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609 मुकदमे दायर, 390 का निस्तारण; सजा की प्रभावी पैरवी पर जिलाधिकारी का जोर

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Dainik India News

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609 मुकदमे दायर, 390 का निस्तारण; सजा की प्रभावी पैरवी पर जिलाधिकारी का जोर

गंभीर अपराधों में मजबूत तथ्यों और साक्ष्यों के साथ पैरवी के निर्देश, पुराने मुकदमों को प्राथमिकता से निपटाने की हिदायत; अवैध शराब, मादक पदार्थ, महिला अपराध, गैंगस्टर व पॉक्सो मामलों में कार्रवाई तेज करने को कहा

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दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।कानून व्यवस्था की मजबूती केवल अपराधों के पंजीकरण तक सीमित नहीं, बल्कि न्यायालय में प्रभावी पैरवी और दोषियों को विधिसम्मत सजा दिलाने तक उसकी वास्तविक परीक्षा होती है। इसी दृष्टिकोण के साथ जिलाधिकारी आनंद वर्द्धन ने कानून व्यवस्था एवं अभियोजन शाखा की मासिक समीक्षा बैठक में लंबित मुकदमों के त्वरित निस्तारण, गंभीर अपराधों में मजबूत पैरवी और प्रत्येक प्रकरण की नियमित निगरानी को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। समीक्षा में अगस्त माह के दौरान अधीनस्थ एवं सत्र न्यायालयों में 609 नए वाद दायर होने तथा 390 वादों के निस्तारण का ब्योरा सामने आया, जिसके बाद जिलाधिकारी ने दायर मुकदमों की तुलना में निस्तारण की गति बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।

जिलाधिकारी कैंप कार्यालय स्थित सभागार में देर शाम हुई बैठक में अभियोजन कार्य, लंबित वाद, जमानत प्रकरण, महिला अपराध, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम, पॉक्सो अधिनियम, गैंगस्टर एवं गुंडा अधिनियम के मामलों के साथ आगामी त्योहारों की सुरक्षा तैयारियों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। संयुक्त निदेशक अभियोजन ने बताया कि अगस्त में निस्तारित 390 वादों में 281 में सजा, 31 में रिहाई, 34 में सुलह, 31 मुकदमों को सत्र न्यायालय के लिए सुपुर्द तथा 13 मामलों में दाखिल दफ्तर की कार्रवाई हुई। सजा के मामलों में अधीनस्थ न्यायालयों में अन्य अधिनियमों के तहत 240 मामलों में दोषसिद्धि हुई।

सत्र न्यायालय में अगस्त माह के दौरान भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत 31 मुकदमे दायर हुए, जिनमें 13 का निस्तारण हुआ। इनमें एक मामले में सजा, 11 में रिहाई और एक मामले में दाखिल दफ्तर की कार्रवाई की गई। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत पांच नए मुकदमे दायर हुए, जबकि दो का निस्तारण हुआ। इनमें एक मामले में सजा तथा एक में दाखिल दफ्तर की कार्रवाई हुई। गैंगस्टर अधिनियम के तहत नौ मुकदमे दायर हुए, लेकिन अगस्त में इनमें कोई निस्तारण नहीं हो सका। पॉक्सो अधिनियम के तहत 17 मुकदमे दायर हुए और चार का निस्तारण हुआ, जिनमें एक में सजा तथा तीन में रिहाई हुई।

दायर और निस्तारित वादों के बीच बने अंतर को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने सभी अभियोजकों को कार्यप्रणाली में सुधार लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मजबूत तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और प्रभावी पैरवी के माध्यम से विशेष रूप से गंभीर अपराधों के मामलों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए समन्वित प्रयास किए जाएं। अभियोजकवार समीक्षा करते हुए उन्होंने प्रत्येक अभियोजक को हर माह कम से कम एक बड़े मुकदमे का निस्तारण सुनिश्चित करने तथा पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर लेने को कहा।

जिलाधिकारी ने मुकदमों की पैरवी को केवल न्यायालय में सुनवाई तक सीमित न रखते हुए उनकी प्रत्येक अवस्था की निगरानी पर जोर दिया। जिन मामलों में गवाहों की उपस्थिति बाधित हो रही है, उनमें पहले से जानकारी प्राप्त कर न्यायालय में उनकी उपस्थिति और गवाही सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए। प्रत्येक मुकदमे की फाइल अद्यतन रखने, प्रकरण किस स्तर पर लंबित है इसकी नियमित समीक्षा करने तथा अंतिम चरण में पहुंच चुके मुकदमों के शीघ्र निस्तारण के लिए विशेष प्रयास करने को कहा गया। संयुक्त निदेशक अभियोजन को आवश्यकता के अनुसार समय-समय पर अभियोजकों के न्यायालयों में परिवर्तन करने के निर्देश भी दिए गए।

जमानत प्रकरणों की समीक्षा में सामने आया कि अगस्त माह में कुल 538 जमानत आवेदन न्यायालय में प्रस्तुत हुए, जिनमें 433 मामलों में जमानत स्वीकृत और 105 मामलों में अस्वीकृत हुई। बड़ी संख्या में जमानत स्वीकृत होने के मद्देनजर जिलाधिकारी ने अभियोजन पक्ष की पैरवी को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। गंभीर अपराधों में जमानत का विरोध करते समय उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों को मजबूती के साथ न्यायालय के समक्ष रखने पर विशेष जोर दिया गया।

