मुख्यमंत्री से भेंट कर प्रदेशभर में छठ घाटों की समुचित व्यवस्था का आग्रह; 15 नवंबर को लक्ष्मण मेला मैदान में मुख्यमंत्री करेंगे महापर्व का उद्घाटन, भोजपुरी अकादमी के गठन पर भी हुई चर्चा
दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।
छठ महापर्व को लेकर उत्तर प्रदेश में तैयारियों का खाका अब शासन के स्तर पर भी पहुंच गया है। अखिल भारतीय भोजपुरी समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभुनाथ राय और राष्ट्रीय महासचिव मनोज सिंह ने सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट कर उन्हें छठ महापर्व का औपचारिक निमंत्रण दिया। प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के सभी प्रमुख छठ घाटों पर सुव्यवस्थित प्रबंध सुनिश्चित करने के साथ 15 एवं 16 नवंबर को सार्वजनिक अवकाश घोषित करने का आग्रह किया। संगठन के अनुसार, मुख्यमंत्री ने प्रदेशव्यापी आयोजन और अवकाश के संबंध में आश्वासन दिया।
भेंट का दायरा केवल निमंत्रण तक सीमित नहीं रहा। प्रतिनिधिमंडल ने नदियों, तालाबों और जलाशयों के घाटों पर समयबद्ध स्वच्छता, प्रकाश, मैटिंग तथा श्रद्धालुओं की सुविधाओं की मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। विशेष आग्रह महिलाओं की सुरक्षा को लेकर रहा, क्योंकि छठ की आस्था का सबसे बड़ा दृश्य प्रातः और सायंकालीन अर्घ्य के समय घाटों पर उमड़ने वाली विशाल भीड़ में दिखाई देता है।
लखनऊ का लक्ष्मण मेला मैदान स्थित गोमती तट इस परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। अखिल भारतीय भोजपुरी समाज के अनुसार, वह पिछले 43 वर्षों से यहीं छठ महापर्व का आयोजन करता आ रहा है। वर्ष 2017 से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होने का क्रम भी रहा है। इस वर्ष 15 नवंबर को शाम चार बजे मुख्यमंत्री द्वारा छठ महापर्व का उद्घाटन किए जाने की जानकारी संगठन ने दी है।
छठ के आयोजन की व्यापकता ने इसे क्षेत्रीय परिधि से निकालकर व्यापक सामाजिक-सांस्कृतिक पर्व का स्वरूप दिया है। सूर्योपासना, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और लोकआस्था से अनुप्राणित यह पर्व देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों में बसे भारतीय समुदायों के बीच भी मनाया जाता है। इसी बढ़ते विस्तार को देखते हुए भोजपुरी समाज ने शासन से व्यवस्थाओं को स्थानीय आयोजन तक सीमित न रखकर प्रदेशव्यापी स्वरूप देने का आग्रह किया।
वार्ता में भोजपुरी अकादमी के गठन का विषय भी प्रमुखता से उठा। प्रतिनिधिमंडल ने भोजपुरी भाषा, साहित्य, लोकसंस्कृति और उससे जुड़े सामाजिक सरोकारों के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता मुख्यमंत्री के समक्ष रखी। छठ के बहाने भाषा और संस्कृति से जुड़े इस प्रश्न का उठना बैठक को एक व्यापक सांस्कृतिक विमर्श में बदल गया।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष यह भी कहा कि छठ के अवसर पर घाटों की स्वच्छता, प्रकाश, मैटिंग और सुरक्षा जैसी व्यवस्थाएं केवल धार्मिक आयोजन की सुविधा नहीं, बल्कि बड़े जनसमूह की नागरिक सुरक्षा से जुड़ा विषय हैं। विशेषकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षित आवाजाही, भीड़ प्रबंधन तथा घाटों पर मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता को प्राथमिकता देने की आवश्यकता रेखांकित की गई।
अखिल भारतीय भोजपुरी समाज के अनुसार, मुख्यमंत्री ने प्रदेशभर में छठ पूजा के आयोजन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा सार्वजनिक अवकाश के संबंध में आश्वासन दिया है। अब इस मुलाकात के बाद प्रशासनिक तैयारियों और शासन के औपचारिक निर्णय पर निगाह रहेगी।
छठ की सांस्कृतिक यात्रा जिस गति से विस्तृत हो रही है, उसमें इस वर्ष का लखनऊ आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पूर्वांचली लोकपरंपरा, सामाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक अस्मिता के व्यापक समागम के रूप में सामने आने की तैयारी में है।