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₹5 लाख का इलाज, ₹5 लाख की कल्याण निधि, 900 नई अदालतें—योगी ने खोला न्याय का नया अध्याय

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अधिवक्ताओं को सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा का ऐलान; 400 विधि अधिकारियों को टैबलेट, हाईकोर्ट के 10 हजार से अधिक वकीलों के चैंबरों के रखरखाव में भी सरकार देगी सहयोग

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दैनिक इंडिया न्यूज़ 14 sep 2026 प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में न्याय व्यवस्था को अधिक सक्षम, आधुनिक और सुविधासंपन्न बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिवक्ता समुदाय के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। इनमें सबसे प्रमुख है प्रदेश में सक्रिय रूप से प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं के लिए प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा। इसके साथ ही अधिवक्ता कल्याण निधि को पांच लाख रुपये तक बढ़ाने और पहले चरण में जिला स्तर पर 900 नए न्यायालयों के गठन की मंजूरी का ऐलान न्यायिक व्यवस्था के विस्तार की बड़ी तस्वीर सामने रखता है।

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यह घोषणा केवल चिकित्सा सुविधा तक सीमित नहीं है। हाईकोर्ट में दस हजार से अधिक अधिवक्ताओं के लिए निर्मित चैंबरों के रखरखाव के लिए फर्नीचर और आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने संबंधी प्रस्ताव पर भी सरकार की ओर से पूरा सहयोग देने का भरोसा मुख्यमंत्री ने दिया है। इस तरह अधिवक्ताओं के स्वास्थ्य, आर्थिक सुरक्षा और कार्यस्थल से लेकर न्यायालयों की संरचना तक, कई स्तरों पर सुविधाओं के विस्तार की रूपरेखा सामने आई है।

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हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, इलाहाबाद की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 700 करोड़ रुपये की लागत से दस हजार से अधिक अधिवक्ताओं के लिए चैंबर, मल्टीलेवल पार्किंग, डाइनिंग हॉल, कॉमन रूम और लाइब्रेरी का निर्माण कराया गया है। अब इनके रखरखाव और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता के लिए मुख्य न्यायमूर्ति के माध्यम से आने वाले प्रस्तावों पर सरकार सहयोग करेगी।

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अधिवक्ता कल्याण से जुड़े फैसलों में भी महत्वपूर्ण विस्तार किया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि डेढ़ लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये की गई है। अधिवक्ता के निधन की स्थिति में उनके परिजनों को मिलने वाली आर्थिक सहायता के लिए निर्धारित आयु सीमा भी 60 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष कर दी गई है। कौशांबी, लखनऊ, कासगंज और श्रावस्ती समेत लगभग एक दर्जन जिलों में अधिवक्ता चैंबरों के निर्माण के लिए अलग से धनराशि उपलब्ध कराने की जानकारी भी दी गई।

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अब तस्वीर का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष न्यायालयों के आधारभूत ढांचे से जुड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन दस जिलों में जिला अदालतें किराये के भवनों में संचालित हो रही थीं, वहां इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स के निर्माण का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। इन परिसरों में न्यायिक अधिकारियों के आवास के साथ अधिवक्ताओं के चैंबर, खेल सुविधाएं, इंडोर स्टेडियम और अधिवक्ताओं के लिए सस्ती कैंटीन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।

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न्यायिक ढांचे के विस्तार का सबसे बड़ा आंकड़ा हालांकि 900 नए न्यायालयों से जुड़ा है। मुख्यमंत्री के अनुसार मुकदमों के त्वरित निस्तारण के लिए पहले चरण में जिला स्तर पर 900 न्यायालयों के गठन को मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य न्यायालयों पर बढ़ते कार्यभार को कम करने और मामलों के निस्तारण की गति को बेहतर बनाने की दिशा में अतिरिक्त न्यायिक क्षमता तैयार करना है।

न्यायिक व्यवस्था के आधुनिकीकरण में अब तकनीक को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया जा रहा है। जिला न्यायालय, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले विधि अधिकारियों की फीस में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि किए जाने की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे शासन से संबंधित न्यायिक मामलों की सूचनाएं और आवश्यक सामग्री आधुनिक तकनीक के माध्यम से अधिक तेजी से उपलब्ध हो सकेगी।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि आज न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी शक्ति आम आदमी का विश्वास है और इस विश्वास की पहली शर्त समय पर न्याय है। नागरिक को यह भरोसा होना चाहिए कि उसकी सुनवाई निष्पक्ष होगी, उसके साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होगा और कानून की नजर में सभी समान हैं। पारदर्शिता, निर्णय प्रक्रिया में ईमानदारी, संस्थाओं की जवाबदेही और नागरिक विश्वास को उन्होंने मजबूत न्यायिक व्यवस्था की अनिवार्य शर्त बताया।

इसी क्रम में जिला अदालतों और जेलों को हाईस्पीड इंटरनेट तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जोड़ने की बात कही गई। न्याय श्रुति प्रणाली के माध्यम से वर्चुअल गवाही, अदालती दस्तावेजों की स्कैनिंग और डिजिटाइजेशन तथा अभियोजन प्रणाली को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने जैसे कदमों का भी उल्लेख किया गया। पुलिस और अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय के जरिए चार्जशीट और वैज्ञानिक साक्ष्यों को समय पर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने की व्यवस्था को भी न्यायिक प्रक्रिया को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया गया।

