विधान भवन के समक्ष ध्वजारोहण के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शहीदों के परिजनों को किया सम्मानित; कहा—स्वाधीनता विरासत में मिली, लेकिन विकसित भारत का निर्माण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी, युवा शक्ति के हाथों में प्रदेश के भविष्य की दिशा

दैनिक इंडिया न्यूज़, 15 अगस्त 2026 लखनऊ।
स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ पर उत्तर प्रदेश ने अपने अतीत के गौरव, वर्तमान की उपलब्धियों और भविष्य के संकल्पों को एक ही मंच पर समेटते हुए विकास की नई तस्वीर प्रस्तुत की। विधान भवन के समक्ष आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ध्वजारोहण कर राष्ट्रध्वज को नमन किया और शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया। अपने संबोधन में उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, क्रांतिकारियों और वीर सैनिकों के बलिदान को स्मरण करते हुए कहा कि स्वाधीनता हमें विरासत में मिली है, लेकिन विकसित भारत का निर्माण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत की परिकल्पना तभी साकार होगी, जब उत्तर प्रदेश के प्रत्येक नागरिक, प्रत्येक युवा, किसान, महिला, शिक्षक और श्रमिक अपने-अपने दायित्वों का पूर्ण निष्ठा से निर्वहन करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी की लड़ाई उत्तर प्रदेश के योगदान के बिना अधूरी है। प्रदेश की धरती ने ऐसे अनेक क्रांतिकारियों को जन्म दिया, जिन्होंने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। इसी क्रम में उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस के स्पेशल टास्क फोर्स के जांबाज इंस्पेक्टर शहीद सुनील कुमार के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को भी स्मरण किया। उनके अनुसार स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ केवल राजनीतिक स्वाधीनता नहीं, बल्कि ऐसा समाज और ऐसा राष्ट्र निर्मित करना है, जहां प्रत्येक नागरिक सम्मानपूर्वक जीवन जी सके। इसी विचार से उन्होंने प्रदेश के विकास की प्राथमिकताओं को सामने रखा।

मुख्यमंत्री ने पिछले नौ वर्षों की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में असमानता, पिछड़ेपन, गरीबी और अशिक्षा जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश का बजट और प्रति व्यक्ति आय विगत नौ वर्षों में तीन गुना बढ़ी है तथा उत्तर प्रदेश अब निवेश के ड्रीम डेस्टिनेशन के रूप में अपनी पहचान सुदृढ़ कर रहा है। सुशासन के परिणामस्वरूप प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में 75 हजार एकड़ से अधिक का डेडिकेटेड लैंड बैंक उपलब्ध है, जबकि बुंदेलखंड क्षेत्र में 56 हजार एकड़ में फ्यूचर रेडी टाउनशिप की दिशा में कार्य आगे बढ़ रहा है।

विकास के इस बदलते परिदृश्य को मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक परिवर्तन से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब ‘उपद्रव प्रदेश’ की छवि से निकलकर ‘उत्सव प्रदेश’ बना है और सुशासन के एक नए मॉडल की ओर अग्रसर हुआ है। उन्होंने ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ से लेकर ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज’, ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन’, ‘वन डिवीजन वन स्टेट यूनिवर्सिटी’, ‘वन डिवीजन वन अटल आवासीय विद्यालय’ और ‘वन डिवीजन वन फॉरेंसिक लैब’ जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश की विकास यात्रा अब क्षेत्रीय क्षमताओं और स्थानीय विशिष्टताओं को नई आर्थिक शक्ति में परिवर्तित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री के संबोधन में सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक प्रदेश की युवा शक्ति रही। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का युवा प्रतिभावान, परिश्रमी और देश-समाज के लिए कुछ कर गुजरने की इच्छा शक्ति से परिपूर्ण है। इसी युवा क्षमता को भविष्य की अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डाटा सेंटर, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, साइबर, एग्रीटेक, फिनटेक, डीपटेक और मेडटेक जैसे क्षेत्रों में तेजी से कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे निवेश, नवाचार और रोजगार के नए अवसर खुल रहे हैं। उन्होंने घोषणा की कि प्रदेश सरकार शीघ्र नई यूथ पॉलिसी लेकर आ रही है, जिसका उद्देश्य युवाओं के कौशल, नवाचार और रोजगार को एकीकृत दृष्टिकोण के साथ और अधिक मजबूती प्रदान करना है।
