लखनऊ के छठ घाट पर सामूहिक सफाई और ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत पौधारोपण; चाय पर चर्चा में प्रधानमंत्री के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन पर हुई बातचीत

दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर गुरुवार को लखनऊ में जन्मदिन समारोह का स्वरूप सेवा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ता दिखाई दिया। अखिल भारतीय भोजपुरी समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभुनाथ राय के नेतृत्व में समाज के पदाधिकारी और सदस्य गोमती तट स्थित छठ घाट, लक्ष्मण मेला मैदान में जुटे और सामूहिक श्रमदान कर घाट तथा आसपास के क्षेत्र की सफाई की। इसके साथ ही गोमती नदी को स्वच्छ रखने और हरित आवरण बढ़ाने के संदेश के साथ ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत वृक्षारोपण किया गया। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने आयोजन को सामूहिक सामाजिक सहभागिता का स्वरूप दिया।

सुबह आयोजित अभियान में समाज के सदस्यों ने स्वयं सफाई कार्य में हिस्सा लिया। छठ घाट की स्वच्छता के साथ गोमती नदी और उसके तट को प्रदूषण से मुक्त रखने की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित किया गया। आयोजन का एक प्रमुख पक्ष यह रहा कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन को केवल शुभकामना कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय उसे सेवा और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का प्रयास किया गया। श्रमदान के बाद कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों में किए गए कार्यों को लेकर ‘चाय पर चर्चा’ भी हुई।
चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में देश और समाज की सेवा से जुड़े उनके लंबे कार्यकाल का उल्लेख किया गया। अखिल भारतीय भोजपुरी समाज की ओर से उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की गई। पदाधिकारियों ने कहा कि राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ देशसेवा के लिए उनकी प्रतिबद्धता आगे भी बनी रहे, इसके लिए छठी मैया से आशीर्वाद की प्रार्थना की गई।
कार्यक्रम में समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामयतन यादव, राष्ट्रीय महामंत्री मनोज सिंह, राष्ट्रीय सचिव वेद प्रकाश राय, सलाहकार मनीष पोद्दार और मनोज राय सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे। लोक गायक अवधेश, एसपी चौहान, सुरेश कुशवाहा, विक्रम कुशवाहा और कपिल देव कुशवाहा समेत बड़ी संख्या में सदस्यों ने भी सफाई अभियान में हिस्सा लिया। पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने श्रमदान के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया कि नदी, घाट और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की साझा जिम्मेदारी भी है।