दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।उत्तर प्रदेश सरकार ने रविवार देर शाम वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की जिम्मेदारियां इस अंदाज में बाँटी हैं, जैसे फाइलें थक गई हों और अधिकारियों को नया विभाग देकर उन पर नई मुहर लगानी हो। स्वास्थ्य से उच्च शिक्षा, वन से पंचायती राज, कृषि से ऊर्जा तक—कमान बदली गई है। काम के ढेर वहीं हैं, बस हस्ताक्षर करने वाले हाथ बदल दिए गए हैं।
सबसे चर्चित पारी ऊर्जा की है। डॉ. आशीष कुमार गोयल, जो ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा के साथ पावर कॉरपोरेशन की कमान संभाल रहे थे, अब श्रम एवं सेवायोजन भेज दिए गए हैं। बिजली के बाद अब रोजगार—मानो शासन ने तय कर लिया हो कि कटौती और बेरोजगारी एक ही अधिकारी के हिस्से में ज्यादा देर न रहें। उनकी जगह रणवीर प्रसाद को ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा सौंपी गई है। यानी तार वही, स्विच नया। उपभोक्ता को फर्क तब पता चलेगा, जब लाइन कटे या न कटे।
स्वास्थ्य का अध्याय भी कम दिलचस्प नहीं। अमित कुमार घोष चिकित्सा, स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और चिकित्सा शिक्षा से हटाकर उच्च शिक्षा भेज दिए गए हैं। अस्पताल से विश्वविद्यालय—बीमारियों के बाद अब पाठ्यक्रम। खाली पड़े स्वास्थ्य के सिंहासन पर वी. हेकाली झिमोमी बिठाई गई हैं, जिन्हें वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से निकालकर अस्पताल और मेडिकल कॉलेज सौंप दिए गए हैं। पेड़-पौधों से मरीज-डॉक्टर तक का सफर प्रशासनिक दृष्टि से आसान है; इलाज उतना आसान हो, यह अलग बात है।
वन और पर्यावरण खाली नहीं छूटे। महेंद्र प्रसाद अग्रवाल उच्च शिक्षा छोड़कर जंगल और जलवायु संभालेंगे। किताबों के बाद कार्बन। शिक्षा का एक सिरा घोष के पास गया, दूसरा अमित गुप्ता के खाते में अतिरिक्त प्रभार की तरह ठूँस दिया गया—स्टाम्प-रजिस्ट्रेशन के साथ प्राविधिक शिक्षा। कागज पर दस्तखत भी, डिप्लोमा भी। बहुकार्य ही दक्षता है, शासन यही मानता आया है।
पंचायती राज में रविंद्र आ गए, जो कृषि, कृषि शिक्षा, विपणन, निर्यात और मंडी परिषद जैसे कई टोकरे एक साथ ढो रहे थे। गाँव की सभा अब उनके हिस्से। पंचायती राज छोड़कर अनिल कुमार खाद्य, रसद और उपभोक्ता मामले संभालेंगे। राशन का कार्ड, उपभोक्ता का गुस्सा—दोनों एक मेज पर। कृषि का बाकी बोझ डॉ. एमकेएस सुंदरम पर डाल दिया गया है: खेती, कृषि शिक्षा, अनुसंधान, विपणन, विदेश व्यापार, निर्यात प्रोत्साहन। एक अधिकारी, पूरा कृषि मंत्रालय। फसल अच्छी हो या सिर्फ फाइल, यह मौसम बताएगा।
अमृत अभिजात पहले से पर्यटन, संस्कृति और धर्मार्थ कार्य देख रहे थे। अब परिवहन भी अतिरिक्त प्रभार में बाँध दिया गया है। तीर्थ, ताज और ट्रैफिक—एक ही टेबल। सड़क खराब हो या मेला, जिम्मेदार एक ही नाम पर मिल जाएगा।
सूची दस अधिकारियों की है, विभाग उससे कहीं ज्यादा। खास बात यह नहीं कि किसे कहाँ बैठाया गया, खास बात यह है कि संवेदनशील विभागों को ऐसे बाँटा गया है जैसे ताश के पत्ते। अनुभव जिस विभाग में बना, नियुक्ति अक्सर किसी और में। स्वास्थ्य वाले शिक्षा में, शिक्षा वाले वन में, ऊर्जा वाले श्रम में, कृषि वाले पंचायत में। प्रशासनिक भाषा में इसे “पुनर्विन्यास” कहते हैं। आम भाषा में—कुर्सी घुमाओ, सवाल वही रहने दो।
नई कमान संक्षेप में इस प्रकार है:
अमित कुमार घोष — उच्च शिक्षा
वी. हेकाली झिमोमी — चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा
अमृत अभिजात — पर्यटन-संस्कृति-धर्मार्थ के साथ परिवहन का अतिरिक्त बोझ
महेंद्र प्रसाद अग्रवाल — वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन
अनिल कुमार — खाद्य एवं रसद तथा उपभोक्ता मामले
डॉ. एमकेएस सुंदरम — कृषि और उससे जुड़ी लगभग हर फाइल
रविंद्र — पंचायती राज
अमित गुप्ता — पुराने काम के साथ प्राविधिक शिक्षा
रणवीर प्रसाद — ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा
डॉ. आशीष कुमार गोयल — श्रम एवं सेवायोजन
शासन इसे बड़े प्रशासनिक फेरबदल का नाम देगा। फाइलें इसे नए शीर्षक वाली पुरानी नोटशीट कहेंगी। जनता इसे तब पढ़ेगी, जब अस्पताल में डॉक्टर मिले, कॉलेज में शिक्षक खड़े हों, गाँव में बिजली रहे और राशन दुकान खुली हो। तब पता चलेगा कि बदली कमान थी या केवल बदले नाम।