25 राजस्व न्यायालयों में 6 मई को 16,368 मामले लंबित थे; 23 सितंबर तक 17,331 नए वाद आए, फिर भी कुल लंबित संख्या 15,164 पर सिमटी — पुराने मामलों पर अब प्रशासन की सीधी निगाह
दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।मऊ में राजस्व न्यायालयों के सामने नए वादों का लगातार बढ़ता दबाव रहा, लेकिन इसी अवधि में निस्तारण की गति ने लंबित मामलों की प्रारंभिक संख्या को पीछे छोड़ दिया। 6 मई 2026 को जनपद के 25 राजस्व न्यायालयों में 16,368 वाद लंबित थे। 23 सितंबर तक 17,331 नए वाद दाखिल हुए और निस्तारण के लिए कुल 33,699 मामले उपलब्ध रहे। इनमें 18,535 वादों का निस्तारण हुआ। परिणामस्वरूप 23 सितंबर को लंबित वादों की संख्या 15,164 रह गई—यानी 6 मई की स्थिति की तुलना में 1,204 मामलों की शुद्ध कमी।
यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि निस्तारण के साथ-साथ न्यायालयों में नए वाद भी लगातार दाखिल होते रहे। ऐसे में कुल लंबित मामलों को कम करने के लिए केवल सुनवाई की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं था; निस्तारण को नए मामलों की आवक से आगे ले जाना भी जरूरी था। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार समग्र स्तर पर यही स्थिति बनी।
जिलाधिकारी आनंद वर्धन की निगरानी में राजस्व न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों को नियमित रूप से न्यायालय संचालित करने तथा पुराने और लंबित वादों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने विशेष रूप से पांच वर्ष और तीन वर्ष से अधिक पुराने मामलों के शीघ्र निस्तारण पर जोर दिया है।
जिलाधिकारी न्यायालय के आंकड़े इस दिशा में स्पष्ट बदलाव दिखाते हैं। 6 मई को 422 वाद लंबित थे। 197 नए वाद दाखिल होने के बीच 287 मामलों का निस्तारण हुआ। इससे प्रारंभिक लंबित मामलों में 90 की शुद्ध कमी हुई और 23 सितंबर को 332 वाद लंबित रहे।
मुख्य राजस्व अधिकारी न्यायालय में भी निस्तारण नए वादों की तुलना में अधिक रहा। यहां प्रारंभिक 813 लंबित मामलों के बीच 133 नए वाद दाखिल हुए और 226 का निस्तारण किया गया। परिणामस्वरूप लंबित मामलों में 93 की शुद्ध कमी दर्ज हुई और 720 वाद शेष रहे।
जनपद स्तरीय अपर उप जिलाधिकारी न्यायालय में 582 प्रारंभिक लंबित मामलों के मुकाबले 263 नए वाद आए और 385 का निस्तारण हुआ। यहां भी लंबित मामलों में 122 की शुद्ध कमी दर्ज हुई और 460 वाद शेष रहे।
हालांकि सभी न्यायालयों में स्थिति समान नहीं रही। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) न्यायालय में 530 प्रारंभिक लंबित मामलों के बीच 207 नए वाद दाखिल हुए, जबकि 100 का निस्तारण हुआ। परिणामस्वरूप 23 सितंबर को लंबित मामलों की संख्या 637 रही। यह आंकड़ा बताता है कि जनपद की समग्र प्रगति के साथ-साथ न्यायालयवार लंबित मामलों की अलग-अलग स्थिति पर भी निगरानी आवश्यक है।
अब प्रशासन के सामने अगली चुनौती शेष 15,164 लंबित वादों की है। खासतौर पर तीन और पांच वर्ष से अधिक पुराने मामलों का निस्तारण इस अभियान की अगली कसौटी होगा। निर्धारित समय-सीमा वाले मामलों को समय के भीतर निस्तारित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। समय-सीमा के बाद वाद लंबित मिलने पर संबंधित पीठासीन अधिकारी की जिम्मेदारी निर्धारित कर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
राजस्व वादों का समयबद्ध निस्तारण आमजन के लिए सीधे महत्व रखता है। भूमि और राजस्व संबंधी विवादों में लंबे समय तक सुनवाई चलने से पक्षकारों को बार-बार न्यायालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में लंबित मामलों की संख्या घटने के साथ यदि पुराने वादों का भी समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण होता है, तो इसका प्रभाव न्यायालयों के आंकड़ों से आगे आमजन की रोजमर्रा की प्रशासनिक परेशानी पर दिखाई देगा।
आंकड़ों में मऊ की राजस्व अदालतें
अवधि/न्यायालय | लंबित वाद | नए वाद | निस्तारित वाद | 23 सितंबर को लंबित वाद
सभी 25 राजस्व न्यायालय | 16,368 | 17,331 | 18,535 | 15,164
जिलाधिकारी न्यायालय | 422 | 197 | 287 | 332
अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) | 530 | 207 | 100 | 637
मुख्य राजस्व अधिकारी | 813 | 133 | 226 | 720
अपर उप जिलाधिकारी न्यायालय | 582 | 263 | 385 | 460
एक नजर में 25 — जनपद में राजस्व न्यायालय 16,368 — 6 मई को प्रारंभिक लंबित वाद 17,331 — 23 सितंबर तक नए दाखिल वाद 33,699 — अवधि में निस्तारण के लिए कुल वाद 18,535 — निस्तारित वाद 15,164 — 23 सितंबर को शेष लंबित वाद 1,204 — प्रारंभिक लंबित संख्या की तुलना में शुद्ध कमी 5 वर्ष से अधिक — विशेष प्राथमिकता वाले पुराने वाद 3 वर्ष से अधिक — शीघ्र निस्तारण के लिए चिन्हित वाद
प्रशासन का अगला लक्ष्य
“पुराने वादों का शीघ्र निस्तारण और समय-सीमा वाले मामलों में विलंब पर जवाबदेही।”