी का संकल्प: राष्ट्रनिर्माण की अगली इबारत लिखने को तैयार युवा शक्ति

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Dainik India News

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वारियर डिफेंस एकेडमी कॉलेज, मोहनलालगंज में स्वतंत्रता दिवस समारोह में गूंजा राष्ट्रबोध का संदेश; अपर्णा यादव ने जेन जी और जेन अल्फा के सामाजिक दायित्व को रेखांकित किया, प्रमोद पंडित ने मदनलाल धींगरा के बलिदान से जगाई देशभक्ति की चेतना और जितेन्द्र प्रताप सिंह ने भारत की विकास यात्रा को राष्ट्रनिर्माण के संकल्प से जोड़ा

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दैनिक इंडिया न्यूज़, 15 अगस्त 2026 लखनऊ।

स्वतंत्रता दिवस केवल तिरंगा फहराने और राष्ट्रगान के साथ उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि यह आत्ममंथन का वह क्षण भी है जब एक राष्ट्र अपने अतीत के बलिदानों, वर्तमान के दायित्वों और भविष्य के संकल्पों को एक ही सूत्र में पिरोता है। इसी राष्ट्रचेतना को केंद्र में रखते हुए वारियर डिफेंस एकेडमी कॉलेज, मोहनलालगंज परिसर में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किया गया, जहां इतिहास की शौर्यगाथा से लेकर जेन जी और जेन अल्फा की सामाजिक जिम्मेदारियों तथा भारत की विकास यात्रा तक पर सार्थक विमर्श हुआ। समारोह का मूल स्वर स्पष्ट था—स्वतंत्रता की रक्षा केवल सीमाओं पर नहीं होती; राष्ट्र के चरित्र, अनुशासन, नागरिक दायित्व और कर्मनिष्ठा में भी उसकी निरंतर सुरक्षा होती है।

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समारोह की मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने जेन जी और जेन अल्फा के सामाजिक दायित्व पर विचार रखते हुए नई पीढ़ी की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने लक्ष्य प्राप्ति के लिए संकल्प, अनुशासन और एकाग्रता को आवश्यक बताते हुए इस बात पर बल दिया कि आधुनिक संसाधनों और तकनीकी सुविधाओं से सम्पन्न युवा पीढ़ी के सामने व्यक्तिगत सफलता के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व का भी व्यापक दायित्व है। नई पीढ़ी जिस दिशा में अपनी ऊर्जा और प्रतिभा लगाएगी, उसी से आने वाले भारत की सामाजिक और राष्ट्रीय दिशा निर्धारित होगी। युवाओं की इस भूमिका का प्रश्न उठते ही चर्चा स्वाभाविक रूप से उन युवाओं तक पहुंची, जिन्होंने अपना वर्तमान भारत के स्वतंत्र भविष्य के लिए समर्पित कर दिया था।

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इसी ऐतिहासिक चेतना को स्वर देते हुए अति विशिष्ट अतिथि प्रमोद पंडित, क्षेत्र संगठन मंत्री, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र, संस्कृत भारती ने स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानियों पर चर्चा की और मदनलाल धींगरा के जीवन तथा राष्ट्र के प्रति उनके अप्रतिम समर्पण पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के उन अध्यायों की ओर ध्यान आकृष्ट किया, जिनमें असंख्य क्रांतिकारियों ने व्यक्तिगत सुख, सुरक्षा और जीवन तक का परित्याग कर मातृभूमि की स्वतंत्रता को सर्वोच्च ध्येय बनाया। धींगरा का जीवन उस युग की राष्ट्रनिष्ठा का ऐसा उदाहरण है, जिसमें व्यक्तिगत अस्तित्व से ऊपर राष्ट्र का अस्तित्व प्रतिष्ठित था। इतिहास की यही स्मृति वर्तमान पीढ़ी से भी उसके कर्तव्य का उत्तर मांगती है।

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कार्यक्रम में ‘वंदेमातरम्’ के महत्व पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने इसके ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ‘वंदेमातरम्’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की उस चेतना से गहराई से जुड़ा रहा है, जिसने मातृभूमि के प्रति श्रद्धा, स्वाभिमान और समर्पण की भावना को जनमानस में प्रखर किया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इसका स्मरण केवल अतीत की पुनरावृत्ति नहीं, बल्कि उस राष्ट्रीय भावधारा का पुनर्स्मरण है जिसने स्वाधीनता के संघर्ष को वैचारिक ऊर्जा प्रदान की। परंतु स्वतंत्रता की स्मृति तभी जीवंत रहती है, जब वह वर्तमान के संकल्प में परिवर्तित हो।

