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सैनिकों के नाम एक हजार यूनिट ‘रक्त’, राष्ट्रसेवा का अनूठा संकल्प

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Dainik India News

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सैनिकों के नाम एक हजार यूनिट ‘रक्त’, राष्ट्रसेवा का अनूठा संकल्प

‘सिंदूर महा रक्तदान यात्रा’ में महाराष्ट्र से दिल्ली तक दिखा सैनिक सम्मान का जज्बा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एकनाथ शिंदे के अभियान की सराहना की

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दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।देश की सीमाओं पर डटे सैनिकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता को सेवा के संकल्प में बदलते हुए महाराष्ट्र से निकली ‘सिंदूर महा रक्तदान यात्रा’ रविवार को दिल्ली स्थित बेस हॉस्पिटल पहुंची। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में आए लोगों ने सैनिकों के लिए रक्तदान किया और करीब एक हजार यूनिट रक्त भारतीय सैनिकों को समर्पित किया। इस व्यापक रक्तदान अभियान को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रसेवा और सैनिक कल्याण की भावना से जुड़ी अनुकरणीय पहल बताया।

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से अभियान में शामिल हुए सभी लोगों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि रक्तदान को सदियों से ‘जीवनदान’ और ‘महादान’ कहा जाता रहा है, लेकिन जब रक्तदान किसी सैनिक के लिए किया जाता है तो उसका अर्थ और व्यापक हो जाता है। सैनिक के लिए दिया गया रक्त केवल किसी जीवन को बचाने का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र की रक्षा के संकल्प का प्रतीक बन जाता है।

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सैनिकों के लिए रक्तदान को बनाया राष्ट्रसेवा का अभियान

‘सिंदूर महा रक्तदान यात्रा’ ने रक्तदान को सामाजिक दायित्व से आगे बढ़ाकर सैनिक कल्याण से जोड़ने का प्रयास किया है। करीब एक हजार यूनिट रक्त का समर्पण इस अभियान की व्यापक जनभागीदारी को दर्शाता है। सीमा पर देश की रक्षा करते हुए घायल होने वाले सैनिकों के उपचार में रक्त की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में नागरिकों द्वारा सैनिकों के लिए रक्तदान करना सेना के प्रति प्रत्यक्ष सहयोग और सम्मान का संदेश देता है।

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रक्षा मंत्री ने कहा कि सैनिक देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करते हैं। ऐसे में समाज की ओर से उनके लिए किया गया प्रत्येक योगदान केवल सहायता नहीं, बल्कि उनके त्याग के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है।

एकनाथ शिंदे के संकल्प को राजनाथ ने सराहा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस महाअभियान की संकल्पना करने वाले महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का विशेष रूप से अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि शिंदे ने भारतीय सैनिकों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए इस अभियान को देश के अनेक स्थानों तक ले जाने का बीड़ा उठाया है।

राजनाथ सिंह के इस संदेश को राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। महाराष्ट्र से प्रारंभ हुई पहल का दिल्ली के बेस हॉस्पिटल तक पहुंचना और सैनिकों के लिए बड़े पैमाने पर रक्तदान किया जाना यह दर्शाता है कि सैनिक सम्मान को जनभागीदारी से जोड़ने की कोशिश राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार ले रही है।

‘महादान’ से आगे—राष्ट्ररक्षा में नागरिक भागीदारी

रक्तदान को सामान्यतः जीवन बचाने वाला महादान माना जाता है, लेकिन सैनिकों के लिए रक्तदान का भाव इससे कहीं आगे जाता है। यह उस सैनिक के प्रति समाज की जिम्मेदारी का प्रतीक है, जो सीमाओं पर राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाने से भी पीछे नहीं हटता।

इस अभियान के माध्यम से यह संदेश भी सामने आया कि राष्ट्ररक्षा केवल सीमा पर तैनात जवानों की जिम्मेदारी नहीं है। नागरिक भी अपने-अपने स्तर पर सैनिकों के जीवन और कल्याण में योगदान देकर राष्ट्रसेवा का हिस्सा बन सकते हैं।

देशभर में विस्तार का संकल्प

रक्षा मंत्री ने शिंदे की पहल की सराहना करते हुए कहा कि सैनिकों के कल्याण के उद्देश्य से इस महाअभियान को देश के अनेक हिस्सों में संचालित करने का संकल्प समाजसेवा को नया आयाम देता है। इससे रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ ही सैनिकों के प्रति सम्मान और राष्ट्रीय एकता की भावना को भी बल मिलेगा।

‘सिंदूर महा रक्तदान यात्रा’ इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि इसमें राष्ट्रप्रेम को किसी औपचारिक आयोजन तक सीमित रखने के बजाय उसे प्रत्यक्ष सेवा और जीवनदान से जोड़ा गया। लगभग एक हजार यूनिट रक्त का सैनिकों को समर्पण इसी भावना का सशक्त प्रमाण है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा अभियान की सराहना और एकनाथ शिंदे के संकल्प का अभिनंदन इस पहल को राष्ट्रीय विमर्श में एक अलग पहचान देता है। संदेश साफ है—सीमा पर सैनिक राष्ट्र की रक्षा कर रहे हैं तो समाज उनके जीवन की रक्षा में अपना योगदान देकर उस ऋण को चुकाने का प्रयास कर सकता है।

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