नन्हे मरीजों के इलाज का बढ़ता केंद्र बन रहा नोएडा, किडनी रोग से बोन मैरो ट्रांसप्लांट तक सेवाओं के विस्तार पर निदेशक प्रो. डॉ. अरुण कुमार सिंह से सार्थक विमर्श
दैनिक इंडिया न्यूज़,नोएडा, 20 सितंबर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गंभीर और जटिल बाल-रोगों के उपचार की तस्वीर तेजी से बदल रही है। नोएडा सेक्टर-30 स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ (PGICH) में सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं के विस्तार के साथ वह चिकित्सा अवसंरचना आकार ले रही है, जिसका प्रभाव केवल गौतमबुद्ध नगर तक सीमित न रहकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR के व्यापक क्षेत्र तक पड़ सकता है। संस्थान की भविष्य की योजनाओं और चिकित्सा सेवाओं के विस्तार को लेकर राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष जितेंद्र प्रताप सिंह ने संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) अरुण कुमार सिंह से शिष्टाचार भेंट कर विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की।
संगठन की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भेंट के दौरान बाल-चिकित्सा सेवाओं के विस्तार, बाल वृक्क विज्ञान (Pediatric Nephrology), आधुनिक नैदानिक सुविधाओं, ओपीडी विस्तार तथा संस्थान के आगामी विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि बच्चों के जटिल रोगों के लिए उपचार, विशेषज्ञता और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं यदि एक ही संस्थान में क्रमशः विकसित होती हैं, तो इसका सबसे बड़ा लाभ उन परिवारों को मिलता है जिन्हें गंभीर उपचार के लिए दूसरे महानगरों की ओर देखना पड़ता है।
2015 में शुरू हुई यात्रा, अब सुपर-स्पेशियलिटी के विस्तार की ओर
पीजीआईसीएच उत्तर प्रदेश सरकार के अधीन स्वायत्त संस्थान है। संस्थान की आधिकारिक जानकारी के अनुसार इसका उद्देश्य उच्चस्तरीय बाल-स्वास्थ्य सेवाओं के साथ स्नातकोत्तर एवं उच्चतर चिकित्सा शिक्षा, प्रशिक्षण और शोध को विकसित करना है। संस्थान में 16 क्लिनिकल एवं बेसिक चिकित्सा विषयों में सेवाएं संचालित हो रही हैं और इसे पश्चिमी देशों के विकसित बाल-चिकित्सा केंद्रों की तर्ज पर विकसित करने की परिकल्पना की गई है।
यानी कहानी केवल एक अस्पताल के विस्तार की नहीं है; इसके पीछे बाल-चिकित्सा उपचार, चिकित्सा शिक्षा और शोध—तीनों को एक साथ विकसित करने की दीर्घकालिक परिकल्पना है। और इसी परिकल्पना का अगला महत्वपूर्ण अध्याय है बच्चों की किडनी संबंधी बीमारियों के लिए विकसित होती विशेषज्ञ सेवाएं।
किडनी रोग से जूझते बच्चों के लिए खुलता नया अध्याय
पीजीआईसीएच में बाल वृक्क विज्ञान विभाग बच्चों में तीव्र एवं दीर्घकालिक किडनी रोग, नेफ्रोटिक सिंड्रोम, जन्मजात किडनी विकार, आनुवंशिक बीमारियों और किडनी फेल्योर जैसी जटिल स्थितियों के उपचार पर केंद्रित है। विभाग में बच्चों के लिए हीमोडायलिसिस और पेरिटोनियल डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है तथा आगे Continuous Kidney Replacement Therapy और अन्य उन्नत सेवाओं के विस्तार की योजना भी आधिकारिक रूप से दर्ज है।
यहीं से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चिकित्सा तस्वीर में एक महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई देता है—बच्चों के जटिल किडनी रोगों के लिए विशेषज्ञ उपचार क्षमता का क्षेत्रीय स्तर पर विकसित होना।
बोन मैरो ट्रांसप्लांट से लेकर दुर्लभ रोगों तक बढ़ता दायरा
संस्थान में 8-बेड का Pediatric Bone Marrow Transplant Centre भी कार्यरत है। संस्थान की आधिकारिक जानकारी में भविष्य के लिए Pediatric Cancer Centre तथा Renal और Liver Transplant Centre जैसी सुविधाओं की भी योजना का उल्लेख है।
इसके साथ मेडिकल जेनेटिक्स विभाग दुर्लभ रोगों, न्यूरोजेनेटिक विकारों और अन्य आनुवंशिक स्थितियों के निदान एवं प्रबंधन पर काम कर रहा है। संस्थान स्वयं इसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दुर्लभ रोगों की विशेषज्ञ सेवाओं के विस्तार से जोड़ता है।
इसका अर्थ यह है कि पीजीआईसीएच का विस्तार केवल “अधिक बेड और अधिक मरीज” तक सीमित नहीं है; इसकी दिशा ऐसी विशेषज्ञ चिकित्सा प्रणाली विकसित करने की है, जहां जटिल बाल-रोगों की जांच, उपचार, प्रशिक्षण और शोध समानांतर रूप से आगे बढ़ सकें।
निदेशक से मुलाकात में विकास की दिशा पर विमर्श
जितेंद्र प्रताप सिंह और प्रो. डॉ. अरुण कुमार सिंह की मुलाकात में संस्थान के आगामी विस्तार और चिकित्सा सुविधाओं को और सुदृढ़ करने से संबंधित विषयों पर भी चर्चा हुई। पीजीआईसीएच की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार प्रो. (डॉ.) अरुण कुमार सिंह अप्रैल 2023 से संस्थान के निदेशक हैं।
जितेंद्र प्रताप सिंह ने संस्थान की प्रगति और बाल-स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि “पीजीआईसीएच में सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं के विस्तार से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बाल-चिकित्सा की तस्वीर बदल रही है।”
उनके अनुसार, किसी भी क्षेत्र की स्वास्थ्य-व्यवस्था की वास्तविक शक्ति इस बात से निर्धारित होती है कि वहां गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चे को कितनी जल्दी विशेषज्ञ चिकित्सक, आधुनिक जांच और आवश्यक उपचार एक ही चिकित्सा तंत्र में उपलब्ध हो पाता है।
नोएडा से आगे की कहानी
पीजीआईसीएच की आधिकारिक योजनाओं में चिकित्सा सेवाओं के साथ विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ के प्रशिक्षण और उच्चस्तरीय शोध को भी संस्थान के विकास का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है। भविष्य में बड़ी संख्या में MD/MS, DM, MCh और PhD प्रशिक्षुओं को तैयार करने की परिकल्पना भी दर्ज है।
यही वह बिंदु है जहां नोएडा का यह संस्थान केवल एक उपचार केंद्र नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में बाल-चिकित्सा की विशेषज्ञ मानव-शक्ति और ज्ञान-आधारित स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करने की प्रयोगशाला के रूप में दिखाई देता है।
और जितेंद्र प्रताप सिंह की निदेशक प्रो. डॉ. अरुण कुमार सिंह से हुई यह मुलाकात इसी बड़े प्रश्न की ओर संकेत करती है—क्या आने वाले वर्षों में नोएडा जटिल बाल-रोगों के उपचार, प्रशिक्षण और शोध का ऐसा क्षेत्रीय केंद्र बन सकेगा, जहां पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ आसपास के राज्यों से आने वाले बच्चों के लिए भी विशेषज्ञ चिकित्सा की नई संभावनाएं खुलें? संस्थान का विस्तार और उसकी आगामी योजनाएं ही इस प्रश्न का अगला उत्तर तय करेंगी।