तिरंगा यात्रा के बाद भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष ने स्वयं शुरू की सफाई, देखते ही देखते कार्यकर्ता भी जुटे; राष्ट्रध्वज के सम्मान को नागरिक दायित्व से जोड़ा
दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।तिरंगा यात्रा के समापन के बाद जब देशभक्ति के नारों की गूंज थमी, तब सड़क पर एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने राष्ट्रध्वज के सम्मान को नागरिक दायित्व से जोड़ दिया। भाजपा उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष नीरज सिंह ने मार्ग पर पड़ी पानी की बोतलें, गिलास और अन्य अपशिष्ट देखा तो किसी निर्देश की प्रतीक्षा किए बिना स्वयं बोरी उठाई और उसे एकत्र करना शुरू कर दिया। उन्हें इस कार्य में जुटा देख पार्टी के अन्य कार्यकर्ता भी आगे आए और कुछ ही देर में सफाई सामूहिक प्रयास में बदल गई।

यात्रा में शामिल लोगों की बड़ी संख्या के कारण मार्ग पर जगह-जगह प्लास्टिक की बोतलें और गिलास पड़े थे। नीरज सिंह ने स्वयं आगे बढ़कर उन्हें उठाया। उनके इस कदम ने यह संदेश दिया कि सार्वजनिक कार्यक्रम की समाप्ति के साथ आयोजन स्थल को स्वच्छ छोड़ना भी उसी जिम्मेदारी का हिस्सा है, जिसकी अपेक्षा समाज अपने नागरिकों से करता है।
इस पहल की सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों और विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सराहना की। उनका कहना है कि स्वच्छता को लेकर जागरूकता तभी स्थायी रूप ले सकती है, जब सार्वजनिक आयोजनों में भाग लेने वाले लोग भी अपने आसपास के परिवेश के प्रति उत्तरदायी व्यवहार करें। किसी अभियान का वास्तविक प्रभाव तब दिखाई देता है, जब उसका संदेश व्यवहार में उतरता है।
राष्ट्रीय सनातन महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेंद्र प्रताप सिंह ने नीरज सिंह के प्रयास के लिए साधुवाद और धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे मानवीय चेहरे भारतीय राजनीति में निरंतर आगे बढ़ते रहें तो देश में स्वच्छता, सुव्यवस्था, जिम्मेदारी और राष्ट्रभक्ति की भावना को नई दिशा मिल सकती है। उन्होंने इसे युवाओं के लिए अनुकरणीय संदेश बताया।
तिरंगा यात्रा का केंद्रबिंदु राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान और देश के प्रति प्रतिबद्धता था। उसके बाद उसी मार्ग से कचरा हटाने की पहल ने उस भावना को व्यवहारिक रूप दिया। राष्ट्र के प्रति सम्मान केवल प्रतीकों और नारों तक सीमित न रहकर सार्वजनिक संपत्ति, पर्यावरण और सामुदायिक परिवेश के प्रति उत्तरदायित्व में भी दिखाई दे—यह संदेश इस पूरे प्रसंग में स्वतः उभरकर सामने आया।
सार्वजनिक आयोजनों के बाद सफाई की जिम्मेदारी अक्सर स्थानीय निकायों या कर्मचारियों तक सीमित मान ली जाती है। ऐसे में किसी जनप्रतिनिधि अथवा सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति का स्वयं आगे आना लोगों को यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि स्वच्छता किसी एक विभाग का काम नहीं, बल्कि सामूहिक नागरिक कर्तव्य है।
नीरज सिंह की यह पहल किसी बड़े अभियान या औपचारिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं थी। यह एक सहज व्यक्तिगत कदम था, जिसने वहां मौजूद लोगों को साथ आने के लिए प्रेरित किया। यही इसकी सबसे उल्लेखनीय बात रही—एक व्यक्ति ने बोरी उठाई और कुछ ही क्षणों में कई हाथ उस काम में जुड़ गए।
तिरंगा यात्रा के बाद सड़क पर उठाई गई वह बोरी इसलिए चर्चा में आई, क्योंकि उसने देशभक्ति के उत्साह को जिम्मेदारी की कसौटी से जोड़ दिया। यात्रा समाप्त हो गई, भीड़ लौट गई और नारे थम गए, लेकिन स्वच्छता का वह संदेश वहीं रह गया—राष्ट्र के सम्मान की शुरुआत अपने आसपास के परिवेश के सम्मान से भी होती है।