प्रधानमंत्री मोदी और भारत की विदेश नीति पर राहुल गांधी की टिप्पणी से भड़के रक्षा मंत्री; बोले—राजनीतिक विरोध अपनी जगह, लेकिन नेता प्रतिपक्ष की मर्यादा और देश की प्रतिष्ठा से समझौता स्वीकार्य नहीं
दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की विदेश नीति को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की टिप्पणी ने सियासी तापमान अचानक बढ़ा दिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया के माध्यम से राहुल गांधी पर ऐसा तीखा प्रहार किया, जिसमें राजनीतिक असहमति से आगे बढ़कर लोकतांत्रिक मर्यादा, नेता प्रतिपक्ष के संवैधानिक दायित्व और भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का प्रश्न उठाया गया। सिंह ने राहुल गांधी की टिप्पणी को अत्यंत निम्नस्तरीय और निंदनीय बताते हुए कहा कि यह उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी पीड़ा देने वाली है।
राजनाथ सिंह ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अनेक दौर देखे हैं और विभिन्न विचारधाराओं के नेताओं के साथ राजनीतिक जीवन जिया है, लेकिन नेता प्रतिपक्ष के पद पर रहते हुए ऐसा आचरण उनकी कल्पना से परे रहा है। उन्होंने सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे विपक्षी नेताओं के साथ-साथ डॉ. मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीतिक संघर्ष कितना भी तीखा क्यों न रहा हो, सार्वजनिक जीवन की एक मर्यादा कायम रही।
‘कुंठा कितनी भी हो, ऐसी टिप्पणी स्वीकार्य नहीं’
रक्षा मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति राहुल गांधी के मन में चाहे जितनी भी राजनीतिक कुंठा या असहमति हो, ऐसी अभद्र टिप्पणी स्वीकार्य नहीं हो सकती। उनका तर्क था कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का अनिवार्य हिस्सा है, लेकिन विरोध की अभिव्यक्ति ऐसी सीमा तक नहीं पहुंचनी चाहिए जहां संवैधानिक पद की गरिमा और देश की प्रतिष्ठा पर प्रश्न खड़े होने लगें।
राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अंतरराष्ट्रीय भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि मोदी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मान बढ़ाया है और विकसित भारत के मार्ग को प्रशस्त किया है। ऐसे प्रधानमंत्री के प्रति की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को उन्होंने हर भारतीय के लिए पीड़ादायक बताया।
कांग्रेस की विरासत पर भी राजनाथ सिंह ने उठाया बड़ा सवाल
रक्षा मंत्री ने अपने बयान का दायरा राहुल गांधी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि कांग्रेस की ऐतिहासिक विरासत को भी बहस के केंद्र में ला दिया। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि यदि राजनीतिक संवाद में ऐसी भाषा और आचरण को स्थान दिया जाता है, तो क्या पार्टी लाल-बाल-पाल से लेकर महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, लाल बहादुर शास्त्री, पी.वी. नरसिम्हा राव और प्रणब मुखर्जी जैसे विराट व्यक्तित्वों की विरासत पर अपना दावा उसी नैतिक अधिकार के साथ कर सकती है।
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राजनाथ सिंह ने कांग्रेस की ऐतिहासिक राजनीतिक पूंजी को वर्तमान राजनीतिक आचरण की कसौटी पर कसने का प्रयास किया है। उनके बयान ने कांग्रेस के सामने केवल राहुल गांधी की टिप्पणी का जवाब देने की चुनौती नहीं रखी, बल्कि पार्टी की राजनीतिक भाषा और परंपरा को लेकर भी बहस छेड़ दी है।
‘प्रधानमंत्री का ही नहीं, भारत की प्रतिष्ठा का भी अपमान’
राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी के आचरण को लेकर अपनी सबसे कठोर टिप्पणी करते हुए कहा कि इससे केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपमान नहीं हुआ, बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा भी प्रभावित हुई है। उन्होंने इसे स्वस्थ लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरे का संकेत बताया।
रक्षा मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब विदेश नीति को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार तेज हो रहे हैं। राहुल गांधी ने एक दिन पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री के विदेश दौरों, चीन और अरुणाचल प्रदेश में कथित पेट्रोलिंग प्रतिबंध तथा भारत की कूटनीतिक भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, राहुल गांधी ने सरकार पर विदेश नीति को कमजोर करने तक के आरोप लगाए।
विदेश नीति पर आरोपों ने बढ़ाई सियासी गर्मी
राहुल गांधी ने अपने वक्तव्य में भारत-अमेरिका, रूस और ईरान के संबंधों का संदर्भ देते हुए दावा किया कि भारत को अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का अधिक प्रभावी ढंग से लाभ उठाना चाहिए था। उन्होंने चीन के साथ सीमा संबंधी परिस्थितियों और गलवान के बाद प्रधानमंत्री के वक्तव्य का भी उल्लेख किया। इन आरोपों पर सरकार की ओर से राजनाथ सिंह का जवाब अब राजनीतिक विमर्श को एक नए मोड़ पर ले आया है।
सत्ता पक्ष के लिए यह केवल प्रधानमंत्री के बचाव का विषय नहीं है, बल्कि विदेश नीति जैसे संवेदनशील राष्ट्रीय प्रश्न पर विपक्ष की भाषा और आरोपों का राजनीतिक प्रतिवाद भी है। वहीं विपक्ष के लिए यह सरकार की विदेश नीति पर अपने सवालों को और आक्रामक ढंग से रखने का अवसर बन सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर यह टकराव और गहरा होने के संकेत हैं।
‘गांधी’ नाम का उल्लेख कर राजनाथ सिंह ने साधा सीधा निशाना
अपने बयान के अंतिम हिस्से में राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी के नाम में जुड़े ‘गांधी’ शब्द का उल्लेख करते हुए कहा कि वे कल्पना भी नहीं कर सकते कि जिसके नाम में गांधी शब्द जुड़ा हो, वह ऐसा शर्मनाक बयान दे सकता है। राजनाथ सिंह का यह कथन उनके पूरे वक्तव्य का सबसे तीखा राजनीतिक प्रहार बनकर सामने आया है।
राजनाथ सिंह की टिप्पणी ने इस पूरे विवाद को महज प्रधानमंत्री बनाम विपक्ष की राजनीतिक बहस से आगे बढ़ाकर भारतीय लोकतंत्र में राजनीतिक भाषा की मर्यादा बनाम आक्रामक विपक्षी राजनीति की बहस में बदल दिया है। अब निगाहें कांग्रेस की प्रतिक्रिया पर हैं—क्या वह राहुल गांधी के आरोपों को और मजबूती से आगे बढ़ाएगी या राजनाथ सिंह द्वारा उठाए गए मर्यादा और राजनीतिक विरासत के सवालों का प्रत्यक्ष जवाब देगी?
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर राहुल गांधी के हमले का रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऐसा जवाब दिया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है—क्या लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध की सीमा केवल नीतियों की आलोचना तक है, या संवैधानिक पदों की गरिमा की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है?