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ग्रामीण परिवहन व्यवस्था में ऐतिहासिक पहल : ‘मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026’ को मंत्रिपरिषद की स्वीकृति

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Dainik India News

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ग्रामीण परिवहन व्यवस्था में ऐतिहासिक पहल : ‘मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026’ को मंत्रिपरिषद की स्वीकृति


हर ग्राम पंचायत तक पहुँचेगी परिवहन सेवा, ग्रामीणों को ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय तक सीधी व सुरक्षित आवाजाही का मार्ग होगा प्रशस्त


दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ। उत्तर प्रदेश की ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़, सुलभ और जनोपयोगी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत को परिवहन सेवा से जोड़ते हुए ग्रामीण नागरिकों को ब्लॉक, तहसील तथा जिला मुख्यालय तक सीधी, सुरक्षित और नियमित यातायात सुविधा उपलब्ध कराना है। सरकार का विश्वास है कि यह पहल ग्रामीण जीवन को नई गतिशीलता प्रदान करेगी।


इस योजना की एक विशेषता यह भी है कि ग्रामीण मार्गों पर परिवहन सेवा के संचालन में निजी क्षेत्र के बस संचालकों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। इससे न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सेवाओं का विस्तार होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। मंत्रिपरिषद ने योजना के अंतर्गत संचालित होने वाले वाहनों को राज्य सरकार द्वारा परमिट की अनिवार्यता से छूट प्रदान करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी है, जिससे सेवा प्रारम्भ करने की प्रक्रिया अधिक सरल और त्वरित हो सके।
यह निर्णय मोटरयान अधिनियम की प्रासंगिक व्यवस्थाओं के अनुरूप लिया गया है। अधिनियम की धारा 66(3)(द) के अंतर्गत ग्रामों और ग्राम पंचायतों को जोड़ने वाले वाहनों को धारा 66(1) के अंतर्गत परमिट की आवश्यकता से छूट प्रदान करने का प्रावधान है।

इसी विधिक व्यवस्था के आधार पर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण परिवहन सेवा को प्रोत्साहित करने का मार्ग प्रशस्त किया है। साथ ही भविष्य में यदि योजना में किसी प्रकार का संशोधन आवश्यक प्रतीत हो, तो उस पर निर्णय लेने के लिए मंत्रिपरिषद ने मुख्यमंत्री को अधिकृत भी किया है।


योजना के अंतर्गत 15 से 28 सीट क्षमता (लगभग 7 मीटर लंबाई) वाले वाहनों का संचालन किया जाएगा। इन वाहनों में डीजल, सीएनजी अथवा विद्युत चालित वाहन सम्मिलित होंगे। योजना में सम्मिलित किए जाने वाले वाहनों की अधिकतम आयु पंजीकरण तिथि से आठ वर्ष तक निर्धारित की गई है तथा वाहन की निर्माण तिथि और पंजीकरण तिथि के मध्य एक वर्ष से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में विशेष पर्यावरणीय मानकों को ध्यान में रखते हुए केवल सीएनजी अथवा विद्युत चालित वाहनों के संचालन की अनुमति होगी तथा निर्धारित पर्यावरणीय मानदंडों का पालन अनिवार्य रहेगा।


इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक आवेदक को उस ब्लॉक की समस्त ग्राम पंचायतों के मार्गों पर, जिसके लिए उसने आवेदन किया है, अपने विवेकानुसार वाहन संचालन का अधिकार होगा। वह फेरों की संख्या तथा मार्ग का निर्धारण भी कर सकेगा, किंतु यह अनिवार्य होगा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत को प्रतिदिन कम से कम दो बार परिवहन सेवा उपलब्ध कराई जाए। ग्राम पंचायत से ब्लॉक मुख्यालय तक का सबसे छोटा मार्ग उस वाहन का प्राथमिक रूट माना जाएगा, जिससे अधिकाधिक गांवों को इस सेवा का लाभ मिल सके।


योजना की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि ग्राम पंचायत से प्रारंभ होने वाली यह सेवा आवश्यकता अनुसार ब्लॉक से आगे तहसील और जिला मुख्यालय तक भी विस्तारित की जा सकेगी। इससे ग्रामीण नागरिकों को प्रशासनिक कार्यों, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और व्यापारिक गतिविधियों के लिए शहरों तक पहुँचने में अत्यधिक सुविधा प्राप्त होगी। प्रत्येक ब्लॉक में न्यूनतम दो वाहनों का संचालन सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि सेवा निरंतर और व्यवस्थित रूप से संचालित हो सके।


प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत यह योजना परिवहन निगम की विशेष अनुबंध योजना के रूप में लागू की जाएगी। इसके लिए परिवहन निगम मुख्यालय द्वारा प्रदेश के प्रमुख समाचार पत्रों में विज्ञप्ति प्रकाशित कराई जाएगी। इच्छुक आवेदकों को आवेदन प्रस्तुत करने के लिए 15 दिवस की समयावधि प्रदान की जाएगी। आवेदन संबंधित जनपद के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक अथवा मुख्यालय द्वारा नामित अधिकारी के माध्यम से प्राप्त किए जाएंगे।


योजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया को भी समयबद्ध और पारदर्शी बनाया गया है। आवेदन प्राप्त होने के पश्चात उनकी 15 दिनों के भीतर स्क्रीनिंग की जाएगी। सफल आवेदक के चयन के बाद उसे 15 दिनों के भीतर वाहन उपलब्ध कराना होगा, और संपूर्ण प्रक्रिया को अधिकतम 45 दिनों के भीतर पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।


आवेदनों की जांच और अंतिम चयन की जिम्मेदारी जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित एक समिति को सौंपी गई है। इस समिति में संबंधित मुख्य विकास अधिकारी और सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी सदस्य होंगे, जबकि परिवहन निगम के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे। यही समिति सेवा प्रदाताओं का चयन करने के साथ-साथ रूट का अंतिम निर्धारण भी करेगी।


योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और सतत अनुश्रवण की जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्रीय प्रबंधकों को सौंपी गई है। वे समय-समय पर, कम से कम मासिक आधार पर, योजना की प्रगति से मंडलायुक्त को अवगत कराते रहेंगे, जिससे सेवा की गुणवत्ता और नियमितता सुनिश्चित की जा सके।


राज्य सरकार का मानना है कि मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 केवल एक परिवहन परियोजना नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण जीवन को नई गति देने वाली सामाजिक-आर्थिक पहल है। इससे गांवों और शहरों के मध्य दूरी केवल भौगोलिक नहीं रहेगी, बल्कि विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों तक पहुँच का मार्ग भी व्यापक रूप से प्रशस्त होगा। यही कारण है कि यह योजना ग्रामीण उत्तर प्रदेश की प्रगति के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होने जा रही है।

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