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इसी क्रम में विशिष्ट अतिथि जितेन्द्र प्रताप सिंह, सम्पर्क प्रमुख, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र, संस्कृत भारती एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय सनातन महासंघ ने राष्ट्रनिर्माण तथा भारत की विकास यात्रा पर विचार रखते हुए प्रधानमंत्री के आज के संबोधन में उल्लिखित देश की विकास यात्रा के पिछले एक दशक के संदर्भ को रेखांकित किया। उन्होंने राष्ट्रनिर्माण को केवल शासन और संस्थाओं की जिम्मेदारी न मानकर प्रत्येक नागरिक की सहभागिता से पूर्ण होने वाला सतत दायित्व बताया। उनका जोर इस बात पर रहा कि भारत की प्रगति को स्थायी और व्यापक बनाने के लिए ऐसी युवा शक्ति का निर्माण आवश्यक है, जो लक्ष्य के प्रति एकाग्र, आचरण में अनुशासित और राष्ट्रहित के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध हो। यहीं से समारोह का विमर्श इतिहास की स्मृतियों से निकलकर भविष्य के भारत की आकांक्षाओं तक पहुंच गया।

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समारोह में मेजर जनरल विक्रम कुमार, कर्नल योगेश दत्त तथा दुर्गेश त्रिपाठी, राष्ट्रीय प्रभारी, एकल विद्यालय की विशिष्ट उपस्थिति रही। विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े इन विशिष्ट व्यक्तित्वों की सहभागिता ने स्वतंत्रता दिवस के विमर्श को व्यापक सामाजिक और राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य प्रदान किया। वहीं वारियर डिफेंस एकेडमी के अध्यक्ष गुलाब सिंह की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में राष्ट्रसेवा, अनुशासन और युवा शक्ति के महत्व को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।

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अन्य वक्ताओं ने स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए युवाओं को लक्ष्य प्राप्ति के लिए एकाग्रता, अनुशासन और नियमित अभ्यास को जीवन का अनिवार्य हिस्सा बनाने का संदेश दिया। वक्ताओं ने कहा कि कोई भी महान लक्ष्य केवल आकांक्षा से उपलब्ध नहीं होता। उसे उपलब्धि में बदलने के लिए निरंतर अभ्यास, आत्मसंयम, समयबद्धता और कठिन परिस्थितियों में भी संकल्प से विचलित न होने की दृढ़ता आवश्यक है। व्यक्तिगत जीवन में विकसित यही अनुशासन आगे चलकर सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रीय चरित्र का आधार बनता है।

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मोहनलालगंज के वारियर डिफेंस एकेडमी कॉलेज परिसर में आयोजित समारोह अंततः अतीत के बलिदान, वर्तमान के कर्तव्य और भविष्य के संकल्प के त्रिवेणी-संगम के रूप में सामने आया। मदनलाल धींगरा के बलिदान से लेकर आज की युवा पीढ़ी की सामाजिक जिम्मेदारी तक, ‘वंदेमातरम्’ की राष्ट्रीय चेतना से लेकर भारत की विकास यात्रा तक—हर विमर्श एक ही केंद्रीय विचार के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा कि स्वतंत्रता केवल प्राप्त अधिकार नहीं, बल्कि निभाया जाने वाला दायित्व भी है।

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और यही इस समारोह का सबसे महत्वपूर्ण संदेश बनकर उभरा—जिन युवाओं ने कभी स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन समर्पित किया था, आज की युवा पीढ़ी को उसी राष्ट्र के भविष्य के लिए अपना ज्ञान, कौशल, अनुशासन और प्रतिभा समर्पित करनी होगी। भारत की अगली इबारत केवल नीतियों से नहीं, बल्कि ऐसे संकल्पित नागरिकों के कर्म से लिखी जाएगी, जिनके लिए व्यक्तिगत उत्कर्ष और राष्ट्र का उत्थान एक-दूसरे से पृथक नहीं, बल्कि एक ही जीवन-ध्येय के दो अभिन्न पक्ष हों।

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