योगी ने शुरू किया 2026-27 की छात्रवृत्ति वितरण का पहला चरण; 70 लाख विद्यार्थियों तक लाभ पहुंचाने का लक्ष्य—कहा, धन के अभाव में किसी की पढ़ाई नहीं रुकेगी

दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।उत्तर प्रदेश में पढ़ाई और आर्थिक अभाव के बीच खिंची वह महीन रेखा, जो अक्सर किसी विद्यार्थी के भविष्य का फैसला कर देती है, उसे मिटाने की कवायद शनिवार को उस समय एक नए चरण में पहुंची, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4,60,559 छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में 148.04 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से अंतरित की। लखनऊ के लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में 11 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रमाणपत्र भी प्रदान किए गए। मगर यह केवल एक दिन में राशि भेजे जाने का कार्यक्रम नहीं था; इसके पीछे सरकार ने इस वर्ष 70 लाख विद्यार्थियों तक छात्रवृत्ति पहुंचाने का जो लक्ष्य रखा है, उसकी पूरी रूपरेखा भी सामने आई।

लेकिन इस पूरी कवायद का महत्व केवल 148 करोड़ रुपये के आंकड़े में नहीं छिपा है। असली प्रश्न यह है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार का वह विद्यार्थी, जिसके सामने फीस, पुस्तक, वर्दी, आवागमन और दूसरी शैक्षणिक आवश्यकताओं का खर्च एक साथ खड़ा हो जाता है, उसकी पढ़ाई किस तरह निर्बाध रहे। मुख्यमंत्री ने इसी बिंदु को रेखांकित करते हुए कहा कि छात्रवृत्ति महज सरकारी सहायता नहीं, बल्कि उन विद्यार्थियों के सपनों को आगे बढ़ाने का माध्यम है, जिनके परिवार शिक्षा का पूरा खर्च वहन करने की स्थिति में नहीं होते। और यहीं से सरकार की छात्रवृत्ति व्यवस्था के अगले पड़ाव की कहानी शुरू होती है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि धनाभाव किसी पात्र विद्यार्थी की शिक्षा के मार्ग में अवरोध न बने। उनके अनुसार छात्रवृत्ति की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया गया है और स्वीकृत राशि सीधे विद्यार्थी के बैंक खाते में भेजी जा रही है। सरकार के तंत्र में यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि छात्रवृत्ति की राशि का वास्तविक लाभ तभी विद्यार्थी तक पहुंच सकता है, जब आवेदन से लेकर सत्यापन और भुगतान तक की पूरी श्रृंखला में कहीं कोई कड़ी कमजोर न पड़े। इसी कमजोर कड़ी को मजबूत करने के लिए अब विभागों को भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

यहीं से छात्रवृत्ति वितरण की पुरानी और नई व्यवस्था का अंतर सामने आता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले ऐसी स्थिति सामने आती थी, जब विद्यार्थियों के लिए स्वीकृत धनराशि का पूरा लाभ उन तक नहीं पहुंच पाता था। उनका कहना था कि अब व्यवस्था ऐसी बनाई गई है कि विद्यार्थी के लिए जितनी राशि स्वीकृत हो, उतनी ही धनराशि सीधे उसके खाते में पहुंचे। डीबीटी आधारित व्यवस्था का उद्देश्य बिचौलियों की भूमिका घटाना और भुगतान को प्रत्यक्ष बनाना है। इस व्यवस्था की अगली परीक्षा हालांकि उन विद्यार्थियों के लिए है, जिनका आवेदन किसी त्रुटि, विलंब अथवा संस्थागत कारण से अटक जाता है।
इसीलिए मुख्यमंत्री ने विभागों को निर्देश दिया कि केवल पहली सूची में शामिल विद्यार्थियों तक राशि पहुंचाकर प्रक्रिया को पूर्ण न माना जाए। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष ऐसे लगभग चार लाख विद्यार्थी सामने आए थे, जिन्हें विभिन्न कारणों से छात्रवृत्ति नहीं मिल पाई थी। इसके बाद पोर्टल को सक्रिय कर ऐसे विद्यार्थियों तक भी राशि पहुंचाने की व्यवस्था की गई। किसी संस्था की त्रुटि, आवेदन में विलंब अथवा किसी अन्य तकनीकी समस्या के कारण छूटे विद्यार्थियों को दोबारा अवसर देने की यह व्यवस्था छात्रवृत्ति तंत्र की उस चुनौती की ओर संकेत करती है, जहां पात्रता होने के बावजूद प्रक्रिया संबंधी अड़चन लाभार्थी और सहायता के बीच दीवार बन सकती है।
