दैनिक इंडिया न्यूज़ नई दिल्ली। भारतीय सांस्कृतिक अस्मिता, वैदिक ज्ञानपरम्परा एवं राष्ट्रभाषिक चेतना के पुनर्जागरण हेतु समर्पित संगठन Sanskrit Bharati द्वारा दिल्ली प्रान्त की द्विदिवसीय समीक्षा-योजना गोष्ठी का भव्य एवं सारगर्भित आयोजन 9 एवं 10 मई को संस्कृत भारती के केन्द्रीय कार्यालय में सम्पन्न हुआ। यह गोष्ठी केवल संगठनात्मक समीक्षा का औपचारिक उपक्रम नहीं, अपितु संस्कृत संवर्धन के भावी राष्ट्रीय अभियान की वैचारिक अधिष्ठान-सभा सिद्ध हुई।

गोष्ठी के उद्घाटन सत्र में संगठन के अखिल भारतीय महामन्त्री श्रीमान् सत्यनारायण भट्ट जी, दिल्ली प्रान्त अध्यक्ष डॉ. वागीश भट्ट जी तथा प्रान्त मन्त्री प्रो. रणजित् बेहेरा जी की गरिमामयी उपस्थिति ने सम्पूर्ण वातावरण को वैचारिक ऊष्मा एवं सांस्कृतिक तेजस्विता से आलोकित कर दिया। वक्ताओं ने संस्कृत को केवल भाषा न मानते हुए उसे भारतीय ज्ञान-विज्ञान, अध्यात्म, संस्कृति एवं राष्ट्रीय आत्मबोध का प्राणतत्त्व निरूपित किया। उन्होंने आह्वान किया कि संस्कृत के पुनरुत्थान हेतु संगठनात्मक सक्रियता, सामाजिक सहभागिता एवं जनमानस के मध्य सतत् संस्कृत-संवाद को व्यापक स्वरूप प्रदान करना समय की अनिवार्य आवश्यकता है।
द्विदिवसीय मंथन-सत्रों में गत वर्ष के दौरान संचालित विविध प्रकल्पों, शैक्षिक अभियानों, संवाद-शिविरों, जनजागरण कार्यक्रमों तथा संगठन विस्तार योजनाओं की अत्यन्त सूक्ष्म एवं तथ्यपरक समीक्षा की गई। बैठक का संचालन कुल नौ विशद सत्रों में सम्पन्न हुआ, जिसमें प्रान्त समिति, आठों विभागों के विभाग संयोजकों तथा विभिन्न जिला इकाइयों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने कार्यक्षेत्रों की उपलब्धियों, चुनौतियों एवं भावी रणनीतियों का विस्तारपूर्वक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

गोष्ठी के दौरान संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण, नवयुवकों की सहभागिता, डिजिटल माध्यमों से संस्कृत प्रचार, ग्राम-स्तरीय संस्कृत जागरण, विद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में संस्कृत-परक गतिविधियों के विस्तार तथा समाज के विविध वर्गों को संस्कृत से जोड़ने हेतु बहुआयामी योजनाओं पर गंभीर विमर्श हुआ। कार्यकर्ताओं ने संस्कृत को पुनः व्यवहार की भाषा एवं जनजीवन की अभिव्यक्ति बनाने के संकल्प को दृढ़ता के साथ अभिव्यक्त किया।
समापन सत्र में संस्कृत भारती के अखिल भारतीय संगठन मन्त्री श्रीमान् जयप्रकाश गौतम जी एवं प्रान्त मन्त्री प्रो. रणजित् बेहेरा जी ने कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करते हुए संस्कृत प्रचार-प्रसार को राष्ट्रनिर्माण का सांस्कृतिक अभियान बताया। संगठन मन्त्री जी ने कहा कि संस्कृत केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की वैचारिक अधिष्ठात्री शक्ति है। उन्होंने कार्यकर्ताओं का आवाहन किया कि वे समाज के प्रत्येक वर्ग तक संस्कृत की सरलता, वैज्ञानिकता एवं जीवनोपयोगिता को पहुँचाने हेतु समर्पित भाव से कार्य करें।
सम्पूर्ण गोष्ठी वैचारिक प्रखरता, संगठनात्मक अनुशासन एवं सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण सिद्ध हुई। यह आयोजन न केवल आगामी वर्ष की कार्ययोजना निर्धारण की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण रहा, बल्कि संस्कृत जागरण के राष्ट्रीय अभियान को नवीन ऊर्जा, वैचारिक स्पष्टता एवं दूरदर्शी दिशा प्रदान करने वाला ऐतिहासिक आयोजन भी बन गया।