शिवम विजय साहू के विजन में बहु-क्षेत्रीय कारोबार को संस्थागत विस्तार देने की तैयारी; हॉस्पिटैलिटी, FMCG, ऑटोमोबाइल, रिटेल और रियल एस्टेट के बाद उभरते शहरों में आक्रामक विस्तार की रणनीति
दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।कारोबार जब एक क्षेत्र की सीमा से निकलकर कई उद्योगों में फैलता है, तो उसकी अगली चुनौती केवल विस्तार नहीं, बल्कि उस विस्तार को एक सुसंगत वित्तीय और संस्थागत ढांचे में बदलना होती है। साहू ग्रुप के सामने इस समय यही अगला कारोबारी अध्याय है। 11 मई 2004 को जेमिनी कॉन्टिनेंटल होटल, लखनऊ में मैनेजर-फाइनेंस के रूप में अपनी पेशेवर यात्रा शुरू करने वाले रोहित कुमार बाजपेयी अब 22 वर्षों की वित्तीय विशेषज्ञता के बाद साहू ग्रुप के ग्रुप चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (GCFO) की भूमिका में हैं। 22 सितंबर 2026 को मिली यह जिम्मेदारी ऐसे समय आई है, जब समूह का कारोबार हॉस्पिटैलिटी से आगे बढ़कर FMCG, बेकरी, ऑटोमोबाइल, रिटेल और रियल एस्टेट जैसे विविध क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति बना चुका है।
इस नियुक्ति को केवल एक वरिष्ठ वित्तीय पद पर बदलाव के रूप में देखना समूह की मौजूदा कारोबारी दिशा को सीमित करके देखना होगा। GCFO की भूमिका अब उस वित्तीय वास्तुशिल्प को आकार देने की है, जिसके भीतर अलग-अलग कारोबार, नए निवेश, विस्तार योजनाएं और पूंजीगत प्राथमिकताएं एक साझा रणनीतिक ढांचे में संचालित हो सकें। दूसरे शब्दों में, साहू ग्रुप के लिए वित्तीय प्रबंधन अब बैलेंस शीट की निगरानी से आगे बढ़कर growth architecture का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है।
इस रणनीति के केंद्र में समूह के मालिक शिवम विजय साहू की विस्तारवादी कारोबारी दृष्टि है। समूह की दिशा पारंपरिक व्यवसायों को केवल बड़ा करने के बजाय नए उपभोक्ता बाजारों, नए भौगोलिक क्षेत्रों और बदलती बाजार-जरूरतों को समानांतर रूप से साधने की है। रोहित कुमार बाजपेयी के अनुसार, शिवम विजय साहू की सकारात्मक सोच और भविष्य को केंद्र में रखकर निर्णय लेने की शैली कारोबार को नए अवसरों के साथ जोड़ती है। यही सोच अब समूह के विविध कारोबारों को एक अधिक संगठित और स्केलेबल बिजनेस मॉडल में ढालने की पृष्ठभूमि तैयार कर रही है।

हॉस्पिटैलिटी में समूह की मौजूदगी इस कारोबारी विस्तार की आधारभूत कड़ी है। लखनऊ में Renaissance, Fairfield by Marriott और Gemini Continental जैसे होटल ब्रांडों के माध्यम से समूह ने अलग-अलग ग्राहक वर्गों को लक्षित करते हुए अपना पोर्टफोलियो विकसित किया है। लगभग 400 कमरों की संयुक्त क्षमता वाला यह नेटवर्क बताता है कि समूह ने हॉस्पिटैलिटी को केवल एक पारंपरिक व्यवसाय के रूप में नहीं, बल्कि दीर्घकालिक ब्रांड और एसेट-बेस्ड कारोबार के रूप में विकसित किया है।

इसके बाद FMCG और बेकरी कारोबार में प्रवेश ने समूह की रणनीति को उपभोक्ता बाजार से जोड़ा। Dayspring Bakers और Test Cream Bakers के माध्यम से आधुनिक उत्पादन व्यवस्था, ब्रेड एवं बन जैसे उत्पादों की आपूर्ति और कई शहरों तक वितरण नेटवर्क इस कारोबार के विस्तार की क्षमता को रेखांकित करते हैं। लखनऊ से आगे कानपुर, इटावा, नोएडा और अलीगढ़ तक पहुंच बना चुका यह नेटवर्क अब वाराणसी, गोरखपुर और अन्य बाजारों की ओर विस्तार की संभावनाओं को देख रहा है।