समय भी इस पूरी व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पक्ष है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रवृत्ति ऐसी सहायता नहीं होनी चाहिए, जो विद्यार्थी को पूरे वर्ष की पढ़ाई समाप्त होने के बाद मिले। विद्यार्थी जिस समय प्रवेश लेता है, उसी के बाद सहायता की प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए और पात्र विद्यार्थी के खाते में धनराशि पहुंचनी चाहिए। इसी उद्देश्य से छात्रवृत्ति को वर्ष में दो बार समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। दो अक्टूबर को गांधी जयंती के राजकीय अवकाश के कारण इस वर्ष वितरण की शुरुआत तीन अक्टूबर से की गई और सरकार ने आगामी 26 जनवरी तक सभी पात्र विद्यार्थियों तक राशि पहुंचाने का प्रयास करने की बात कही है।
इस समयबद्धता के पीछे आंकड़ों का एक बड़ा विस्तार भी है। मुख्यमंत्री के अनुसार पिछले वर्ष प्रदेश में 69 लाख विद्यार्थियों को लगभग 6,200 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति वितरित की गई थी और 2026-27 में लाभार्थियों की संख्या 70 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। पिछले नौ वर्षों में चार करोड़ से अधिक विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ दिए जाने का दावा भी कार्यक्रम में किया गया। इस वर्ष के प्रथम चरण में 4,60,559 विद्यार्थियों तक 148.04 करोड़ रुपये पहुंचाए गए हैं। इनमें अन्य पिछड़ा वर्ग के 2,23,615 विद्यार्थियों को 60.01 करोड़ रुपये, अनुसूचित जाति के 1,59,959 विद्यार्थियों को 64.54 करोड़ रुपये, सामान्य वर्ग के 38,084 विद्यार्थियों को 11.43 करोड़ रुपये और अल्पसंख्यक वर्ग के 38,901 विद्यार्थियों को 12.06 करोड़ रुपये दिए गए।
इन आंकड़ों के पीछे एक और बड़ा बदलाव मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया। उनके अनुसार पहले प्रदेश में छात्रवृत्ति के लिए लगभग 2,900 करोड़ रुपये की व्यवस्था थी, जबकि अब यह राशि करीब 6,200 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने वर्ष 2017 के बाद लंबित छात्रवृत्ति के भुगतान का भी उल्लेख किया और कहा कि वित्तीय वर्ष 2016-17 तथा 2017-18 की छात्रवृत्ति संबंधित विद्यार्थियों तक पहुंचाने का कार्य किया गया। 2016-17 में अनुसूचित जाति और जनजाति के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति न भेजे जाने संबंधी उनका वक्तव्य कार्यक्रम में सरकार के पिछले और वर्तमान कार्यकाल की तुलना के संदर्भ में आया; ऐसे ऐतिहासिक दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित सरकारी अभिलेखों को आधार बनाया जाना आवश्यक है।
मगर मुख्यमंत्री का संबोधन छात्रवृत्ति की राशि पर ठहरने वाला नहीं था। उन्होंने शिक्षा की उस व्यापक संरचना का भी उल्लेख किया, जिसके भीतर छात्रवृत्ति को एक कड़ी के रूप में देखा गया। उनका कहना था कि यदि विद्यालय का वातावरण ही विद्यार्थी के अनुकूल न हो, तो केवल आर्थिक सहायता पर्याप्त नहीं होगी। इसी संदर्भ में उन्होंने ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से विद्यालयों में पेयजल, पृथक शौचालय, फर्श, फर्नीचर और डिजिटल सुविधाओं के विस्तार का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेसिक शिक्षा परिषद के लगभग 1.60 करोड़ बच्चों को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म, बैग, पुस्तकें, जूते, मोजे और स्वेटर के लिए सहायता दिए जाने की बात भी उन्होंने कही। इसके साथ ही गरीब, श्रमिक और निराश्रित परिवारों के बच्चों के लिए अटल आवासीय विद्यालयों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि 18 मंडलों में संचालित इन विद्यालयों में लगभग 18,000 बच्चों का प्रवेश हो चुका है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का विस्तार भी इसी श्रृंखला का हिस्सा बताया गया, जहां प्रदेश के 746 विकासखंडों में विद्यालय संचालित होने की जानकारी दी गई।
