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टिकरी बॉर्डर के पास विकास का दावा बेदम, लेखराम पार्क की सड़कें बनीं नागरिकों की दुश्वारी का पर्याय

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Dainik India News

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विधायक से सांसद और पार्षद तक बदलते रहे, सरकारें भी बदलीं; लेकिन लेखराम पार्क की बदहाल सड़कें, दुर्गंध और जलभराव जस के तस—बारिश में घुटनों से ऊपर पानी, घरों में सीलन और दरकती छतों के बीच नागरिक पूछ रहे हैं: आखिर सड़क कब बनेगी?

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दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।दिल्ली के टिकरी बॉर्डर मेट्रो स्टेशन के समीप स्थित लेखराम पार्क क्षेत्र चुनावी वादों और जमीनी हकीकत के बीच पसरी उस खाई का सजीव उदाहरण बन गया है, जिसे वर्षों से विकास के दावों के बावजूद पाटा नहीं जा सका। पुरानी आबादी वाले इस क्षेत्र में विधायक, सांसद, पार्षद और महापौर बदलते रहे, राजनीतिक सत्ता का समीकरण बदलता रहा, लेकिन स्थानीय नागरिकों के लिए बदहाल सड़कें, दुर्गंध, जलभराव और आवागमन की दुश्वारियां आज भी वैसी ही हैं। दैनिक इंडिया न्यूज़ की मौके पर की गई रिपोर्टिंग में सामने आई तस्वीरें राजधानी के विकास मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार चुनाव के समय आश्वासनों का सिलसिला तेज हो जाता है—सड़क शीघ्र बनाने, जलनिकासी दुरुस्त करने और क्षेत्र की दशा बदलने के वादे किए जाते हैं; लेकिन चुनाव समाप्त होते ही वही समस्याएं पुनः उपेक्षा के अंधकार में चली जाती हैं। नागरिकों का कहना है कि यह सिलसिला एक-दो चुनाव का नहीं, बल्कि वर्षों से चला आ रहा है और सरकारें बदलने के बावजूद धरातल पर अपेक्षित परिवर्तन दिखाई नहीं दिया।

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स्थिति की भयावहता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि बारिश के दौरान क्षेत्र की सड़कों पर घुटनों से ऊपर तक पानी भरने की शिकायत सामने आती है। ऐसे समय में मेट्रो स्टेशन तक पहुंचना भी स्थानीय निवासियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं रह जाता। सड़क और जलनिकासी व्यवस्था की यह दुर्दशा केवल यातायात को प्रभावित नहीं करती, बल्कि दैनिक जीवन, रोजगार, शिक्षा और आपातकालीन आवागमन तक को कठिन बना देती है।

जलभराव का दुष्प्रभाव अब केवल सड़कों तक सीमित नहीं बताया जा रहा। स्थानीय नागरिकों के अनुसार लंबे समय तक पानी जमा रहने और नमी के कारण घरों में सीलन बढ़ रही है तथा कुछ मकानों की छतों और दीवारों में कुछ वर्षों के भीतर दरारें दिखाई देने लगी हैं। यदि जलनिकासी और सड़क निर्माण की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो यह स्थिति भविष्य में नागरिक सुरक्षा के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन सकती है।

विडंबना यह है कि आसपास सरकारी मॉडल विद्यालय और निजी शिक्षण संस्थान सहित आवश्यक शहरी सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन उन तक पहुंचने वाला मार्ग ही नागरिकों के लिए सबसे बड़ी बाधा बन गया है। जिस राजधानी को देश के विकास, आधुनिक आधारभूत संरचना और सुशासन का प्रतीक प्रस्तुत किया जाता है, उसी राजधानी के एक पुराने आवासीय क्षेत्र में नागरिकों का सामान्य आवागमन यदि जलभराव और दुर्गंध से बाधित हो, तो यह केवल स्थानीय समस्या नहीं बल्कि नगरीय प्रशासन की प्राथमिकताओं पर प्रश्नचिह्न है।

स्थानीय लोगों में मौजूदा सरकार और जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा भी है और आक्रोश भी। नागरिकों का कहना है कि सत्ता परिवर्तन से उन्हें आश्वासन तो बार-बार मिले, लेकिन सड़क पर ठोस परिणाम दिखाई नहीं दिया। अब लोगों को घोषणाओं से अधिक समयबद्ध कार्यवाही, गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण और स्थायी जलनिकासी व्यवस्था चाहिए।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार के सामने यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राजधानी में प्रशासनिक इच्छाशक्ति और त्वरित कार्रवाई को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। स्थानीय नागरिकों की अपेक्षा है कि जिस प्रकार शासन स्तर पर अतिक्रमण और अव्यवस्था के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की बात कही जाती है, उसी तत्परता के साथ नागरिकों की मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं पर भी ध्यान दिया जाए।

लेखराम पार्क के लोग अब किसी नए चुनावी आश्वासन की प्रतीक्षा में नहीं हैं। उनकी मांग अपेक्षाकृत सरल है—चलने योग्य सड़क, प्रभावी जलनिकासी, दुर्गंध से मुक्ति और सुरक्षित आवागमन। सवाल अब यह है कि दशकों से लंबित इस समस्या पर प्रशासनिक फाइलों की गति तेज होगी या फिर अगला चुनाव आते ही एक बार फिर वही आश्वासन दोहराए जाएंगे।

दैनिक इंडिया न्यूज़ की यह ग्राउंड रिपोर्ट राजधानी के उस हिस्से की आवाज है, जहां नागरिक विकास की घोषणाएं नहीं, उसका प्रत्यक्ष अनुभव चाहते हैं। अब निगाहें दिल्ली सरकार, नगर प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर हैं—क्या लेखराम पार्क की सड़कें वास्तव में बनेंगी, और यदि बनेंगी तो कब?

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