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संस्कृतभारतीन्यास और राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान मिलकर मनाएंगे संस्कृत सप्ताह

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Dainik India News

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संस्कृतभारतीन्यास और राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान मिलकर मनाएंगे संस्कृत सप्ताह

संस्थान में होगी 'संस्कृत वीथिका' की स्थापना,

चरक-सुश्रुत जैसे चिकित्सा पुरुषों के योगदान पर होगा विमर्श

छात्रों और चिकित्सकों को प्राचीन आयुर्वैदिक ज्ञान से जोड़ने का प्रयास

दैनिक इंडिया न्यूज़ ,लखनऊ। संस्कृत भाषा के संवर्धन और चिकित्सा क्षेत्र में उसके योगदान को रेखांकित करने के उद्देश्य से संस्कृतभारतीन्यास और डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान संयुक्त रूप से 6 अगस्त से 13 अगस्त 2025 तक संस्कृत सप्ताह का आयोजन करेंगे। इस कार्यक्रम के अंतर्गत 11 अगस्त को संस्थान परिसर में 'संस्कृत वीथिका' के माध्यम से आयुर्वेद और चिकित्सा क्षेत्र में संस्कृत भाषा के योगदान पर विशेष प्रकाश डाला जाएगा।

इस संदर्भ में संस्कृतभारती अवध प्रान्त के संपर्क प्रमुख जितेन्द्र प्रताप सिंह और क्षेत्रीय संगठन मंत्री प्रमोद पंडित ने संस्थान के निदेशक डॉ. सी. एम. सिंह से पूर्व निर्धारित समयानुसार शिष्टाचार भेंट की। बैठक में कार्यक्रम के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई और चिकित्सा के विद्यार्थियों को संस्कृत के माध्यम से आयुर्वेदिक ज्ञान से जोड़ने की संभावनाओं पर बल दिया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों और विशेषज्ञ चिकित्सकों को उन महान चिकित्सा पुरुषों की परंपरा से परिचित कराना है, जिन्होंने आयुर्वेद और योग को समृद्ध किया। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित विद्वानों का योगदान उल्लेखनीय है:

चरक – आयुर्वेद के प्रमुख ग्रंथ 'चरक संहिता' के रचयिता, जिनका योगदान आयुर्वेद की मूल अवधारणाओं और चिकित्सा पद्धतियों को स्थापित करने में महत्वपूर्ण रहा।

सुश्रुत – शल्य चिकित्सा (सर्जरी) के जनक, जिनकी कृति 'सुश्रुत संहिता' में शल्य चिकित्सा, उपकरणों और प्रक्रियाओं का वैज्ञानिक विवरण मिलता है।

वाग्भट – जिन्होंने 'अष्टांग हृदय' जैसे ग्रंथों के माध्यम से आयुर्वेद को आठ शाखाओं में विभाजित कर समग्र दृष्टिकोण प्रदान किया।

पतंजलि – योग के सूत्रकार, जिनका योगदान केवल योग तक सीमित न रहकर चिकित्सा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय रहा है, विशेषतः मन-तन संतुलन के माध्यम से स्वास्थ्य की अवधारणा में।

संस्कृत वीथिका के माध्यम से इन मनीषियों के योगदान को दृश्य और शाब्दिक माध्यमों से प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे चिकित्सा क्षेत्र के विद्यार्थी एवं शिक्षक प्राचीन चिकित्सा परंपराओं से प्रेरणा ले सकें।

इस अवसर पर संस्कृतभारतीन्यास के अध्यक्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह ने निदेशक डॉ. सी. एम. सिंह को विस्तृत विचार-विमर्श एवं सकारात्मक निर्णय के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। साथ ही, उन्होंने क्षेत्रीय संगठन मंत्री प्रमोद पंडित का भी विषय को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने और सहयोग हेतु आभार व्यक्त किया।

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