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जिस उत्तर प्रदेश पर कभी तंज कसा जाता था, वही आज विकास की नई पटकथा लिख रहा : ब्रजेश पाठक

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जिस उत्तर प्रदेश पर कभी तंज कसा जाता था, वही आज विकास की नई पटकथा लिख रहा : ब्रजेश पाठक

प्लास्टिक उद्योग की विशाल संगोष्ठी में बृजेश पाठक ने सुनाई 2017 से अब तक के बदलाव की कहानी—बिजली, सड़क और कानून-व्यवस्था से लेकर मेडिकल कॉलेज, एक्सप्रेसवे, उद्योग और निवेश तक बदली प्रदेश की तस्वीर

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दैनिक इंडिया न्यूज़,13 अगस्त 2026 लखनऊ।जिस उत्तर प्रदेश के नाम के साथ कभी विकास की संभावनाओं से अधिक अव्यवस्था की चर्चाएं जुड़ी रहती थीं, आज उसी प्रदेश की चर्चा एक्सप्रेसवे की निर्बाध गति, चिकित्सा शिक्षा के विस्तार, औद्योगिक निवेश, हवाई संपर्क और सुदृढ़ होती कानून-व्यवस्था के संदर्भ में हो रही है। लखनऊ में देश-विदेश से आए प्लास्टिक उद्योग जगत के प्रतिनिधियों की विशाल संगोष्ठी में उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक का संबोधन इसी परिवर्तन की कथा बन गया। उन्होंने अतीत की उस छवि को वर्तमान की उपलब्धियों के सामने रखकर सवाल किया—क्या आज भी वही उत्तर प्रदेश दिखाई देता है?

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इस प्रश्न का उत्तर केवल राजनीतिक वक्तव्य में नहीं, बल्कि उन परिवर्तनों में तलाशा जा सकता है जिनका प्रत्यक्ष प्रभाव प्रदेश के नागरिक जीवन पर पड़ रहा है। पाठक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि 2017 से पहले बिजली, सड़क, कानून-व्यवस्था और औद्योगिक वातावरण को लेकर प्रदेश की छवि पर प्रश्न उठते थे, लेकिन पिछले वर्षों में विकास की दिशा और गति दोनों बदली हैं। इस बदलाव की पहली और सबसे संवेदनशील तस्वीर स्वास्थ्य क्षेत्र में दिखाई देती है।

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राज्य सरकार के 2026-27 के बजट दस्तावेज के अनुसार उत्तर प्रदेश में अब 81 मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें 45 राज्य सरकार और 36 निजी क्षेत्र के संस्थान हैं। सरकार के अनुसार 60 जिलों तक मेडिकल कॉलेज की सुविधा पहुंच चुकी है और 16 असेवित जिलों में PPP मॉडल के माध्यम से विस्तार की योजना है। यह केवल संस्थानों की संख्या बढ़ने का आंकड़ा नहीं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा को प्रदेश के अधिकाधिक भूभाग तक पहुंचाने की दिशा में हुए विस्तार का संकेत है। लेकिन कहानी यहां समाप्त नहीं होती।

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चिकित्सा शिक्षा की वास्तविक शक्ति उसके मानव संसाधन में दिखाई देती है। वर्ष 2017 में सरकारी और निजी संस्थानों में MBBS सीटों की संख्या 4,540 थी, जो बढ़कर 12,800 हो गई है। इसी अवधि में PG चिकित्सा शिक्षा की सीटें 1,221 से बढ़कर 4,995 पहुंची हैं। अर्थात प्रदेश में चिकित्सा संस्थानों के साथ चिकित्सकीय विशेषज्ञता की आधारभूमि भी विस्तृत हुई है। इसका प्रभाव अस्पतालों से आगे बढ़कर दवा, चिकित्सा उपकरण, नर्सिंग, पैरामेडिकल सेवाओं और रोजगार के व्यापक तंत्र तक पहुंचता है—और यहीं स्वास्थ्य का विस्तार उद्योग की संभावनाओं से जुड़ जाता है।

अब दृष्टि सड़कों पर जाती है, लेकिन ये सड़कें केवल आवागमन के मार्ग नहीं रह गई हैं। पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गोरखपुर लिंक और गंगा एक्सप्रेसवे जैसे मार्ग उत्तर प्रदेश की आर्थिक धमनियों का स्वरूप ग्रहण कर रहे हैं। कभी जिन क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से अपेक्षाकृत दूर माना जाता था, वही क्षेत्र अब तीव्र संपर्क और औद्योगिक संभावनाओं से जुड़ रहे हैं। इस परिवर्तन का सबसे व्यापक उदाहरण 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे है।

मेरठ से प्रयागराज तक फैला छह लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड गंगा एक्सप्रेसवे यात्रा की दूरी और समय घटाने के साथ औद्योगिक तथा लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के लिए नई भूमि तैयार कर रहा है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे ने पूर्वी उत्तर प्रदेश को लखनऊ और पश्चिमी बाजारों से जोड़ने में दूरी की बाधा कम की है, वहीं बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे सड़क संपर्क को औद्योगिक संभावना से जोड़ रहा है। अब प्रश्न केवल यह नहीं कि कितने किलोमीटर सड़क बनी; वास्तविक प्रश्न यह है कि इन आर्थिक गलियारों के किनारे कितने उद्योग, कितने लॉजिस्टिक्स केंद्र और कितने रोजगार आकार लेते हैं।

