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नव संवत्सर व चैत्र नवरात्रि पर राष्ट्रीय सनातन महासंघ का ओजस्वी संदेश—सनातन चेतना के पुनर्जागरण का दिव्य आह्वान

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नव संवत्सर व चैत्र नवरात्रि पर राष्ट्रीय सनातन महासंघ का ओजस्वी संदेश—सनातन चेतना के पुनर्जागरण का दिव्य आह्वान


दैनिक इंडिया न्यूज़ ,नई दिल्ली।राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अध्यक्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह ने भारतीय नववर्ष एवं चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर समस्त राष्ट्र को संबोधित करते हुए एक अत्यंत ओजस्वी, दार्शनिक एवं चेतनामय संदेश प्रेषित किया। उन्होंने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को भारतीय वैज्ञानिक कालगणना का मूलाधार बताते हुए नव युगाब्द वर्ष 5128 एवं विक्रम संवत्सर 2083 के शुभारंभ को सनातन संस्कृति की अखंड जीवंतता एवं पुनरुत्थान का प्रतीक बताया।


उन्होंने अपने उद्बोधन में नवरात्रि को केवल उत्सव नहीं, बल्कि साधना, संयम, त्याग और आत्मानुशासन का दिव्य अवसर निरूपित करते हुए कहा कि यह पर्व शक्ति के नौ स्वरूपों की उपासना के माध्यम से आत्मशुद्धि और चेतना-विस्तार का मार्ग प्रशस्त करता है। उपनिषदों के “एकोऽहं बहुस्याम्” सिद्धांत का उल्लेख करते हुए उन्होंने भारतीय संस्कृति की बहुलता में एकत्व की भावना को विश्व के लिए आदर्श बताया।


अंततः उन्होंने माँ आदिशक्ति से समस्त राष्ट्र के कल्याण, समृद्धि एवं आध्यात्मिक उत्कर्ष की मंगलकामना करते हुए सभी देशवासियों को नव संवत्सर एवं नवरात्रि की हार्दिक शुभाशंसाएँ प्रेषित कीं।

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