लेकिन शिक्षा के बुनियादी ढांचे की यह तस्वीर माध्यमिक स्तर तक पहुंचते ही एक और रूप लेती है। मुख्यमंत्री ने प्रोजेक्ट अलंकार का उल्लेख करते हुए कहा कि 2,300 से अधिक विद्यालयों के नए भवन बनाए गए हैं और प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों, कक्षाओं, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी तथा अटल टिंकरिंग लैब जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। उनके अनुसार परीक्षा व्यवस्था में भी परिवर्तन किया गया है और हाईस्कूल तथा इंटरमीडिएट की परीक्षाएं करीब 15 दिनों में कराने तथा लगभग 15 दिन में परिणाम घोषित करने की दिशा में व्यवस्था विकसित की गई है।
यहां शिक्षा की कहानी रोजगार से जुड़ जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक करीब 10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराई जा चुकी है और अगले छह माह में लगभग एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने युवाओं से परीक्षाओं की तैयारी में निरंतर परिश्रम करने का आह्वान किया। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विद्यार्थी भौतिक अथवा वर्चुअल माध्यम से आईआईटी, जेईई और नीट जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर सकते हैं।
और फिर बात केवल रोजगार तक सीमित नहीं रही। बेटियों की शिक्षा को लेकर मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना का उल्लेख किया, जिसके तहत जन्म से स्नातक स्तर तक विभिन्न चरणों में आर्थिक सहायता दिए जाने की बात कही गई। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत सहायता राशि एक लाख रुपये किए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्नातक अंतिम वर्ष की लगभग 50 हजार मेधावी छात्राओं को अगले महीने स्कूटी उपलब्ध कराने की योजना है। इस घोषणा ने छात्रवृत्ति कार्यक्रम को केवल फीस और पुस्तकों की सहायता से आगे बढ़ाकर शिक्षा, प्रोत्साहन और अवसर के व्यापक विमर्श से जोड़ दिया।
तकनीक भी इस पूरी संरचना का एक महत्वपूर्ण आधार बनती दिखाई गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग दो करोड़ युवाओं को टैबलेट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है और लगभग 60 लाख युवाओं को टैबलेट दिए जा चुके हैं। समाज कल्याण मंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण ने भी छात्रवृत्ति से संबंधित एंड्रॉयड ऐप शीघ्र शुरू किए जाने की जानकारी दी, जिससे विद्यार्थियों को आवेदन संबंधी काम के लिए साइबर कैफे पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। यानी अब चुनौती केवल राशि भेजने की नहीं, बल्कि विद्यार्थी तक पूरी व्यवस्था को तकनीकी रूप से सुलभ बनाने की भी है।
कार्यक्रम में पंचायतीराज एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में अल्पसंख्यक समुदाय के 39 लाख से अधिक विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी गई है। उन्होंने बताया कि 2026-27 के प्रथम चरण में कक्षा नौ से 12 तक के 38,901 विद्यार्थियों को 12.206 करोड़ रुपये की राशि से लाभान्वित किया जा रहा है। पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार नरेंद्र कुमार कश्यप ने बताया कि पहले चरण में उनके विभाग के 2,23,615 विद्यार्थी शामिल हैं और 2025-26 में 36.75 लाख से अधिक ओबीसी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दिए जाने की जानकारी दी।
अब सवाल फिर उसी विद्यार्थी पर लौटता है, जिसके खाते में राशि पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से छात्रवृत्ति की राशि का उपयोग अपनी शिक्षा को बेहतर बनाने में करने की अपील की। उन्होंने अच्छी पाठ्य-पुस्तकें और संदर्भ पुस्तकें खरीदने, पुस्तकालय में अध्ययन करने तथा अपना बुक बैंक विकसित करने की सलाह दी। उनका कहना था कि जब भी धनराशि उपलब्ध हो, पहला निवेश अच्छी पुस्तक पर होना चाहिए। ज्ञानवर्धक पुस्तक, किसी महापुरुष की आत्मकथा अथवा उपयोगी धार्मिक पुस्तक को उन्होंने विद्यार्थी और आने वाली पीढ़ी के लिए धरोहर बताया।
