
बाढ़ के बीच लखनऊ सांसद एवं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संभाला मोर्चा—मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एरियल सर्वे के बाद स्थायी समाधान के लिए बंधा निर्माण की घोषणा की; विधायक डॉ. नीरज बोरा के प्रयासों की सराहना, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक तंत्र ने राहत एवं स्थायी समाधान की दिशा में बढ़ाया कदम

दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली। गोमती नदी में अचानक बढ़े जलस्तर ने राजधानी लखनऊ के फैजुल्लागंज क्षेत्र में जनजीवन को जिस तरह प्रभावित किया, उसने एक बार फिर नदी तटीय बस्तियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए। जलभराव और बाढ़ की विभीषिका के बीच नागरिकों की तत्काल राहत के साथ उस स्थायी समाधान की आवश्यकता भी सामने आई, जिसकी प्रतीक्षा संकट समाप्त होने के बाद फिर किसी अगले संकट तक टलती रही है। इस बार घटनाक्रम ने इसी स्थायी समाधान की दिशा में निर्णायक मोड़ लिया है।

फैजुल्लागंज की विषम परिस्थितियों का संज्ञान लेते हुए लखनऊ के सांसद एवं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वर्तमान स्थिति पर चर्चा की। उन्होंने गोमती के बाएं तट पर आईआईएम रोड से हार्डिंग ब्रिज तक बंधे के निर्माण को स्थायी समाधान के रूप में स्वीकृति प्रदान कर शीघ्र क्रियान्वित कराने का आग्रह किया। उनका प्रयास तत्काल राहत से आगे बढ़कर उस स्थायी सुरक्षा-व्यवस्था की ओर केंद्रित रहा, जो भविष्य में गोमती के बढ़ते जलस्तर से क्षेत्र के नागरिकों को बार-बार उत्पन्न होने वाली कठिनाइयों से बचा सके।
इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 5 अक्टूबर को बाढ़ प्रभावित फैजुल्लागंज क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण कर जमीनी स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। प्रभावित क्षेत्र की परिस्थितियों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने पक्का पुल से नैमिषारण्य तक बंधा निर्माण की घोषणा की। इस घोषणा ने संकटग्रस्त क्षेत्र के लिए राहत की तत्काल आवश्यकता को दीर्घकालिक सुरक्षा के संकल्प से जोड़ दिया।
इस पूरे प्रयास में क्षेत्रीय विधायक डॉ. नीरज बोरा की सक्रियता भी उल्लेखनीय रही। मुख्यमंत्री के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में मौजूद रहे विधायक डॉ. नीरज बोरा ने स्थानीय परिस्थितियों को सामने रखते हुए स्थायी समाधान की आवश्यकता को निरंतर प्रमुखता दी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में डॉ. नीरज बोरा द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। संकट की घड़ी में स्थानीय जनप्रतिनिधि की सक्रियता और शासन के उच्च स्तर पर उस पहल का संज्ञान, फैजुल्लागंज के नागरिकों के लिए विशेष महत्व रखता है।
मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, बख्शी का तालाब के विधायक योगेश शुक्ला और विधायक डॉ. नीरज बोरा भी उपस्थित रहे। प्रभावित क्षेत्र की परिस्थितियों का अवलोकन और आवश्यक कदमों पर विमर्श इस बात का संकेत रहा कि बाढ़ की समस्या को केवल तात्कालिक राहत तक सीमित न रखकर उसके स्थायी निराकरण की दिशा में भी प्रशासनिक निर्णय लिए जा रहे हैं।
बंधा निर्माण की घोषणा के साथ ही प्रस्ताव को प्रशासनिक प्रक्रिया में आगे बढ़ाने की कवायद भी प्रारंभ हो गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के निर्देश पर विधायक डॉ. नीरज बोरा ने लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष से भेंट कर प्रस्तावित बंधे के निर्माण की आवश्यकता रखी। इसके बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव को प्रस्ताव भेजते हुए इस कार्य को अवस्थापना विकास की कार्ययोजना में सम्मिलित किए जाने का अनुरोध किया।
यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बाढ़ के समय राहत पहुंचाना आवश्यक है, किंतु प्रत्येक वर्ष अथवा प्रत्येक जलसंकट के बाद उसी समस्या के सामने खड़े हो जाना स्थायी समाधान नहीं हो सकता। प्रस्तावित बंधा यदि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शीघ्र आकार लेता है तो फैजुल्लागंज के लिए यह केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि गोमती के उफनते जल से सुरक्षा की दीर्घकालिक आधाररेखा सिद्ध हो सकता है।
दूसरी ओर, संकट की घड़ी में राहत कार्यों को लेकर भी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रशासन को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने जिलाधिकारी से दूरभाष पर बातचीत कर प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में नावों की व्यवस्था, खाद्यान्न, पेयजल तथा दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। इसके साथ ही चिकित्सा शिविर और अस्थायी आवासीय शिविर स्थापित करने तथा राहत एवं बचाव कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।
राजनाथ सिंह ने प्रशासन को यह भी निर्देशित किया कि प्रभावित नागरिकों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए और स्थिति की निरंतर निगरानी रखी जाए। किसी भी स्तर पर प्रशासनिक शिथिलता अथवा लापरवाही न हो, इसे सुनिश्चित करने पर भी उन्होंने विशेष बल दिया। इस दृष्टि से तत्काल राहत और दीर्घकालिक सुरक्षा—दोनों मोर्चों पर समानांतर कार्रवाई की आवश्यकता स्पष्ट रूप से सामने आई है।
फैजुल्लागंज की वर्तमान स्थिति ने यह भी रेखांकित किया है कि महानगर के नदी तटीय क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन का अर्थ केवल संकट के समय राहत सामग्री पहुंचाना नहीं, बल्कि जलप्रवाह, तट सुरक्षा और नागरिक बस्तियों की दीर्घकालिक संरक्षा के लिए ऐसी आधारभूत संरचनाओं का निर्माण करना भी है, जो संकट की पुनरावृत्ति के प्रभाव को न्यूनतम कर सकें। आईआईएम रोड से हार्डिंग ब्रिज तक प्रस्तावित बंधा इसी व्यापक आवश्यकता की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
गोमती के बढ़ते जलस्तर से परेशान नागरिकों के लिए इस घटनाक्रम की सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि इस बार संकट के साथ समाधान की दिशा भी स्पष्ट हुई है। रक्षा मंत्री एवं लखनऊ सांसद राजनाथ सिंह की पहल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की त्वरित सक्रियता, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक एवं अधिकारियों की मौजूदगी तथा विधायक डॉ. नीरज बोरा के स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयासों ने तत्काल राहत और स्थायी सुरक्षा को एक ही कार्ययोजना से जोड़ दिया है।
अब फैजुल्लागंज की निगाहें उस अगले चरण पर हैं, जहां घोषणा प्रशासनिक प्रक्रिया से निकलकर धरातल पर दिखाई देगी। बाढ़ से जूझते नागरिकों के लिए असली राहत उस दिन होगी, जब प्रस्तावित बंधा आकार लेकर गोमती के उफान के सामने सुरक्षा की मजबूत दीवार बनकर खड़ा होगा। फिलहाल, संकट के बीच स्थायी समाधान की यह पहल प्रभावित नागरिकों के लिए राहत, भरोसे और भविष्य की सुरक्षा की एक नई उम्मीद लेकर आई है।