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“राष्ट्र प्रथम” के उद्घोष से गोरखपुर हुआ गुंजायमान: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा स्थापना दिवस पर इतिहास, विचार और भविष्य का विराट खाका रखा

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Dainik India News

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“राष्ट्र प्रथम” के उद्घोष से गोरखपुर हुआ गुंजायमान: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा स्थापना दिवस पर इतिहास, विचार और भविष्य का विराट खाका रखा

दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ, 06 अप्रैल 2026।गोरखपुर की पावन धरती पर आज ऐसा दृश्य उपस्थित हुआ, जहां केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद की चेतना, संगठन की शक्ति और विचारधारा की जीवंत धारा एक साथ प्रवाहित होती दिखी। योगी आदित्यनाथ ने भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में जब मंच संभाला, तो उनके शब्दों ने न केवल उपस्थित जनसमूह को उद्वेलित किया, बल्कि हर कार्यकर्ता के भीतर एक नई ऊर्जा, एक नया संकल्प और एक गहरा आत्मविश्वास भर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत पार्टी ध्वज फहराने, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के सम्मान और पदाधिकारियों के साथ आत्मीय क्षणों से हुई, लेकिन यह तो बस एक भूमिका थी—असल कथा तो मुख्यमंत्री के ओजस्वी विचारों से प्रारंभ हुई।

मुख्यमंत्री ने अपने उद्बोधन की शुरुआत उस ऐतिहासिक संघर्ष से की, जिसने भारतीय राजनीति को नई दिशा दी। उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अद्वितीय बलिदान को स्मरण करते हुए कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का त्याग नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की रक्षा का महान संकल्प था। “एक देश में दो प्रधान, दो निशान, दो विधान नहीं चलेंगे”—यह उद्घोष आज भी हर राष्ट्रभक्त के हृदय में गूंजता है। मुख्यमंत्री के इन शब्दों ने सभा में बैठे प्रत्येक व्यक्ति को इतिहास के उस निर्णायक क्षण से जोड़ दिया, जहां राष्ट्र की एकता के लिए सर्वस्व अर्पण कर दिया गया।

इतिहास से वर्तमान की ओर बढ़ते हुए मुख्यमंत्री ने विचारधारा के उस मूल तत्व को रेखांकित किया, जिसे पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने ‘अंत्योदय’ के रूप में स्थापित किया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक दर्शन नहीं, बल्कि शासन की आत्मा है—एक ऐसी व्यवस्था, जहां समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति भी विकास की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक स्थान प्राप्त करता है। आज जब सरकार की योजनाएं गांव-गांव और घर-घर तक पहुंच रही हैं, तो यह उसी अंत्योदय की सजीव अभिव्यक्ति है।

सभा का वातावरण और अधिक भावपूर्ण हो गया जब मुख्यमंत्री ने अटल बिहारी वाजपेयी के युग को याद किया। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी अटल जी ने न केवल सरकार चलाई, बल्कि राजनीति को गरिमा, स्थिरता और नैतिकता का आधार प्रदान किया। उनके नेतृत्व में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी पहचान को सुदृढ़ किया और यह सिद्ध किया कि मूल्य आधारित राजनीति भी सफल हो सकती है।

इसके बाद मुख्यमंत्री ने वर्तमान समय की उपलब्धियों को एक सशक्त कथा के रूप में प्रस्तुत किया। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को उन्होंने “नवभारत का शिल्पकार” बताते हुए कहा कि आज देश में जो परिवर्तन दिखाई दे रहा है, वह केवल योजनाओं का विस्तार नहीं, बल्कि एक नई सोच का परिणाम है। हर गरीब को राशन, हर परिवार को आवास, हर घर में उजाला, हर नागरिक को स्वास्थ्य सुरक्षा—ये सब केवल वादे नहीं, बल्कि धरातल पर उतरी हुई सच्चाई हैं। आयुष्मान भारत से लेकर उज्ज्वला योजना तक, हर पहल ने करोड़ों लोगों के जीवन को स्पर्श किया है।
मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों पर प्रहार करते हुए कहा कि आजादी के बाद देश को विभाजनकारी सोच में उलझाने का प्रयास किया गया, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा राष्ट्र को सर्वोपरि रखा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कश्मीर से धारा 370 का हटना केवल संवैधानिक परिवर्तन नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा को पुनः स्थापित करने का ऐतिहासिक क्षण है।

राम मंदिर का उल्लेख आते ही सभा में उत्साह का ज्वार उमड़ पड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षों से प्रतीक्षित अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर आज राष्ट्र की आस्था और संकल्प का प्रतीक बनकर खड़ा है। यह केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि उस विश्वास का प्रमाण है कि जब संकल्प अडिग हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।

मुख्यमंत्री ने संगठन की शक्ति पर विशेष बल देते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक विचार परिवार है, जिसकी जड़ें जनसंघ से लेकर आज तक राष्ट्रभक्ति की मिट्टी में गहराई तक समाई हुई हैं। उन्होंने कहा कि “व्यक्ति नहीं, संगठन सर्वोपरि है और संगठन से भी ऊपर राष्ट्र”—यही भाजपा की मूल आत्मा है।

अपने संबोधन के अंतिम चरण में मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं को आगामी कार्यक्रमों के लिए तैयार करते हुए स्थापना दिवस से लेकर डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती तक चलने वाले अभियानों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और न्याय की दिशा में एक व्यापक जनआंदोलन है। 13 अप्रैल को स्वच्छता अभियान और 14 अप्रैल को भव्य पुष्पांजलि कार्यक्रम के माध्यम से बाबा साहब के विचारों को जनमानस तक पहुंचाया जाएगा।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि प्रदेश में स्थापित बाबा साहब की प्रतिमाओं पर छत्र लगाए जाएंगे और पार्कों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। साथ ही संत रविदास और महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमाओं के आसपास भी विकास कार्य कराए जाएंगे, जिससे सामाजिक सम्मान और सांस्कृतिक गौरव को नई ऊंचाई मिलेगी।

कार्यक्रम के समापन के साथ ही गोरखपुर से एक स्पष्ट संदेश पूरे प्रदेश में गूंज उठा—यह यात्रा केवल अतीत की उपलब्धियों का बखान नहीं, बल्कि भविष्य के भारत का संकल्प है। यह वह पुकार है, जो हर कार्यकर्ता को अपने भीतर झांकने, अपने दायित्व को समझने और राष्ट्र निर्माण के इस महायज्ञ में पूर्ण समर्पण के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है।

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