युवा शक्ति को विकास की धुरी बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की यात्रा अब एक्सप्रेस-वे से एयरपोर्ट, डिजिटल इंडिया से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कृषि से उद्योग, युवा शक्ति से स्टार्टअप शक्ति और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग से डीप टेक तक पहुंच चुकी है। उनके अनुसार प्रदेश में विरासत और आधुनिकता के बीच संतुलन स्थापित करते हुए ऐसा उत्तर प्रदेश निर्मित किया जा रहा है, जहां परंपराओं की जड़ें मजबूत रहें और विकास के पंख नई ऊंचाइयों को स्पर्श करें।
गरीबी उन्मूलन और सामाजिक न्याय को विकास का मूल आधार बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में छह करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से ऊपर उठाने में सफलता मिली है। डीबीटी के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे सहायता पहुंचाकर बिचौलियों की भूमिका समाप्त करने की दिशा में कार्य किया गया। विगत नौ वर्षों में 65 लाख से अधिक परिवारों को आवास, तीन करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को शौचालय, दो करोड़ से अधिक परिवारों को निशुल्क रसोई गैस कनेक्शन, 10 करोड़ से अधिक लोगों को स्वास्थ्य सुविधा और 16 करोड़ जरूरतमंदों को निशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक उसका अधिकार पहुंचना ही अंत्योदय का वास्तविक अर्थ है।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के माध्यम से प्राथमिक विद्यालयों में 19 बुनियादी सुविधाओं के संतृप्तीकरण का कार्य हुआ है। सीएम अभ्युदय विद्यालय, पीएम श्री विद्यालय और सीएम कंपोजिट विद्यालय मॉडल के रूप में विकसित हो रहे हैं। प्रदेश में स्कूल ड्रॉपआउट दर 19 प्रतिशत से घटकर तीन प्रतिशत रह जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने शिक्षा को राष्ट्रनिर्माण की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की पहली पंक्ति का योद्धा है। इसी भावना के साथ शिक्षकों, शैक्षणिक कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था की गई है। शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक और रसोइया को उचित मानदेय का लाभ दिए जाने का भी उन्होंने उल्लेख किया।
स्वास्थ्य के मोर्चे पर इंसेफेलाइटिस जैसी संचारी बीमारियों पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा आयुष्मान भारत से जुड़े 10 करोड़ लाभार्थियों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुविधा का कवर मिलने की बात मुख्यमंत्री ने कही। उनके अनुसार स्वस्थ नागरिक ही सशक्त समाज और उत्पादक अर्थव्यवस्था की आधारभूमि तैयार करता है, इसलिए विकास की अवधारणा में स्वास्थ्य और शिक्षा को समान महत्व दिया गया है।
नारी शक्ति को प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन की महत्वपूर्ण वाहक बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उद्यम और स्वरोजगार से जुड़ रही हैं तथा बैंकिंग व्यवस्था में सक्रिय भागीदारी कर रही हैं। बीसी सखी, लखपति दीदी, ड्रोन दीदी, मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियों और एफपीओ के माध्यम से महिलाएं प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही हैं। पीएम मातृ वंदना योजना, सुकन्या समृद्धि योजना और कन्या सुमंगला योजना के माध्यम से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को गति मिलने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य आधी आबादी को समाज के प्रत्येक क्षेत्र में प्रभावी भागीदारी देना है।
महिला सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री ने मिशन शक्ति के पांच चरणों के सफल संचालन और प्रदेश के प्रत्येक थाने में मिशन शक्ति केंद्र होने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को मजबूत किया जा रहा है। 17 नगर निगमों तथा गौतमबुद्धनगर सहित 18 शहरों के सेफ सिटी परियोजना से जुड़ने और स्टार्टअप में महिलाओं की 50 प्रतिशत सहभागिता का भी उन्होंने उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुदृढ़ कानून-व्यवस्था ने प्रदेश की बेटियों में सुरक्षा और आत्मविश्वास की भावना को मजबूत किया है।
