कुशीनगर को शिक्षा, कृषि और निवेश का नया हब बनाने की तैयारी

निर्माण में देरी बर्दाश्त नहीं, जरूरत पड़ी तो अस्थायी भवन से शुरू होगा शैक्षणिक सत्र
दैनिक इंडिया न्यूज़, कुशीनगर। पूर्वांचल की विकास यात्रा को नई रफ्तार देने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कुशीनगर में निर्माणाधीन महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों की प्रगति का बारीकी से जायजा लिया और कार्यदायी संस्था को स्पष्ट निर्देश दिए कि गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता किए बिना निर्धारित समय सीमा में विश्वविद्यालय का निर्माण पूरा किया जाए। मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे पूर्वांचल के भविष्य को लेकर सरकार की गंभीरता भी स्पष्ट दिखाई दी।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने जिस महत्वाकांक्षी परियोजना का उल्लेख किया, उसने उपस्थित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। लगभग 450 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के कृषि परिदृश्य को बदलने वाला एक बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां आधुनिक कृषि शिक्षा, उन्नत अनुसंधान और तकनीकी नवाचारों के माध्यम से किसानों को नई दिशा मिलेगी, जिससे खेती को अधिक लाभकारी और वैज्ञानिक बनाया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज कृषि केवल परंपरागत खेती तक सीमित नहीं रह गई है। बदलते समय में तकनीक आधारित खेती ही किसानों की समृद्धि का आधार बनेगी। महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने, उत्पादन लागत कम करने और फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय में गुणात्मक वृद्धि सुनिश्चित करना भी है।
युवाओं के भविष्य को लेकर मुख्यमंत्री विशेष रूप से चिंतित दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के संचालन से क्षेत्र के हजारों विद्यार्थियों को कृषि और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता की शिक्षा अपने ही क्षेत्र में उपलब्ध होगी। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि कृषि आधारित उद्योगों और उद्यमिता को भी नया प्रोत्साहन मिलेगा। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि यदि निर्माण कार्य की औपचारिकताओं के कारण आवश्यकता हुई तो शैक्षणिक सत्र को समय पर शुरू करने के लिए अस्थायी भवन अथवा वैकल्पिक व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि विद्यार्थियों का भविष्य किसी भी स्थिति में प्रभावित न हो।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता इस विश्वविद्यालय को जल्द से जल्द संचालित करना है। इसके लिए सरकार हर स्तर पर आवश्यक संसाधन और सहयोग उपलब्ध करा रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी और प्रत्येक चरण की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने कुशीनगर की बदलती तस्वीर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब यह जनपद इंसेफेलाइटिस जैसी गंभीर बीमारी और अपराध की घटनाओं के कारण चर्चा में रहता था, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। सरकार के सतत प्रयासों से बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है, जबकि कानून-व्यवस्था में सुधार के कारण अपराध और माफियाओं पर कड़ा अंकुश लगाया गया है। यही कारण है कि आज कुशीनगर विकास और निवेश के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहा है।
उन्होंने कहा कि कुशीनगर में मेडिकल कॉलेज की स्थापना, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का संचालन और आधुनिक सड़क नेटवर्क का विस्तार इस परिवर्तन की मजबूत नींव हैं। गोरखपुर-सिलीगुड़ी कॉरिडोर जैसी बड़ी परियोजनाएं क्षेत्र को राष्ट्रीय आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का कार्य करेंगी। वहीं देवरिया-कसया फोर-लेन मार्ग को स्वीकृति मिलने और नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर की कार्ययोजना पर तेजी से काम होने से क्षेत्रीय संपर्क और अधिक सुदृढ़ होगा।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि बेहतर सड़क संपर्क, एयर कनेक्टिविटी, मेडिकल कॉलेज और कृषि विश्वविद्यालय जैसी परियोजनाएं आने वाले वर्षों में कुशीनगर को शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन और निवेश का प्रमुख केंद्र बना देंगी। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के व्यापक अवसर मिलेंगे, आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय केवल एक भवन नहीं, बल्कि पूर्वांचल के किसानों के सपनों का केंद्र होगा। यह संस्थान कृषि क्षेत्र में नवाचार, अनुसंधान और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिखेगा तथा आने वाले वर्षों में किसानों के जीवन में मील का पत्थर साबित होगा।
इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, जनप्रतिनिधिगण तथा शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।