पॉक्सो अधिनियम के मामलों में पक्षद्रोहिता के कारण हुई रिहाई को भी बैठक में गंभीरता से लिया गया। जिलाधिकारी ने वादियों और उनके अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें आवश्यक रूप से जागरूक करने तथा अभियोजन पक्ष की पैरवी को प्रभावी बनाने के लिए विशेष प्रयास करने को कहा। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम के अपेक्षाकृत कम निस्तारित मामलों में तेजी लाने और दोषमुक्ति वाले मामलों में नियमानुसार अपील की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

कानून व्यवस्था की समीक्षा के दौरान अवैध और जहरीली शराब के विरुद्ध अभियान चलाकर प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। जनपद की सीमाओं पर स्थित थानों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया। मादक पदार्थ एवं ड्रग्स से संबंधित मामलों में जनवरी से अब तक कोई प्रकरण दर्ज नहीं करने वाले थानों में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए, जिससे नशीले पदार्थों की अवैध गतिविधियों पर निगरानी और कार्रवाई की निरंतरता बनी रहे।

महिला संबंधी अपराधों और उत्पीड़न के मामलों में निर्धारित समयसीमा के भीतर आरोपपत्र दाखिल कर त्वरित कार्रवाई करने को कहा गया। अधिक प्रकरण वाले थानों की विशेष निगरानी के निर्देश देते हुए जिलाधिकारी ने स्कूलों और महाविद्यालयों में महिला बीट पुलिसकर्मियों के माध्यम से छात्र-छात्राओं को महिला अपराधों में हुई सजा के परिणामों की जानकारी देकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। महिला अपराधों में संलिप्त ऐसे अपराधियों, जो गुंडा अधिनियम की परिधि में आते हों, के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने को भी कहा गया।

गैंगस्टर अधिनियम के तहत पारित आदेशों के बावजूद कुछ थानों में कुर्की की कार्रवाई लंबित मिलने पर पुलिस अधीक्षक कमलेश बहादुर ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने संबंधित थाना प्रभारियों को एक सप्ताह के भीतर पारित आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। गुंडा अधिनियम के तहत जिला बदर किए गए अपराधियों पर भी सतत निगरानी रखने को कहा गया। जिला बदर अपराधी के जनपद में प्रवेश करने की स्थिति में संबंधित थाना प्रभारी की जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

बैठक में आगामी त्योहारों को लेकर सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियों की भी विस्तृत समीक्षा हुई। जिलाधिकारी ने सभी थानों में पीस कमेटी की बैठक 30 सितंबर से पूर्व पूर्ण कराने के निर्देश दिए। मूर्ति स्थापना और रामलीला स्थलों का क्षेत्राधिकारी एवं उप जिलाधिकारी स्तर से पहले ही स्थलीय निरीक्षण कराने तथा सामने आने वाली समस्याओं का समय रहते समाधान करने को कहा गया। किसी भी जटिल प्रकरण की सूचना तत्काल उच्चाधिकारियों को देने के निर्देश भी दिए गए।

मूर्ति विसर्जन घाटों पर साफ-सफाई, विद्युत सुरक्षा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का पूर्व निरीक्षण कराने के निर्देश दिए गए। पंडालों में विद्युत सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने, डीजे संचालकों से समन्वय स्थापित करने तथा विसर्जन के दौरान घाटों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। नगरीय क्षेत्रों में विशेष सफाई अभियान चलाने और सड़कों के किनारे पड़े कूड़े की सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

जिलाधिकारी ने समस्त उप जिलाधिकारियों को सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ब्लॉकों में आयोजित जन चौपालों में प्रतिभाग करने को कहा। लोक निर्माण विभाग को त्योहारों से पूर्व सड़कों को गड्ढामुक्त करने तथा पुलिस विभाग को पहले से ही निरोधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि आगामी त्योहार शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो सकें।

सुरक्षा निगरानी को तकनीकी स्तर पर मजबूत करने के लिए नगरीय क्षेत्रों में लगाए गए सभी सीसीटीवी कैमरों की क्रियाशीलता की जांच कर उन्हें अनवरत संचालित रखने को कहा गया। राजमार्गों पर पेट्रोल पंपों और ढाबों के आसपास बेतरतीब खड़े ट्रकों पर निगरानी बढ़ाने तथा संचालकों से समन्वय कर वाहनों को निर्धारित स्थलों पर खड़ा कराने के निर्देश दिए गए। एआरटीओ को बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने को भी कहा गया।

बैठक में पुलिस अधीक्षक कमलेश बहादुर, अपर जिलाधिकारी प्रवेंद्र कुमार, समस्त उप जिलाधिकारी, क्षेत्राधिकारी, थाना प्रभारी, संयुक्त निदेशक अभियोजन, डीजीसी अजय कुमार सिंह सहित अभियोजन शाखा के संबंधित अधिकारी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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