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चिलुआताल बनेगा पूर्वांचल का नया ईको-टूरिज्म केंद्र: मुख्यमंत्री योगी ने 20.35 करोड़ की परियोजनाओं का किया लोकार्पण

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Dainik India News

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चिलुआताल बनेगा पूर्वांचल का नया ईको-टूरिज्म केंद्र: मुख्यमंत्री योगी ने 20.35 करोड़ की परियोजनाओं का किया लोकार्पण

"डबल इंजन सरकार तालाबों पर कब्जा नहीं, उनका संरक्षण करती है"

दैनिक इंडिया न्यूज़,गोरखपुर।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने मंगलवार को गोरखपुर को एक और महत्वपूर्ण विकासात्मक सौगात प्रदान करते हुए 20.35 करोड़ रुपये की लागत से विकसित चिलुआताल पर्यटन एवं सौंदर्यीकरण परियोजना के प्रथम चरण का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने निर्माणाधीन भजन-संध्या स्थल, नवविकसित घाटों तथा विविध विकास कार्यों का निरीक्षण किया, प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया तथा वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने झील की परिधि में व्यापक एवं सघन वृक्षारोपण अभियान चलाने के निर्देश देते हुए कहा कि प्राकृतिक जलाशयों का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा नैतिक दायित्व भी है।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि चिलुआताल का विकास गोरखपुर की पर्यटन क्षमता को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाने वाला ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि अब तक रामगढ़ताल ही शहर का प्रमुख ईको-टूरिज्म केंद्र था, किंतु चिलुआताल के रूप में गोरखपुरवासियों तथा यहां आने वाले पर्यटकों को एक नवीन, स्वच्छ एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थल प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रामगढ़ताल का जल प्राकृतिक होने के बावजूद वर्षों तक शहर के ड्रेनेज का भार झेलता रहा। सरकार ने उसके पुनरुद्धार, गाद निकासी और जल शोधन की व्यापक व्यवस्था की, किंतु चिलुआताल का जल पूर्णतः प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त होता है, जो इसे विशेष बनाता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में इस जलाशय के पुनर्जीवन का अभियान प्रारंभ किया गया था। व्यापक डिसिल्टिंग एवं संरक्षण कार्यों के पश्चात आज इसका प्रथम चरण पूर्ण होकर जनसामान्य को समर्पित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि अतीत में तालाबों एवं पोखरों पर अवैध कब्जे होते रहे, जिससे वे अराजकता, अपराध और गंदगी के केंद्र बन गए थे। किंतु वर्तमान सरकार प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन एवं पुनर्जीवन को विकास की मूल अवधारणा का अभिन्न अंग मानती है। यही कारण है कि जलाशयों को पर्यटन, रोजगार और सांस्कृतिक गतिविधियों के उत्कृष्ट केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि रामगढ़ताल में आयोजित राष्ट्रीय जूनियर रोइंग प्रतियोगिता ने सिद्ध कर दिया है कि गोरखपुर जलक्रीड़ाओं का प्रमुख केंद्र बनने की क्षमता रखता है। 22 राज्यों के 243 से अधिक खिलाड़ियों की सहभागिता वाली इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया। अब चिलुआताल में भी वॉटर स्पोर्ट्स की अपार संभावनाओं को साकार किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन केवल आधारभूत संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति देता है। चिलुआताल क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने से रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। स्थानीय स्तर पर दुकानें, सेवाएं और व्यावसायिक गतिविधियां विकसित हो रही हैं, जिससे क्षेत्र की आर्थिक उन्नति को नई दिशा मिली है।

उन्होंने कहा कि जलाशयों एवं हरित क्षेत्रों के कारण यहां का तापमान शहर के अन्य भागों की तुलना में कम रहता है। यह क्षेत्र प्राकृतिक वातानुकूलन का उत्कृष्ट उदाहरण बन रहा है। ऐसे प्रयास केवल शहरों को स्मार्ट नहीं बनाते, बल्कि उन्हें सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल और सतत विकास के आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय बंद पड़ा गोरखपुर उर्वरक कारखाना आज पुनः संचालित हो रहा है। इसी परिसर में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), सैनिक स्कूल तथा केंद्रीय विद्यालय जैसी महत्वपूर्ण संस्थाएं संचालित हो रही हैं। केंद्रीय विद्यालय के नवीन भवन हेतु भी राज्य सरकार द्वारा वित्तीय स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। यह परिवर्तन विकास के व्यापक दृष्टिकोण का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

उन्होंने घोषणा की कि चिलुआताल के विकास का यह केवल प्रथम चरण है। आगामी चरणों में इसे रामगढ़ताल की भांति अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त एक विश्वस्तरीय ईको-टूरिज्म एवं वॉटर स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त कोल इंडिया के सहयोग से यहां 20 मेगावाट क्षमता का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट स्थापित किया जा रहा है, जो स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना केवल ऊर्जा उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम करने तथा ‘नेट जीरो’ लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सौर ऊर्जा पर्यावरण के अनुकूल, अक्षय एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप ऊर्जा का सर्वश्रेष्ठ स्रोत है।

उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि सरकार विकास के लिए संसाधन उपलब्ध करा सकती है, किंतु उसकी सफलता जनसहभागिता पर निर्भर करती है। गोरखपुर को प्लास्टिक-मुक्त, स्वच्छ, हरित एवं सतत शहर बनाने में प्रत्येक नागरिक को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि यदि प्राकृतिक स्थलों को स्वच्छ रखा जाए, तो वे आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर सिद्ध होंगे।

मुख्यमंत्री ने आगामी 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस से 21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस तक चलने वाले विशेष अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के 12 वर्षों के सफल नेतृत्व को समर्पित इस अभियान के अंतर्गत ‘एक पेड़ माँ के नाम’ कार्यक्रम चलाया जाएगा। उन्होंने नागरिकों, स्वयंसेवी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं तथा जनप्रतिनिधियों से चिलुआताल एवं रामगढ़ताल के आसपास व्यापक वृक्षारोपण करने का आह्वान किया। साथ ही 21 जून को इन दोनों जलाशयों के तटों पर विशाल योग शिविर आयोजित करने की भी घोषणा की।

कार्यक्रम को सांसद तथा गोरखपुर के महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर अनेक जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

चिलुआताल का यह कायाकल्प केवल एक पर्यटन परियोजना नहीं, बल्कि गोरखपुर के पर्यावरणीय पुनर्जागरण, हरित विकास और सतत भविष्य की आधारशिला के रूप में देखा जा रहा है।

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