राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष ने विहिप के केंद्रीय मंत्री एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता से की मुलाकात; संत-धर्माचार्य संपर्क, धार्मिक स्थलों और काशी-मथुरा से जुड़े विषयों पर हुआ संवाद
दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।दिल्ली प्रवास के दौरान राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह और विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता अशोक तिवारी के बीच हुई शिष्टाचार भेंट ने सनातन परंपरा, संत-धर्माचार्य समाज और धार्मिक-सांस्कृतिक विषयों से जुड़े विमर्श को एक नया संदर्भ दिया। मुलाकात में दोनों पक्षों के बीच संगठनात्मक गतिविधियों, संत समाज से संवाद तथा धर्मस्थलों से जुड़े विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। विहिप की आधिकारिक वेबसाइट अशोक तिवारी को केंद्रीय मंत्री एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में सूचीबद्ध करती है, जबकि परिषद के आधिकारिक प्रकाशन में उन्हें धर्माचार्य संपर्क प्रमुख की भूमिका से भी संबद्ध किया गया है।
शिष्टाचार भेंट के दौरान जितेन्द्र प्रताप सिंह ने विश्व हिंदू परिषद द्वारा संतों और धर्माचार्यों के साथ किए जा रहे संवाद तथा संगठन के विभिन्न आयामों के संचालन के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने राष्ट्रीय सनातन महासंघ की गतिविधियों, उसके उद्देश्यों और सनातन परंपरा से जुड़े विषयों को लेकर संगठन की भूमिका से अशोक तिवारी को अवगत कराया। बातचीत का केंद्र केवल औपचारिक परिचय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक-सांस्कृतिक विषयों पर संगठनात्मक दृष्टिकोण साझा करने तक पहुंचा।
इस दौरान संत समाज और धर्माचार्यों के साथ निरंतर संपर्क तथा धार्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों पर व्यापक संवाद की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। जितेन्द्र प्रताप सिंह ने सनातन परंपरा से जुड़े धर्मस्थलों के संरक्षण और उनसे संबंधित विषयों के प्रति अपने संगठन की प्रतिबद्धता से अवगत कराया। उनके अनुसार ऐसे विषयों पर संतों, धर्माचार्यों और सामाजिक संगठनों के बीच संवाद महत्वपूर्ण है।
बातचीत के दौरान काशी और मथुरा सहित प्रमुख धार्मिक विषयों का भी उल्लेख हुआ। अशोक तिवारी ने इन विषयों से जुड़े विहिप के दृष्टिकोण और संगठन की गतिविधियों के संदर्भ में चर्चा की। विहिप के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी संत सम्मेलनों और धर्माचार्य संवाद के माध्यम से धार्मिक-सामाजिक विषयों पर विमर्श की परंपरा दर्ज है। प्रयागराज महाकुंभ के दौरान आयोजित विहिप के विराट संत सम्मेलन में अशोक तिवारी ने कार्यक्रम का संचालन किया था।
मुलाकात का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि धर्माचार्यों और संत समाज से जुड़े संवाद को संगठनात्मक गतिविधियों के साथ जोड़कर देखा गया। विहिप के आधिकारिक प्रकाशनों में संत सम्मेलनों को विभिन्न मत, पंथ और संप्रदायों के धर्माचार्यों के बीच संवाद के मंच के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इससे स्पष्ट है कि संत संपर्क परिषद की गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जितेन्द्र प्रताप सिंह ने परिषद द्वारा संचालित विभिन्न गतिविधियों के प्रति शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय सनातन महासंघ के भाव और उद्देश्यों को भी सामने रखा। दोनों के बीच हुई बातचीत में सनातन परंपरा, धर्मस्थलों और संत समाज से जुड़े विषयों को लेकर आगे भी संवाद की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
काशी, मथुरा और ज्ञानवापी जैसे विषय लंबे समय से धार्मिक तथा सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा रहे हैं। इस भेंट के दौरान इन विषयों का उल्लेख इसी व्यापक संदर्भ में हुआ। हालांकि उपलब्ध विवरण में किसी तत्काल निर्णय, नई घोषणा अथवा किसी निश्चित समयसीमा की जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए मुलाकात को मुख्यतः शिष्टाचार, विचार-विनिमय और संगठनात्मक संवाद के रूप में ही देखा जाना तथ्यपरक होगा।
राष्ट्रीय सनातन महासंघ की ओर से हुई इस मुलाकात ने यह भी रेखांकित किया कि सनातन परंपरा से जुड़े संगठनों के बीच संवाद का दायरा केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं है। संत समाज, धर्माचार्य, धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े मुद्दों पर विभिन्न संगठनों के बीच विचार-विमर्श लगातार जारी है।
दिल्ली में हुई यह भेंट इसी संवाद-परंपरा की एक कड़ी के रूप में सामने आई है। मुलाकात के दौरान किसी नए अभियान अथवा औपचारिक निर्णय की घोषणा नहीं हुई, लेकिन काशी, मथुरा और धर्मस्थलों से जुड़े विषयों का उल्लेख इसे सामान्य शिष्टाचार भेंट से आगे के व्यापक वैचारिक संवाद का संदर्भ देता है।