उद्यमिता योजनाओं के लिए अलग आयोग, हर जिले में ‘स्वदेशी मेला’, उद्योग बंधु में स्थानीय उद्यमियों की भागीदारी और सरकारी खरीद में स्वदेशी उत्पाद अनिवार्य करने की मांग

दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।उत्तर प्रदेश में स्वदेशी उत्पादन, युवा उद्यमिता और रोजगार को एक संगठित नीति-तंत्र से जोड़ने की दिशा में स्वदेशी जागरण मंच ने प्रदेश सरकार के सामने पांच सूत्रीय प्रस्ताव रखकर आर्थिक व्यवस्था में स्थानीय उद्यमों की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करने की मांग की है। मंच ने विभिन्न विभागों में बिखरी उद्यमिता योजनाओं के समन्वय के लिए उत्तर प्रदेश उद्यमिता आयोग अथवा उद्यमिता परिषद गठित करने, ओडीओपी मेलों को ‘स्वदेशी मेला’ या ‘स्वदेशी महोत्सव’ के रूप में आयोजित करने तथा सरकारी विभागों में स्वदेशी उत्पादों की खरीद अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा है। इन मांगों के केंद्र में एक बड़ा सवाल है—क्या स्थानीय उत्पादन और युवा उद्यमिता को योजनाओं से निकालकर प्रदेश की आर्थिक शक्ति का स्थायी आधार बनाया जा सकता है?
स्वदेशी जागरण मंच ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के मंत्री भूपेन्द्र चौधरी के समक्ष रखे प्रस्ताव में कहा है कि प्रदेश सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा उद्यमिता विकास एवं रोजगार के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन इनके बीच प्रभावी समन्वय के लिए एक संस्थागत व्यवस्था आवश्यक है। मंच के अनुसार प्रस्तावित उद्यमिता आयोग या परिषद विभिन्न विभागों की योजनाओं की निगरानी, समन्वय और व्यापक क्रियान्वयन का दायित्व संभाल सकता है। लक्ष्य यह है कि उद्यमिता को केवल सरकारी योजना का विषय न रखकर उसे जमीनी आर्थिक गतिविधि में बदला जाए।
मंच ने ओडीओपी की मौजूदा व्यवस्था को भी स्वदेशी उत्पादन के व्यापक मंच में बदलने का सुझाव दिया है। प्रत्येक जनपद में आयोजित होने वाले ओडीओपी मेले का नाम ‘स्वदेशी मेला’ अथवा ‘स्वदेशी महोत्सव’ रखने और उसमें जिले में निर्मित छोटे-बड़े सभी स्थानीय उत्पादों के स्टॉल शामिल करने की मांग की गई है। इसके साथ ही मेले की संचालन समिति में स्वदेशी जागरण मंच सहित विचार परिवार के अन्य संगठनों के कार्यकर्ताओं को भी शामिल करने का प्रस्ताव है। सवाल केवल मेले के नाम का नहीं, बल्कि स्थानीय उत्पादों को बाजार, पहचान और उपभोक्ता तक पहुंचाने के तंत्र का है।
उद्योग बंधु की जिला स्तरीय बैठकों को लेकर भी मंच ने अपनी भूमिका स्पष्ट करने की मांग की है। प्रस्ताव में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के अधिकांश जनपदों में स्वदेशी जागरण मंच से जुड़े उद्यमी मौजूद हैं, इसलिए जिला स्तर पर आयोजित उद्योग बंधु की बैठकों में स्थानीय स्तर पर मंच से जुड़े उद्यमियों को भी सम्मिलित किया जाए। इससे स्थानीय उद्योगों से जुड़े विषयों और समस्याओं को प्रशासनिक स्तर पर सामने रखने के लिए एक अतिरिक्त मंच उपलब्ध हो सकेगा।
सरकारी खरीद को स्वदेशी उत्पादन से जोड़ना प्रस्ताव का एक और महत्वपूर्ण पक्ष है। मंच ने सरकार के सभी विभागों में स्वदेशी उत्पादों की खरीद अनिवार्य किए जाने की मांग की है। यदि ऐसी व्यवस्था लागू होती है तो सरकारी खरीद स्थानीय उत्पादकों और उद्यमियों के लिए बड़ा बाजार उपलब्ध कराने का माध्यम बन सकती है। इसी क्रम में मंच ने युवाओं के नए उद्यम शुरू करने के लिए जिला स्तर पर ऐसी व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया है, जहां विभिन्न विभागों से जुड़ी समस्याओं का समाधान एक ही पटल पर किया जा सके।
स्वदेशी जागरण मंच ने इन प्रस्तावों के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 23 जुलाई 2024 के केंद्रीय बजट संबंधी वीडियो संदेश का उल्लेख किया है। मंच के अनुसार उस संदेश में प्रत्येक नगर, गांव और घर में उद्यमिता के सृजन तथा स्वदेशी के विचार को घर-घर तक पहुंचाने की बात कही गई थी। इसी दृष्टिकोण को उत्तर प्रदेश में उद्यमिता, स्वदेशी और स्वावलंबन से जोड़ते हुए मंच ने राज्य स्तर पर संस्थागत पहल की आवश्यकता रेखांकित की है।
बैठक में अनुपम श्रीवास्तव, क्षेत्र संयोजक, पूर्वी उत्तर प्रदेश; अमितेश अमित, क्षेत्र संयोजक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश; रणवीर सिंह, प्रांत सह संयोजक, कानपुर प्रांत; अमृतेश कुमार मृत्युंजय, प्रांत विचार विभाग प्रमुख, अवध प्रांत तथा प्रशान्त भाटिया, विशेष संपर्क प्रमुख, अवध प्रांत उपस्थित रहे। मंच की ओर से डॉ. विजय कुमार सिंह, सदस्य, अखिल भारतीय प्रचार टोली सहित पदाधिकारियों ने प्रस्ताव से जुड़े विषय रखे।
स्वदेशी जागरण मंच के इन प्रस्तावों में उद्यमिता को रोजगार से, स्थानीय उत्पादन को बाजार से और सरकारी खरीद को स्वदेशी उत्पादों से जोड़ने की एक समन्वित तस्वीर सामने आती है। अब निगाह सरकार की अगली पहल पर है कि इन सुझावों में से किन प्रस्तावों को नीतिगत स्वरूप मिलता है और उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में स्थानीय उद्यमिता को संस्थागत आधार देने की दिशा में कितनी दूर तक कदम बढ़ता है।