ब्रेकिंग न्यूज़
वारियर्स डिफेंस कॉलेज में संस्कृत सप्ताह के तहत विशेष आयोजन, छात्रों को प्राचीन ग्रंथों और भारतीय ज्ञान-परंपरा से जुड़ने का आह्वान | 2027 से पहले RLD का बड़ा सियासी दांव, ‘NDA 350 से कम सीटों पर नहीं रुकेगा’ | श्री कृष्ण जन्मभूमि पर न्याय की प्रतीक्षा—बंद लिफाफे में रिपोर्ट, 18 सितंबर को फिर होगी सुनवाई | संस्कृतभारती अवध प्रान्त के प्रयास से भारतीय डाक विभाग के उत्तर प्रदेश परिमंडल द्वारा विश्व संस्कृत सप्ताह का भव्य उद्घाटन विशेष कैंसिलेशन मोहर द्वारा सम्पन्न | कंक्रीट के जंगल में बृज लाल ने गौरैया के लिए बचाकर रखा अपना घर | पैगम्बर मोहम्मद साहब की जयंती पर सद्भावना का संदेश | श्रावण के अन्तिम पावन सोमवार पर रुद्राभिषेक, शिवमय हुआ वारियर्स डिफेंस कॉलेज परिसर | विश्व संस्कृत सप्ताह का शंखनाद, डाक टिकट पर लगेगी विशेष मोहर | वारियर्स डिफेंस कॉलेज में संस्कृत सप्ताह के तहत विशेष आयोजन, छात्रों को प्राचीन ग्रंथों और भारतीय ज्ञान-परंपरा से जुड़ने का आह्वान | 2027 से पहले RLD का बड़ा सियासी दांव, ‘NDA 350 से कम सीटों पर नहीं रुकेगा’ | श्री कृष्ण जन्मभूमि पर न्याय की प्रतीक्षा—बंद लिफाफे में रिपोर्ट, 18 सितंबर को फिर होगी सुनवाई | संस्कृतभारती अवध प्रान्त के प्रयास से भारतीय डाक विभाग के उत्तर प्रदेश परिमंडल द्वारा विश्व संस्कृत सप्ताह का भव्य उद्घाटन विशेष कैंसिलेशन मोहर द्वारा सम्पन्न | कंक्रीट के जंगल में बृज लाल ने गौरैया के लिए बचाकर रखा अपना घर | पैगम्बर मोहम्मद साहब की जयंती पर सद्भावना का संदेश | श्रावण के अन्तिम पावन सोमवार पर रुद्राभिषेक, शिवमय हुआ वारियर्स डिफेंस कॉलेज परिसर | विश्व संस्कृत सप्ताह का शंखनाद, डाक टिकट पर लगेगी विशेष मोहर |
हाइलाइट न्यूज़
15 दिसंबर तक बढ़ी छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की तिथि:समाज कल्याण विभाग श्री राम कथा में शिव विवाह, माता पार्वती का संवाद और गणेश जन्म की दिव्य महिमा तीन चरणों में होगी प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्यापकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया समर्पण वृद्ध आश्रम मे संवासियों हेतू चिकित्सीय व अन्य सुविधाओं के सम्बंध मे महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए - जे पी सिंह यूपी में आयुष्मान भारत योजना से हुआ पहला किडनी ट्रांसप्लांट संस्कृत चेतना से राष्ट्रबोध तक: लखनऊ में नौ दिवसीय संयुक्त प्रबोधन वर्ग का भव्य शुभारंभ जनपद के सभी मदरसों में किया गया झंडा गीत गायन विश्व सिंधी सेवा संगम का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सम्पन्न 15 दिसंबर तक बढ़ी छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की तिथि:समाज कल्याण विभाग श्री राम कथा में शिव विवाह, माता पार्वती का संवाद और गणेश जन्म की दिव्य महिमा तीन चरणों में होगी प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्यापकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया समर्पण वृद्ध आश्रम मे संवासियों हेतू चिकित्सीय व अन्य सुविधाओं के सम्बंध मे महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए - जे पी सिंह यूपी में आयुष्मान भारत योजना से हुआ पहला किडनी ट्रांसप्लांट संस्कृत चेतना से राष्ट्रबोध तक: लखनऊ में नौ दिवसीय संयुक्त प्रबोधन वर्ग का भव्य शुभारंभ जनपद के सभी मदरसों में किया गया झंडा गीत गायन विश्व सिंधी सेवा संगम का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सम्पन्न
Uncategorized English

श्रीकृष्ण का अमूल्य उपदेश: श्रीमद्भगवद्गीता और गुरु-परम्परा का महत्व

D

Dainik India News

4271 views
श्रीकृष्ण का अमूल्य उपदेश: श्रीमद्भगवद्गीता और गुरु-परम्परा का महत्व

दैनिक इंडिया न्यूज़ ,लखनऊ, 19 अगस्त 2024: राष्ट्रीय सनातन महासंघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता, आचार्य कृष्ण कुमार तिवारी ने हाल ही में एक बयान जारी किया जिसमें उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता में वर्णित गुरु-शिष्य परम्परा और उसके महत्व पर प्रकाश डाला। आचार्य तिवारी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया यह दिव्य ज्ञान कैसे प्राचीन काल से गुरु-शिष्य परम्परा के माध्यम से जीवित रहा है।

आचार्य तिवारी ने बताया, "भगवान श्रीकृष्ण ने गीता के चौथे अध्याय में कहा कि योग की यह परम्परा सबसे पहले सूर्यदेव को दी गई थी। इसके बाद यह ज्ञान मनु और फिर इक्ष्वाकु तक पहुंचा। इस प्रकार, यह ज्ञान गुरु-शिष्य परम्परा द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी संचारित होता रहा है।"

उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक 4.1 का हवाला देते हुए कहा:
"इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम्। विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत्॥"

आचार्य तिवारी ने समझाया कि समय के साथ यह दिव्य परम्परा लुप्तप्राय हो गई, जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में अर्जुन को पुनः प्रदान किया। उन्होंने गीता के श्लोक 4.2 का संदर्भ देते हुए कहा:

"एवं परम्पराप्राप्तमिमं राजर्षयो विदुः। स कालेनेह महता योगो नष्टः परंतप॥"

इसके बाद उन्होंने अर्जुन के लिए भगवान श्रीकृष्ण के इस विशेष उपदेश की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "श्रीकृष्ण ने अर्जुन को यह ज्ञान इसलिए प्रदान किया क्योंकि वह उनके भक्त और मित्र दोनों थे। गीता के श्लोक 4.3 में भगवान कहते हैं:

"स एवायं मया तेऽद्य योगः प्रोक्तः पुरातनः। भक्तोऽसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम्॥"

आचार्य तिवारी ने इस बात पर भी जोर दिया कि गीता का यह ज्ञान केवल भक्तों के लिए है और यह ज्ञान तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है: ज्ञानी, योगी, और भक्त या ध्यानी। उन्होंने कहा, "भगवान श्रीकृष्ण ने इस ज्ञान का आधार गुरु-शिष्य परम्परा को बनाया और अर्जुन को इसका प्रथम पात्र माना। यह ज्ञान समस्त मानवता के लिए अमूल्य धरोहर है, जिसे आत्मसात कर जीवन को उन्नत बनाया जा सकता है।"

फोटो गैलरी

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहले टिप्पणी करें!