किसानों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान का सम्मान भारत के अन्न का सम्मान है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत तीन करोड़ से अधिक किसानों को एक लाख चार हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों को सिंचाई, बीज, खाद, नई तकनीक, भंडारण, प्रसंस्करण और बाजार से जोड़ने की दिशा में लगातार कार्य हुआ है। प्रदेश में 24 लाख हेक्टेयर भूमि में अतिरिक्त सिंचाई सुविधा तथा 16 लाख निजी नलकूप संचालित करने वाले किसानों को निशुल्क विद्युत कनेक्शन और विद्युत सुविधा उपलब्ध कराने की बात भी उन्होंने कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन प्रयासों का प्रभाव प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है और पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर आठ प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत तक पहुंची है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के माध्यम से प्रभावित किसानों को सहायता उपलब्ध कराने का भी उल्लेख किया गया। उनके अनुसार यह परिवर्तन केवल आंकड़ों का बदलाव नहीं, बल्कि प्रदेश के किसान के आत्मविश्वास में आए परिवर्तन का भी द्योतक है।
ग्रामीण विकास और डिजिटल सेवाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की 57,600 से अधिक ग्राम पंचायतों को ग्राम सचिवालय से जोड़ने का कार्य किया गया है। उनका कहना था कि डिजिटल शासन की वास्तविक सफलता तभी है, जब तकनीक का लाभ गांव और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसी व्यापक दृष्टिकोण को उन्होंने अंत्योदय और सुशासन की अवधारणा से जोड़ा।
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी विकास की अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन, प्रयागराज, विंध्याचल, चित्रकूट, शुक्रतीर्थ, संभल, बरेली और नैमिषारण्य सहित प्रमुख तीर्थस्थलों के साथ भगवान बुद्ध से जुड़े कपिलवस्तु, सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कौशांबी और संकिसा जैसे विरासत स्थलों के संरक्षण और विकास का उल्लेख किया। संत कबीरदास, संत रविदास, महर्षि वाल्मीकि तथा सामाजिक न्याय के अन्य पुरोधाओं की विरासत के सम्मान की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को भी उन्होंने रेखांकित किया। इन प्रयासों से पर्यटन और रोजगार के नए अवसर सृजित होने की बात कहते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में 156 करोड़ से अधिक पर्यटकों के उत्तर प्रदेश आने का उल्लेख किया।
उन्होंने अजय कालिंजर किले के गणतंत्र दिवस झांकी में शामिल होने तथा सारनाथ के यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होने का उल्लेख किया। अयोध्या सहित प्रदेश के 16 नगर निगमों को सोलर सिटी के रूप में विकसित किए जाने की दिशा में चल रहे प्रयासों की भी जानकारी दी। इस प्रकार मुख्यमंत्री ने विकास की परिभाषा को केवल आधारभूत संरचना तक सीमित न रखते हुए विरासत, पर्यटन, ऊर्जा, संस्कृति और रोजगार से जोड़ने का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत एक ही दिन में 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जाने का उल्लेख किया। ‘एक जनपद एक नदी योजना’ के माध्यम से लुप्तप्राय और सूखी छोटी नदियों के पुनरुद्धार की दिशा में किए जा रहे कार्यों को भी उन्होंने रेखांकित किया। यह पहल विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता को सामने रखती है।
समारोह के समापन संदेश में मुख्यमंत्री ने ऐसे उत्तर प्रदेश की परिकल्पना रखी, जिसमें विरासत का गौरव, भविष्य की तकनीक, संस्कृति के प्रति आत्मविश्वास और आधुनिकता की गति एक साथ दिखाई दे। उनके संबोधन में किसान की समृद्धि, बेटी के सपनों की उड़ान, गांव के विकास, नागरिक के सम्मान, युवा के कौशल और रोजगार तथा प्रदेश की आर्थिक प्रगति को एक ही विकास-दर्शन के अलग-अलग आयामों के रूप में प्रस्तुत किया गया।
स्वतंत्रता दिवस के इस मंच से मुख्यमंत्री का संदेश अंततः एक व्यापक राष्ट्रीय संकल्प में परिवर्तित होता दिखाई दिया—स्वाधीनता पूर्वजों के संघर्ष से अर्जित हुई, लेकिन विकसित भारत की गाथा वर्तमान पीढ़ी के कर्म से लिखी जानी है। उत्तर प्रदेश इस यात्रा में स्वयं को निर्णायक भूमिका के लिए तैयार कर रहा है; और उसकी सबसे बड़ी शक्ति वही युवा ऊर्जा है, जिसे कौशल, नवाचार, अनुशासन और रोजगार से जोड़कर भविष्य के भारत की आधारशिला बनाने का लक्ष्य सामने रखा गया है।