ऑटोमोबाइल कारोबार में Sunny Motors के माध्यम से Toyota से जुड़े वाहन कारोबार तथा बिक्री-सर्विस नेटवर्क और Sahu Suzuki के जरिए दोपहिया वाहन क्षेत्र में मौजूदगी समूह के diversified business model को और व्यापक बनाती है। रिटेल में Sahu Agencies के जरिए कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, Sony और LG के एक्सक्लूसिव शोरूम तथा Apple उत्पादों के वितरण से समूह ने उपभोक्ता-केंद्रित कारोबार का एक अलग आधार तैयार किया है।
रियल एस्टेट में Sahu Land Developers की रणनीति भी इसी बदलाव का संकेत देती है। प्लॉटिंग से आगे बढ़कर अपार्टमेंट परियोजनाओं पर जोर समूह के रियल एस्टेट कारोबार को अधिक संरचित और दीर्घकालिक परियोजना मॉडल की ओर ले जा रहा है। सुल्तानपुर रोड पर प्रस्तावित लक्जरी आवासीय परियोजनाएं इसी कारोबारी परिवर्तन का हिस्सा हैं।
लेकिन साहू ग्रुप की अगली बड़ी कहानी मौजूदा कारोबारों के विस्तार से कहीं आगे जाती है। उत्तर प्रदेश के उभरते शहरों में लगभग 100 कैफे विकसित करने की प्रस्तावित योजना समूह की market expansion strategy का नया चेहरा है। आगरा, वाराणसी, गोरखपुर, गाजियाबाद और अन्य उभरते बाजारों पर संभावित फोकस इस बात का संकेत देता है कि समूह अब केवल बड़े महानगरों के स्थापित उपभोक्ता बाजारों पर निर्भर रहने के बजाय उन शहरों में भी संगठित ब्रांडेड कारोबार की संभावनाएं तलाश रहा है, जहां उपभोग क्षमता और शहरी अर्थव्यवस्था तेजी से विकसित हो रही है।
यहीं रोहित कुमार की नई भूमिका रणनीतिक महत्व हासिल करती है। इतने विविध क्षेत्रों में विस्तार के साथ वित्तीय नेतृत्व को पूंजी आवंटन, लागत संरचना, निवेश अनुशासन, परियोजना व्यवहार्यता, जोखिम प्रबंधन और दीर्घकालिक cash-flow planning के बीच संतुलन स्थापित करना होगा। किसी एक क्षेत्र के कारोबार की वित्तीय सफलता और पूरे समूह की consolidated growth strategy के बीच तालमेल बनाना अब GCFO की भूमिका का केंद्रीय हिस्सा होगा।
साहू ग्रुप की मौजूदा दिशा को यदि एक वाक्य में परिभाषित किया जाए तो यह diversification से institutionalisation और institutionalisation से scalable growth की ओर बढ़ने की प्रक्रिया है। शिवम विजय साहू का कारोबारी विजन नए क्षेत्रों और बाजारों के द्वार खोल रहा है, जबकि रोहित कुमार बाजपेयी की वित्तीय जिम्मेदारी उन अवसरों को पूंजीगत अनुशासन और संस्थागत ढांचे के भीतर गति देने की चुनौती के साथ सामने आई है।
22 वर्षों की वित्तीय यात्रा के बाद रोहित कुमार बाजपेयी का GCFO के रूप में प्रवेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि साहू ग्रुप के अगले चरण की कहानी अब केवल यह नहीं होगी कि समूह कितने क्षेत्रों में कारोबार करता है, बल्कि यह होगी कि उन सभी कारोबारों को एकीकृत वित्तीय रणनीति, स्पष्ट पूंजी प्राथमिकताओं और विस्तार की नियंत्रित गति के साथ कितनी प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जाता है। यही बदलाव साहू ग्रुप की अगली कॉर्पोरेट पहचान को आकार देने वाला निर्णायक तत्व बन सकता है।