आयुक्त विजय विश्वास पन्त बोले—श्रीराम और श्रीरामचरितमानस आज भी सामाजिक एवं पारिवारिक मूल्यों के अनुपम आदर्श। राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अध्यक्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा—श्रीराम जीवन-पद्धति के सर्वश्रेष्ठ प्रतिमान, रामलीला नई पीढ़ी में संस्कृति और संस्कारों के प्रतिष्ठापन का सशक्त माध्यम।

दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ। श्रीराम का चरित्र केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारतीय समाज की नैतिक चेतना, पारिवारिक मर्यादा और सांस्कृतिक निरंतरता का ऐसा शाश्वत प्रतिमान है, जिसकी प्रासंगिकता आधुनिक युग में भी अक्षुण्ण बनी हुई है। इसी जीवन-दृष्टि को जनमानस तक पहुँचाने की सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए महानगर रामलीला समिति ने अपने ऐतिहासिक 61वें रामलीला मंचन समारोह के माध्यम से श्रीरामचरितमानस के आदर्शों को जीवंत किया। समारोह में मुख्य अतिथि लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पन्त ने श्रीराम और श्रीरामचरितमानस को सामाजिक एवं पारिवारिक मूल्यों का अनुपम उदाहरण बताया, जबकि विशिष्ट अतिथि एवं राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अध्यक्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह ने श्रीराम को श्रेष्ठ जीवन-पद्धति का प्रतिमान निरूपित करते हुए रामलीला को नई पीढ़ी में भारतीय संस्कृति और संस्कारों के संवर्धन का सर्वोत्तम माध्यम बताया।


समारोह का शुभारंभ आयुक्त विजय विश्वास पन्त और जितेन्द्र प्रताप सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा प्रभु श्रीराम के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करके किया। इस अवसर पर दोनों अतिथियों ने समिति के अध्यक्ष ललित मोहन जोशी को 61वें मंचन के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएँ दीं। समिति के पदाधिकारियों ने अतिथियों को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और स्मृति-चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। मंचन के दौरान उपस्थित विशाल दर्शकसमूह ने रामकथा की प्रस्तुति का अवलोकन किया और उसके सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक भावबोध से जुड़ाव प्रदर्शित किया।

जितेन्द्र प्रताप सिंह ने रामलीला की सांस्कृतिक भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन आदर्शों, कर्तव्यनिष्ठा, त्याग, मर्यादा और उत्तरदायित्व का समन्वित स्वरूप है। उनके अनुसार, रामलीला का मंचन केवल पौराणिक प्रसंगों की नाटकीय प्रस्तुति नहीं, बल्कि नई पीढ़ी तक भारतीय जीवन-मूल्यों को पहुँचाने और उन्हें व्यवहार में प्रतिष्ठित करने का प्रभावी माध्यम है। महानगर रामलीला समिति का निरंतर आयोजन इसी सांस्कृतिक दायित्व की अभिव्यक्ति है, जो बदलते समय में भी श्रीरामचरितमानस की शिक्षाओं को जनमानस से जोड़े रखने का प्रयास कर रहा है।