इसी बिंदु पर छात्रवृत्ति की पूरी कथा एक नई दिशा लेती है। बैंक खाते में पहुंची धनराशि तत्काल खर्च हो जाने वाली सहायता मात्र न बने, बल्कि विद्यार्थी की बौद्धिक पूंजी में परिवर्तित हो—मुख्यमंत्री के संबोधन में इस विचार पर विशेष जोर रहा। उन्होंने विद्यार्थियों को वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि आज 15 से 18 वर्ष की आयु के विद्यार्थी आने वाले वर्षों में देश के कार्यशील वर्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे। इसलिए वर्तमान में मिलने वाली सुविधा को भविष्य की तैयारी में बदलना ही इस सहायता का वास्तविक उद्देश्य बताया गया।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि देश से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता और परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है। सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का लाभ उठाकर अपने जीवन को आगे बढ़ाना विद्यार्थियों की जिम्मेदारी है। इसी क्रम में उन्होंने संबंधित विभागों को फिर निर्देश दिया कि पात्रता रखने वाले प्रत्येक विद्यार्थी की छात्रवृत्ति समय से उसके बैंक खाते में पहुंचे और कोई पात्र विद्यार्थी छूटने न पाए।
इस पूरी व्यवस्था की अगली कड़ी अब आवेदन और सत्यापन की प्रक्रिया है। जिन विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति अभी नहीं आई है अथवा जो आवेदन की प्रतीक्षा में हैं, उन्हें शीघ्र आवेदन करने के लिए कहा गया है। विभागों से फीडिंग और अन्य प्रक्रियाएं तेजी से पूरी करने को कहा गया है, ताकि पात्र विद्यार्थियों के खातों में राशि लगातार पहुंचती रहे। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए धनराशि की कमी को बाधा नहीं बनने दिया जाएगा; वास्तविक कसौटी यह होगी कि पात्र विद्यार्थी समय से आवेदन करे और स्वीकृत सहायता बिना अनावश्यक विलंब के उसके खाते तक पहुंचे।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों के जीवन-संघर्ष का उल्लेख कर विद्यार्थियों के सामने यह संदेश भी रखा कि सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां किसी व्यक्ति की अंतिम सीमा निर्धारित नहीं करतीं। पंचायतीराज एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओम प्रकाश राजभर, समाज कल्याण राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण, समाज कल्याण राज्यमंत्री संजीव गोंड, अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी और पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार नरेंद्र कुमार कश्यप के सार्वजनिक जीवन के उदाहरण देते हुए उन्होंने निरंतर परिश्रम और प्रयास को आगे बढ़ने का आधार बताया।
और अंततः छात्रवृत्ति की यह कहानी 148 करोड़ रुपये पर समाप्त नहीं होती। 4.60 लाख खातों में पहुंची यह राशि 2026-27 के उस व्यापक लक्ष्य की शुरुआत है, जिसमें सरकार 70 लाख विद्यार्थियों तक सहायता पहुंचाने की बात कर रही है। पिछले वर्ष 69 लाख विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दिए जाने के दावे से आगे बढ़ते हुए इस बार लक्ष्य एक और पायदान ऊपर रखा गया है। अब इस व्यवस्था की असली परिणति इसी में निहित होगी कि आवेदन करने वाला प्रत्येक पात्र विद्यार्थी समय पर सहायता पाए और वह सहायता फीस, पुस्तक, तकनीक और अध्ययन की आवश्यकताओं में परिवर्तित होकर उसके शैक्षणिक भविष्य को मजबूत करे।
लोक भवन से शुरू हुई इस छात्रवृत्ति प्रक्रिया का संदेश इसलिए केवल इतना नहीं है कि हजारों खातों में धनराशि पहुंची; संदेश यह भी है कि शिक्षा की राह में आर्थिक अड़चन को कम करने के लिए वित्तीय सहायता, डिजिटल भुगतान, विद्यालयी आधारभूत संरचना, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी, रोजगार और छात्राओं के लिए विशेष योजनाओं को एक ही व्यापक परिप्रेक्ष्य में रखा जा रहा है। अब अगला अध्याय उन लाखों विद्यार्थियों के आवेदन, सत्यापन और खातों तक पहुंचने वाली राशि से लिखा जाना है, जिन्हें इस वर्ष की छात्रवृत्ति का इंतजार है।