दैनिक इंडिया न्यूज़, मधुबन (मऊ)।श्रावण मास के प्रथम सोमवार को नगर पंचायत मधुबन स्थित प्राचीन शिवपुर पांती महादेव मंदिर सहित क्षेत्र के प्रमुख शिवालयों में आस्था, श्रद्धा और सनातन संस्कृति का अनुपम संगम देखने को मिला। ब्रह्ममुहूर्त से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मंदिरों के बाहर लग गईं। शिवभक्तों ने "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के गगनभेदी उद्घोष के बीच भगवान भोलेनाथ का गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, भांग, पुष्प एवं दुग्ध से विधि-विधानपूर्वक जलाभिषेक एवं रुद्राभिषेक कर लोकमंगल एवं विश्वकल्याण की कामना की।

स्कंद पुराण में भगवान शिव की उपासना का महात्म्य बताते हुए कहा गया है कि श्रावण मास में श्रद्धापूर्वक किया गया शिवाभिषेक मनुष्य के समस्त पापों का क्षय कर उसे अक्षय पुण्य, सुख, समृद्धि और मोक्ष का अधिकारी बनाता है। मान्यता है कि इस मास में भगवान शिव स्वयं अपने भक्तों पर विशेष कृपा-दृष्टि रखते हैं, इसलिए श्रावण के प्रत्येक सोमवार का धार्मिक महत्व अत्यंत विलक्षण माना गया है।
क्षेत्र के भेलउर शिव मंदिर, सूरजपुरा, दुबारी, बेलौली, जजौली, सुग्गीचौरी सहित अन्य प्रमुख शिवालयों में दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंदिर परिसर "ॐ नमः शिवाय" के मंत्रोच्चार, वैदिक ऋचाओं एवं घंटा-घड़ियालों की मधुर ध्वनि से गुंजायमान रहा, जिससे संपूर्ण वातावरण शिवमय एवं भक्तिरस से सराबोर हो उठा।
श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क एवं मुस्तैद रहा। थानाध्यक्ष कृष्ण कुमार गुप्ता अपने पुलिस बल के साथ पूरे समय सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाले रहे। पुलिसकर्मियों ने दर्शन एवं जलाभिषेक के लिए सुव्यवस्थित कतारबद्ध व्यवस्था सुनिश्चित की, जिसके परिणामस्वरूप पूरे दिन कहीं भी किसी प्रकार की अव्यवस्था या अप्रिय स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। मंदिर प्रबंधन समितियों एवं स्वयंसेवकों ने भी श्रद्धालुओं को निर्बाध दर्शन कराने में उल्लेखनीय सहयोग प्रदान किया।
श्रावण मास के प्रथम सोमवार पर उमड़ा यह जनसैलाब केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय सनातन संस्कृति की उस शाश्वत चेतना का जीवंत प्रमाण भी है, जो युगों से समाज को आध्यात्मिक ऊर्जा, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक एकता के सूत्र में बांधे हुए है। श्रद्धा, अनुशासन और भक्तिभाव से ओतप्रोत यह दिव्य आयोजन पूरे मधुबन क्षेत्र के लिए अविस्मरणीय बन गया।