मुख्यमंत्री ने अधिवक्ताओं को बदलते विधिक परिदृश्य के अनुरूप स्वयं को लगातार अद्यतन करने का आह्वान किया। साइबर अपराध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा प्राइवेसी, डिजिटल कॉमर्स, फिनटेक, बौद्धिक संपदा और क्लाइमेट लिटिगेशन जैसे नए क्षेत्रों का विस्तार हो रहा है। ऐसे में केवल पारंपरिक कानूनी ज्ञान पर्याप्त नहीं होगा। तकनीक, अर्थव्यवस्था और समाज में हो रहे बदलावों की समझ भी अधिवक्ताओं के पेशेवर कौशल का हिस्सा बननी होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन नए कानूनों को तेजी से अपनाने में अधिवक्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका संदेश स्पष्ट था कि बदलते समय के साथ बार को भी अपनी कार्यशैली और विशेषज्ञता का विस्तार करना होगा। फ्यूचर रेडी बार ही फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम की मजबूत नींव रखेगा।

बार और बेंच के बीच बेहतर समन्वय को भी मुख्यमंत्री ने न्यायिक व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि बार और बेंच न्याय रूपी रथ के दो महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और दोनों के बीच आपसी सम्मान, शिष्टाचार, संवाद, समन्वय और सहयोग निरंतर बना रहना चाहिए। मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायमूर्ति के बीच होने वाली बैठकों में केवल न्यायपालिका से संबंधित विषयों पर ही चर्चा नहीं होती, बल्कि अधिवक्ताओं की समस्याओं को भी सामने रखकर उनके समाधान की दिशा में प्रयास किए जाते हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने बार एसोसिएशन को हाईकोर्ट का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि बार के अनेक अधिवक्ताओं ने लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अधिवक्ताओं के लिए पार्किंग, भवन और अन्य सुविधाओं के विकास को उन्होंने महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। युवा अधिवक्ताओं से उन्होंने बार और हाईकोर्ट को आगे ले जाने तथा जनसेवा की भावना के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया।

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रयागराज को संगम के साथ न्याय की भूमि बताते हुए कहा कि यहां के अधिवक्ताओं ने लोकतंत्र की रक्षा में बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि सरकार और अधिवक्ताओं के संबंध आम नागरिक को न्याय दिलाने की साझा जिम्मेदारी से जुड़े हैं। न्याय तक पहुंच को सरल बनाने के लिए ईज ऑफ जस्टिस को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

न्यायिक व्यवस्था के इस पूरे विस्तार का वास्तविक केंद्र अंततः आम नागरिक ही है। अधिवक्ताओं के लिए पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा और कल्याण निधि में वृद्धि जहां पेशे से जुड़े लोगों को सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा का आधार देती है, वहीं 900 नए न्यायालयों का गठन, इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स, डिजिटल न्यायिक प्रक्रियाएं और तकनीकी संसाधनों का विस्तार न्याय तक पहुंच को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में उठाए गए कदम हैं।

अब इन घोषणाओं की वास्तविक सफलता इस बात से निर्धारित होगी कि आधुनिक अधोसंरचना और तकनीकी संसाधनों का लाभ न्यायालय की चौखट तक पहुंचने वाले आम नागरिक को कितनी तेजी से मिलता है। क्योंकि न्याय व्यवस्था की अंतिम कसौटी उसके भवनों की भव्यता नहीं, बल्कि समय पर मिलने वाला निष्पक्ष न्याय और उस पर कायम नागरिक का विश्वास है।

वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री का जताया आभार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से अधिवक्ता समुदाय के हित में की गई घोषणाओं का वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने स्वागत करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एपी सिंह और वरिष्ठ अधिवक्ता रीना एन सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता आनंदमणि त्रिपाठी पूर्व प्रेजिडेंट अवध बार एसोसिएशन हाई कोर्ट लखनऊ वरिष्ठ अधिवक्ता वेद प्रकाश सिंह राज्य विधि अधिकारी लखनऊ हाई कोर्ट,वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक बाजपेयी  हाई कोर्ट लखनऊ, प्रशांत सिंह अटल, वरिष्ठ अधिवक्ता, उच्च न्यायालयलखनऊ  ने मुख्यमंत्री के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि अधिवक्ताओं के लिए पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा, अधिवक्ता कल्याण निधि में वृद्धि तथा न्यायिक आधारभूत ढांचे के विस्तार से जुड़े निर्णय अधिवक्ता समुदाय के लिए महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के उपाध्यक्ष अमित कुमार सिंह (सोनू) के साथ अधिवक्ता विवेक मिश्रा, अभिषेक मिश्रा, हनुमान प्रसाद मिश्रा, अवनीश चंद्र त्रिपाठी और बिंदु कुमारी ने भी मुख्यमंत्री के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि इन निर्णयों से अधिवक्ताओं के सामाजिक-सुरक्षा कवच को मजबूती मिलने के साथ न्यायिक व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, आधुनिक और जनोन्मुख बनाने में भी सहायता मिलेगी।

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