छात्रवृत्ति वितरण के पहले चरण की शुरुआत, 70 लाख विद्यार्थियों तक लाभ पहुंचाने का लक्ष्य; योगी बोले—पात्र छात्र लाभ से वंचित न रहे

दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत 4.60 लाख से अधिक विद्यार्थियों के बैंक खातों में ₹148 करोड़ से अधिक की राशि सीधे भेजी गई है। लखनऊ के लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2026-27 के वितरण के पहले चरण की शुरुआत की। राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से कक्षा 9-10 और दशमोत्तर कक्षाओं के विद्यार्थियों तक पहुंचाई गई। मुख्यमंत्री ने इसी के साथ छात्रवृत्ति का दायरा बढ़ाकर 70 लाख विद्यार्थियों तक ले जाने का लक्ष्य भी रखा।

सरकार के अनुसार छात्रवृत्ति वितरण को अधिक समयबद्ध और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक कठिनाई के कारण किसी पात्र विद्यार्थी की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए और जिन विद्यार्थियों को अभी तक लाभ नहीं मिला है, उन्हें आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि पिछले वर्ष विभिन्न कारणों से छात्रवृत्ति से वंचित रह गए विद्यार्थियों के मामलों को चिह्नित कर पोर्टल के माध्यम से समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। पिछले वर्ष 69 लाख विद्यार्थियों को करीब ₹6,200 करोड़ की छात्रवृत्ति दिए जाने का दावा भी कार्यक्रम में किया गया।

छात्रवृत्ति की रकम को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रखते हुए मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से इसे पढ़ाई की जरूरतों—पाठ्यपुस्तकों, संदर्भ पुस्तकों और अध्ययन सामग्री—पर खर्च करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में प्रदेश के शिक्षा तंत्र में किए जा रहे बदलावों का भी उल्लेख हुआ, जिनमें सरकारी विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, आवासीय विद्यालय, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, स्मार्ट कक्षाएं और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग जैसी योजनाएं शामिल हैं। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि युवाओं को टैबलेट उपलब्ध कराने की योजना के तहत दो करोड़ तक पहुंच बनाने का लक्ष्य है और अब तक करीब 60 लाख युवाओं को टैबलेट दिए जा चुके हैं।

शिक्षा और छात्र कल्याण से जुड़ी योजनाओं के विस्तार के क्रम में मुख्यमंत्री ने 50 हजार मेधावी छात्राओं को अगले महीने स्कूटी देने की घोषणा भी दोहराई। लोक भवन के कार्यक्रम में 11 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। सरकार का घोषित लक्ष्य अब केवल छात्रवृत्ति की राशि पहुंचाना नहीं, बल्कि पात्रता, आवेदन और भुगतान की प्रक्रिया को इस तरह आगे बढ़ाना है कि आर्थिक कारण किसी विद्यार्थी की शिक्षा के रास्ते में स्थायी बाधा न बनें।
