
दिव्य प्रेम सेवा मिशन के आयोजन में उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक व प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह समेत कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक,धार्मिक क्षेत्र के लोग शामिल; 22 से 28 अक्टूबर तक सनसिटी में होगा महानाट्य का मंचन


दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।गाजियाबाद में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित महानाट्य ‘जाणता राजा’ के मंचन की तैयारियों ने अब औपचारिक रूप ले लिया है। दिव्य प्रेम सेवा मिशन द्वारा आयोजित इस नाट्य प्रस्तुति के लिए भूमि पूजन कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक,भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह ,महंत नारायण गिरि, दिव्य प्रेम सेवा मिशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गौतम, कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. संजय चतुर्वेदी, सांसद अतुल गर्ग, विधायक संजीव शर्मा, विधायक अजीत पाल त्यागी,जितेन्द्र प्रताप सिंह अध्यक्ष राष्ट्रीय सनातन महासंघ लखनऊ तथा अन्य जनप्रतिनिधि और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग उपस्थित रहे। आयोजन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार ‘जाणता राजा’ का मंचन 22 से 28 अक्टूबर 2026 तक गाजियाबाद के सनसिटी में सात शामों के दौरान प्रस्तावित है।

भूमिपूजन के अवसर पर राष्ट्रीय सनातन महासंघ, लखनऊ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह ने आयोजन समिति के संयोजक दीपक शर्मा के आमंत्रण पर कार्यक्रम में सहभागिता की और हवन में आहुति दी। उन्होंने निर्धारित तिथियों में होने वाले महानाट्य के मंचन के लिए आयोजन समिति को शुभकामनाएं दीं तथा आमंत्रण के लिए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति के साथ आयोजन की सामाजिक और सांस्कृतिक सहभागिता का दायरा भी सामने आया।

‘जाणता राजा’ का मूल कथ्य छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, संघर्ष, नेतृत्व और हिंदवी स्वराज्य की अवधारणा से जुड़ा है। आयोजन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह प्रस्तुति बड़े खुले मंच पर शिवाजी महाराज के जीवन और उनके कालखंड को रंगमंचीय स्वरूप में प्रस्तुत करने के लिए तैयार की जा रही है। आयोजकों के अनुसार इसमें बड़ी संख्या में कलाकारों के साथ घोड़े, हाथी और ऐतिहासिक परिवेश को मंचीय संरचना का हिस्सा बनाया जाएगा।

गाजियाबाद में होने वाली यह प्रस्तुति अचानक सामने आया आयोजन नहीं है। पिछले कुछ महीनों से इसके लिए क्षेत्र में तैयारियां और संपर्क कार्यक्रम चल रहे हैं। अगस्त में गाजियाबाद के श्री दूधेश्वर नाथ महादेव मंदिर में आयोजन की कार्ययोजना को लेकर बैठक भी हुई थी, जिसमें 22 से 28 अक्टूबर के बीच सनसिटी में मंचन की तैयारियों पर चर्चा की गई थी।


भूमिपूजन कार्यक्रम में शिवाजी महाराज के जीवन और उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। आयोजन से जुड़े वक्तव्य में साहस, दूरदृष्टि, स्वराज्य और नेतृत्व जैसे प्रसंगों को शिवाजी के जीवन से जोड़ते हुए इस नाट्य प्रस्तुति को इतिहास और रंगमंच के बीच संवाद स्थापित करने के प्रयास के रूप में रखा गया।

दिव्य प्रेम सेवा मिशन की ओर से ‘जाणता राजा’ को केवल रंगमंचीय प्रस्तुति के बजाय सेवा और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है। मिशन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार संस्था स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक समरसता और राहत कार्यों से जुड़े सेवा-प्रकल्पों पर भी काम करती है और इसी व्यापक पृष्ठभूमि में ‘जाणता राजा’ का आयोजन किया जा रहा है।

आयोजन की तैयारियों का विस्तार गाजियाबाद से बाहर भी दिखाई दे रहा है। हाल के सप्ताहों में नोएडा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रबुद्ध सम्मेलनों, संवाद कार्यक्रमों और संपर्क अभियानों के माध्यम से लोगों को आयोजन से जोड़ने की गतिविधियां सामने आई हैं। एक हालिया बैठक में 22 से 28 अक्टूबर तक सनसिटी में होने वाले महानाट्य की तैयारियों पर चर्चा किए जाने की जानकारी भी सार्वजनिक हुई है।

भूमिपूजन के दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सूची भी आयोजन के स्वरूप को रेखांकित करती है। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, महंत नारायण गिरि, डॉ. आशीष गौतम, डॉ. संजय चतुर्वेदी, सांसद अतुल गर्ग, गाजियाबाद महानगर भाजपा अध्यक्ष मयंक गोयल, विधायक संजीव शर्मा, विधायक अजीत पाल त्यागी तथा आयोजन समिति से जुड़े पदाधिकारियों के साथ राष्ट्रीय सनातन महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह की सहभागिता रही।

अब निगाहें 22 अक्टूबर पर टिक गई हैं, जब सनसिटी में प्रस्तावित सात दिवसीय मंचन की शुरुआत होगी। आधिकारिक कार्यक्रम विवरण के अनुसार 22 से 28 अक्टूबर तक प्रतिदिन प्रस्तुति निर्धारित है और आयोजन स्थल पर प्रतिदिन लगभग 5,000 दर्शकों के बैठने की क्षमता बताई गई है।

भूमिपूजन के साथ जिस मंचीय यात्रा का आरंभ हुआ है, उसका अगला पड़ाव सनसिटी का विशाल रंगमंच होगा—जहां इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय को संवाद, अभिनय, दृश्य-संरचना और संगीत के माध्यम से दर्शकों के सामने प्रस्तुत करने की तैयारी है। ‘जाणता राजा’ के माध्यम से शिवाजी महाराज के जीवन और उनके समय को किस तरह रंगमंचीय भाषा में रूपांतरित किया जाता है, यही अब इस आयोजन की सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक्षा बन गई है।
