गोमतीनगर में आरएसीडब्ल्यू और फैशन डिजाइन प्रशिक्षण केंद्रों का प्रमाणपत्र वितरण समारोह आयोजित; रोजगार के अवसरों, प्रशिक्षण के लाभों और सेवा न्यास की गतिविधियों पर हुई चर्चा

दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।कौशल प्रशिक्षण को रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने के उद्देश्य से समर्थ भारत–भाऊराव देवरस सेवा न्यास की ओर से 13 अक्टूबर को लखनऊ के गोमतीनगर स्थित विपुल खंड के स्टडी हॉल में प्रमाणपत्र वितरण समारोह आयोजित किया गया। इसमें आरएसीडब्ल्यू और फैशन डिजाइन के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूर्ण करने वाले प्रशिक्षुओं को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम में पूर्व प्रशिक्षुओं ने प्रशिक्षण से प्राप्त लाभों और रोजगार के माध्यम से आगे बढ़ने के अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर कौशल विकास को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुँचाने तथा प्रशिक्षण कार्यों में जनसहभागिता बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

समारोह में क्षेत्र सह प्रचार प्रमुख मनोज कांत, विभाग सेवा प्रमुख सुभाष अग्रवाल, भाऊराव देवरस सेवा न्यास के न्यासी जितेंद्र अग्रवाल, विश्व हिंदू परिषद के अधिकारी एवं पूर्व मंत्री डॉ. सरजीत सिंह डांग तथा प्रेरणा बालिका विद्यालय के प्रधानाचार्य देवेश कुमार श्रीवास्तव सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती वीणा आनंद ने की।

समर्थ भारत–भाऊराव देवरस सेवा न्यास की गतिविधियों से जुड़े लखनऊ के कार्यकर्ताओं में मनोज मिश्रा, सुरेंद्र सिंह, संजय राय, डॉ. अरुण द्विवेदी, मुकेश दीक्षित और श्रीमती गीता शंकर शामिल रहे। इसके अतिरिक्त गोमतीनगर के सह नगर कार्यवाह पवन, लखनऊ भाग के सुधाकर और नगर कार्यकारिणी सदस्य सत्यदेव सहित समाज के अनेक लोगों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम का शुभारंभ गायत्री मंत्र के साथ हुआ और समापन शांति मंत्र से किया गया। इस दौरान पूर्व प्रशिक्षुओं ने प्रशिक्षण से अर्जित कौशल, रोजगार की दिशा में मिल रहे अवसरों तथा प्रशिक्षण से उनके जीवन में आए बदलावों के बारे में जानकारी दी। इससे व्यावसायिक प्रशिक्षण की उपयोगिता और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में ऐसे प्रयासों की भूमिका पर प्रकाश पड़ा।
समारोह में समर्थ भारत–भाऊराव देवरस सेवा न्यास द्वारा संचालित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गतिविधियों पर भी विचार-विमर्श हुआ। डॉ. विवेक ने उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए प्रशिक्षण एवं सेवा कार्यों में सहयोग और सहभागिता का आह्वान किया। कार्यक्रम में कौशल विकास के माध्यम से रोजगारोन्मुखी क्षमता बढ़ाने और समाज के सहयोग से ऐसे प्रयासों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता रेखांकित हुई।