रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संसदीय क्षेत्र के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के प्रतिष्ठित मंदिरों और धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण एवं विकास के लिए पर्यटन विभाग को भेजी सूची, राज्य योजना से होगा कार्य
दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।लखनऊ के प्राचीन धार्मिक स्थलों को पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में पहल तेज हो गई है। लखनऊ के सांसद एवं भारत सरकार के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संसदीय क्षेत्र के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में स्थित प्राचीन काल से प्रतिष्ठित 16 मंदिरों एवं देवस्थलों के सौंदर्यीकरण और विकास का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग को भेजा है। प्रस्ताव के तहत इन धार्मिक स्थलों पर पर्यटन परियोजनाओं के माध्यम से विकास एवं सौंदर्यीकरण संबंधी कार्य कराए जाने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
पर्यटन विभाग पहले से ही राज्य योजना के अंतर्गत मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण तथा विकास के कार्य पर्यटन परियोजनाओं के माध्यम से करा रहा है। ऐसे में रक्षामंत्री के संसदीय क्षेत्र से भेजे गए 16 प्रतिष्ठित देवस्थलों के प्रस्ताव को क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को विस्तार देने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है। इन स्थलों के विकास से स्थानीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ उनके आसपास पर्यटन सुविधाओं को बेहतर बनाने का मार्ग भी प्रशस्त हो सकता है।
इस प्रस्ताव की पृष्ठभूमि में चार अगस्त 2026 को लखनऊ मंडल में राज्य योजना के अंतर्गत संचालित पर्यटन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा बैठक भी हुई थी। उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री ने वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के दौरान क्रियान्वित की जा रही पर्यटन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत पर्यटन परियोजना प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
इसी क्रम में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के संसदीय क्षेत्र में स्थित प्राचीन मंदिरों एवं देवस्थलों की सूची पर्यटन विभाग को प्रेषित की गई है। प्रस्तावित स्थलों का चयन विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में स्थित उन धार्मिक केंद्रों के रूप में किया गया है, जिनका ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व लंबे समय से क्षेत्रीय आस्था का हिस्सा रहा है।
राज्य योजना के अंतर्गत प्रस्तावित विकास कार्यों का उद्देश्य धार्मिक स्थलों को अधिक सुव्यवस्थित और आकर्षक बनाना है। पर्यटन विभाग के माध्यम से ऐसे स्थलों पर सौंदर्यीकरण एवं आवश्यक विकास कार्य कराए जाने से श्रद्धालुओं के साथ-साथ धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन में रुचि रखने वाले लोगों की आवाजाही बढ़ने की संभावना है।
लखनऊ की पहचान केवल प्रशासनिक और राजनीतिक राजधानी के रूप में नहीं, बल्कि समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत वाले शहर के रूप में भी रही है। शहर और उसके आसपास स्थित प्राचीन देवस्थल इस विरासत की महत्वपूर्ण कड़ियां हैं। ऐसे में 16 मंदिरों के विकास का प्रस्ताव धार्मिक आस्था के केंद्रों को संरक्षित करने के साथ उन्हें पर्यटन की व्यापक अवधारणा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
अब निगाह पर्यटन विभाग की ओर से प्रस्तावित स्थलों पर आगे की कार्रवाई और स्वीकृति की प्रक्रिया पर है। यदि प्रस्तावित परियोजनाओं को योजना के अनुरूप स्वीकृति मिलती है, तो लखनऊ के इन प्राचीन देवस्थलों में विकास कार्यों का मार्ग खुलेगा और राजधानी की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन के व्यापक परिदृश्य में नई जगह मिल सकती है।