यही प्रश्न प्लास्टिक उद्योग के संदर्भ में और महत्वपूर्ण हो जाता है। विनिर्माण क्षेत्र को कच्चे माल, ऊर्जा, परिवहन, पैकेजिंग, बाजार और कुशल श्रम—इन सभी की आवश्यकता होती है। जब विशाल उपभोक्ता बाजार के साथ एक्सप्रेसवे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का विस्तार होता है तो निवेश के लिए संभावनाओं का दायरा भी बढ़ता है। लेकिन उद्योग को सड़क से अधिक एक और चीज चाहिए—विश्वास। और निवेशक के विश्वास की पहली कसौटी कानून-व्यवस्था है।

राज्य सरकार के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2017 से 2025 के बीच गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए ₹14,246 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्तियों की जब्ती का दावा किया गया है। इसी अवधि में 79,984 अपराधियों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई और 28,085 वांछित अपराधियों को जेल भेजे जाने का सरकारी आंकड़ा प्रस्तुत किया गया है। Operation Conviction, CCTNS, साइबर अपराध इकाइयों और तकनीकी जांच के विस्तार ने पुलिसिंग तथा अभियोजन को आधुनिक बनाने की दिशा में प्रयासों को गति दी है। फिर भी इसकी अंतिम कसौटी यही होगी कि अपराध पर स्थायी अंकुश और पीड़ित को शीघ्र न्याय कितना सुनिश्चित हुआ।

कानून-व्यवस्था से आगे बढ़ते ही प्रदेश की आर्थिक भौगोलिकता का एक और आयाम सामने आता है—हवाई संपर्क। अयोध्या, कुशीनगर और जेवर जैसे हवाई केंद्र पर्यटन, व्यापार और निवेश को नई संभावनाएं दे रहे हैं। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास विकसित हो रहा औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स पारिस्थितिकी तंत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश को वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं से जोड़ने की क्षमता रखता है। सड़क और आकाश का यह समागम प्रदेश की आर्थिक पहुंच को नई दिशा दे रहा है।

परिवर्तन का अर्थ केवल बड़े उद्योग और महानगर नहीं है। One District One Product यानी ODOP ने जिलों के पारंपरिक उत्पादों को बाजार और ब्रांडिंग से जोड़ने की कोशिश की है। काशी के हस्तशिल्प, भदोही के कालीन और लखनऊ की चिकनकारी जैसे उत्पाद स्थानीय पहचान से आगे बढ़कर व्यापक बाजार की संभावनाओं से जोड़े जा रहे हैं। दिसंबर 2025 तक उपलब्ध सरकारी सामग्री में उत्तर प्रदेश के 81 GI-टैग प्राप्त उत्पादों का उल्लेख है। यानी विकास की धारा बड़े औद्योगिक गलियारों के साथ स्थानीय हुनर तक पहुंचाने का प्रयास भी कर रही है।

इसी आर्थिक पुनर्संरचना में रक्षा उत्पादन और ऊर्जा की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर प्रदेश को रक्षा विनिर्माण और उससे जुड़ी आपूर्ति शृंखला के संभावित केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। वहीं उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश की स्थापित सौर क्षमता 2017 के लगभग 288 मेगावाट से बढ़कर 2024 में लगभग 2,596 मेगावाट हो गई है। औद्योगिक विस्तार के साथ ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों का विस्तार भविष्य की आर्थिक आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करता है।

इन सभी कड़ियों को जोड़ने पर उत्तर प्रदेश की कहानी किसी एक परियोजना या सरकारी घोषणा की कहानी नहीं रह जाती। एक्सप्रेसवे बाजार तक पहुंच का मार्ग बनता है, एयरपोर्ट वैश्विक संपर्क का द्वार खोलता है, मेडिकल कॉलेज मानव संसाधन को सुदृढ़ करते हैं, ODOP स्थानीय कौशल को बाजार देता है और कानून-व्यवस्था निवेश के भरोसे की भूमि तैयार करने का प्रयास करती है। यही परस्पर संबद्ध संरचना प्रदेश की बदलती आर्थिक तस्वीर का वास्तविक आधार बनती है।

फिर भी किसी विकास यात्रा का मूल्यांकन केवल परियोजनाओं की संख्या या सरकारी दावों से नहीं हो सकता। रोजगार, प्रति व्यक्ति आय, शिक्षा की गुणवत्ता, स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक उपलब्धता, अपराध के स्वतंत्र आंकड़े और आम नागरिक के जीवन में आया परिवर्तन ही दीर्घकाल में इसकी सफलता का निर्णायक प्रमाण होंगे। इसलिए उत्तर प्रदेश के सामने अब चुनौती निर्माण से आगे की है—इन निर्मित संभावनाओं को स्थायी आर्थिक समृद्धि में रूपांतरित करना।

लखनऊ की प्लास्टिक उद्योग संगोष्ठी में बृजेश पाठक के संबोधन का निहितार्थ इसी बड़े प्रश्न में दिखाई देता है। जिस प्रदेश पर कभी विकास को लेकर तंज कसे जाते थे, वह आज अपनी अधोसंरचना, चिकित्सा, उद्योग, संपर्क और निवेश की नई संभावनाओं के साथ अपनी छवि बदलने की यात्रा पर है। अब इतिहास का अगला अध्याय इस बात से लिखा जाएगा कि एक्सप्रेसवे पर दौड़ती रफ्तार, औद्योगिक गलियारों में आती पूंजी और संस्थानों में बढ़ती क्षमता अंततः कितनी व्यापक समृद्धि में बदलती है। यही वह कसौटी होगी, जो आज के दावों को कल की उपलब्धि में परिवर्तित करेगी।

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