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“युवा चेतना का महामंथन: श्रीमती इंदिरा गांधी महाविद्यालय में राष्ट्र निर्माण पर द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ”

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Dainik India News

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“युवा चेतना का महामंथन: श्रीमती इंदिरा गांधी महाविद्यालय में राष्ट्र निर्माण पर द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ”


दैनिक इंडिया न्यूज़, मधुबन। ज्ञान, शोध और नवोन्मेष की अक्षुण्ण परंपरा से अनुप्राणित भारतभूमि एक बार पुनः वैचारिक उद्भास का साक्षी बनी, जब श्रीमती इंदिरा गांधी महाविद्यालय में “युवा शक्ति, राष्ट्र निर्माण और भारत बोध: कल, आज एवं कल” विषय पर द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का गरिमामय शुभारंभ हुआ। समग्र वातावरण वैदिक मंगलाचार, बौद्धिक ऊर्जा और राष्ट्रीय चेतना के अद्भुत समन्वय से आलोकित प्रतीत हो रहा था। कार्यक्रम का प्रारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसने समूचे आयोजन को आध्यात्मिक ऊष्मा और सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की।
स्वागत भाषण में महाविद्यालय के प्रबंधक राष्ट्र कुंवर सिंह ने उपस्थित विद्वतजनों, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों का आत्मीय अभिनंदन करते हुए कहा कि युवा शक्ति राष्ट्र की वह जीवनदायिनी धारा है, जो देश के भविष्य को न केवल दिशा देती है, अपितु उसे सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने की आधारशिला भी रखती है। उनके उद्बोधन ने श्रोताओं के अंतर्मन में नवसंकल्प का संचार किया।


मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव श्री दुर्गा शंकर मिश्रा ने अपने ओजस्वी एवं विचारोत्तेजक उद्बोधन में युवा शक्ति की अनंत संभावनाओं का अत्यंत प्रभावपूर्ण निरूपण किया। उन्होंने कहा कि भारत सदैव ऋषियों, मुनियों एवं वैज्ञानिकों की तपोभूमि रहा है, जहाँ ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार की अविरल परंपरा ने विश्व को दिशा प्रदान की है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए स्पष्ट किया कि जिज्ञासा ही आत्म-विकास और राष्ट्रीय प्रगति का मूलाधार है। अपने अनुभवों का सजीव उल्लेख करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि असफलता से विचलित होने के स्थान पर उससे शिक्षाग्रहण कर आगे बढ़ना ही वास्तविक सफलता की कुंजी है। उनका यह कथन उपस्थित जनसमूह के लिए जीवन-सूत्र के समान प्रतीत हुआ।
जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे संवैधानिक साक्षरता को आत्मसात करें और राष्ट्र निर्माण के इस महायज्ञ में सक्रिय सहभागिता निभाएँ। उन्होंने संगोष्ठी के उद्देश्य को राष्ट्रवाद की भावना और संवैधानिक जागरूकता के संवर्धन से जोड़ते हुए इसे समय की अनिवार्य आवश्यकता बताया।
मुख्य वक्ता के रूप में आईआईटीएम पुणे के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. सुरेश तिवारी ने पर्यावरणीय संकट की गंभीरता पर गहन चिंतन प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्बन उत्सर्जन, वैश्विक तापवृद्धि और जलवायु परिवर्तन जैसे ज्वलंत विषयों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अत्यंत सरल एवं रोचक ढंग से प्रतिपादित किया। उनके द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों एवं विश्लेषण ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि मानवता ने समय रहते सतर्कता नहीं बरती, तो इसके परिणाम अत्यंत भयावह हो सकते हैं। उन्होंने वृक्षारोपण को पर्यावरणीय संतुलन का मूलाधार बताते हुए विद्यार्थियों से इसे जनांदोलन बनाने का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि आईआईटी दिल्ली के प्रो. जी.एन. तिवारी ने अपने उद्बोधन में जिज्ञासा को नवाचार का मूल प्रेरक तत्व बताते हुए कहा कि प्रश्न करने की प्रवृत्ति ही मनुष्य को असाधारण बनाती है। उन्होंने भारतीय ऋषि परंपरा का उल्लेख करते हुए बताया कि प्राचीन काल से ही ज्ञान की खोज और चिंतन की यह परंपरा आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी के रूप में विकसित होकर मानवता का पथ आलोकित कर रही है।
इसी क्रम में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर्स ट्रेनिंग के निदेशक प्रो. चंद्र चारु त्रिपाठी ने तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास को राष्ट्र की उन्नति का सुदृढ़ आधार बताते हुए युवाओं को आत्मनिर्भरता का संदेश दिया। उन्होंने भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों, विशेषतः चंद्रयान मिशन, का उल्लेख करते हुए इसे राष्ट्रीय गौरव और युवा सामर्थ्य का प्रतीक बताया। उनका यह उद्बोधन युवाओं के भीतर आत्मविश्वास और नवाचार की भावना को प्रज्वलित करने वाला सिद्ध हुआ।
वरिष्ठ पत्रकार संदीप शुक्ला ने अनुशासन और दृढ़ संकल्प को सफलता का मूल मंत्र बताते हुए विद्यार्थियों को लक्ष्य के प्रति एकाग्रचित्त रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि संयोजित विचार और सतत प्रयास ही व्यक्ति को शिखर तक पहुँचाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि दुर्गा शंकर मिश्रा ने अपने पिता सदन मिश्रा की स्मृति में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों पावनी मद्देशिया और राजकुमार को छात्रवृत्ति एवं स्वर्ण पदक प्रदान कर सम्मानित किया। वहीं प्रबंध निदेशक इंजीनियर प्रवीण कुंवर सिंह ने कांति सेवा संस्थान के अंतर्गत श्रेष्ठा परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं नेहा एवं प्रियंका को प्रोत्साहन राशि देकर उनका उत्साहवर्धन किया।
अंत में प्रबंध निदेशक इंजीनियर प्रवीण कुंवर सिंह ने हृदयस्पर्शी धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. यादवेन्द्र प्रताप सिंह ने किया।
इस अवसर पर अनेक गणमान्य व्यक्तियों एवं छात्र-छात्राओं की उल्लेखनीय उपस्थिति ने इस संगोष्ठी को न केवल सफल, बल्कि ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया। समूचा आयोजन युवा चेतना, बौद्धिक ऊर्जा और राष्ट्रनिर्माण के संकल्प का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा।

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