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विक्रम संवत्सर नववर्ष की पूर्वसंध्या पर लखनऊ में दिव्य सांस्कृतिक अनुष्ठानों का विराट आयोजन—दीपाग्नि की ज्योति में प्रकट हुआ सनातन चेतना और राष्ट्रधर्म का महाउद्भव

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विक्रम संवत्सर नववर्ष की पूर्वसंध्या पर लखनऊ में दिव्य सांस्कृतिक अनुष्ठानों का विराट आयोजन—दीपाग्नि की ज्योति में प्रकट हुआ सनातन चेतना और राष्ट्रधर्म का महाउद्भव

दैनिक इंडिया न्यूज़ 18 मार्च 2026 लखनऊ। प्रदेश की राजधानी लखनऊ की वह संध्या साधारण नहीं थी; वह मानो कालचक्र के प्रवाह में एक ऐसे दिव्य क्षण का साक्षात्कार कर रही थी, जहाँ अतीत की तपश्चर्या, वर्तमान की चेतना और भविष्य की दिशा एक साथ आलोकित हो उठी। विक्रम संवत्सर नववर्ष की पावन पूर्वसंध्या पर राजेंद्र अग्रवाल, अभिषेक खरे और अखिल विश्व गायत्री परिवार लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में
संपन्न यह महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, अपितु भारतीय आत्मा के पुनरुत्थान का प्रखर उद्घोष सिद्ध हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ परमपूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य एवं वंदनीय माता भगवती देवी शर्मा के सूक्ष्म सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चारों की अनुगूंज के मध्य हुआ। जैसे ही दीपाग्नि प्रज्वलित हुई, वह केवल प्रकाश का उदय नहीं था—वह युगऋषि द्वारा संपन्न चौबीस महापुरश्चरणों की तपशक्ति का पुनः सजीव संचार था। उस क्षण उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति ने अनुभव किया कि यह दीप केवल अंधकार का निवारण नहीं कर रहा, बल्कि आत्मा के गहनतम कोनों में छिपे आलोक को जागृत कर रहा है।


ज्यों-ज्यों दीपाग्नि की ज्वाला प्रखर होती गई, त्यों-त्यों वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रसार होता गया। तत्पश्चात धनुष यज्ञ का आयोजन हुआ, जिसने धर्म, मर्यादा, शौर्य और संकल्प की सनातन परंपरा को पुनः जीवंत कर दिया। उस क्षण में उपस्थित जनसमूह केवल साक्षी नहीं रहा, बल्कि स्वयं उस परंपरा का सहभागी बन गया।

और फिर वह क्षण आया, जिसने इस आयोजन को अलौकिकता के चरम पर प्रतिष्ठित कर दिया—सहस्रों मशालों का एक साथ प्रज्वलन। अंधकार को चीरती अग्निशिखाएं मानो यह उद्घोष कर रही थीं कि अब समय है जागरण का, अब समय है संकल्प का। प्रत्येक मशाल एक विचार बन चुकी थी, प्रत्येक ज्योति एक चेतना का वाहक बन गई थी।

मशालों की उस दैदीप्यमान आभा के पश्चात दीप यज्ञ का सामूहिक आयोजन हुआ, जिसने वातावरण को और अधिक चेतनामय एवं दिव्य बना दिया। सहस्रों दीपों की संयुक्त ज्योति ने यह अनुभूति कराई कि जब समाज एक साथ प्रकाश की ओर अग्रसर होता है, तब अंधकार का अस्तित्व स्वतः समाप्त हो जाता है। यह केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मपरिष्कार और लोकमंगल का एक जीवंत संदेश था।

इसी आध्यात्मिक उत्कर्ष के मध्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक स्वांतरंजन जी का उद्बोधन प्रारंभ हुआ। उनके शब्दों में केवल विचार नहीं, बल्कि एक दिशा थी—उन्होंने स्पष्ट कहा कि नव संवत्सर केवल तिथि परिवर्तन नहीं, बल्कि आत्मजागरण का अवसर है। यदि यह नववर्ष हमारे भीतर कोई नवीनता, कोई अनुशासन, कोई राष्ट्रभावना उत्पन्न नहीं करता, तो उसका उत्सव अधूरा है।

उन्होंने राष्ट्रवासियों से आह्वान किया कि वे इस नववर्ष को आत्ममंथन, आत्मसंयम और राष्ट्रसमर्पण के रूप में मनाएं। उनके उद्बोधन में गायत्री परिवार की साधना और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राष्ट्रनिष्ठा का ऐसा समन्वय था, जिसने इस आयोजन को एक नई ऊंचाई प्रदान कर दी—जहाँ साधना, सेवा और राष्ट्रधर्म एक ही सूत्र में पिरोए हुए प्रतीत हो रहे थे।


इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने भी अपने शुभकामना संदेश में कहा कि विक्रम संवत्सर केवल भारतीय परंपरा का प्रतीक नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना का आधार है। उन्होंने प्रदेशवासियों को नववर्ष की मंगलकामनाएं देते हुए कहा कि “यह नव संवत्सर हम सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, आरोग्य एवं सद्भाव का नवप्रकाश लेकर आए। गायत्री परिवार द्वारा इस प्रकार के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।”


वहीं लखनऊ से वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. नीरज सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि “नव संवत्सर भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जो हमें हमारी जड़ों से जोड़ता है। गायत्री परिवार द्वारा आयोजित यह भव्य कार्यक्रम केवल उत्सव नहीं, बल्कि समाज को जागृत करने का एक सशक्त माध्यम है। मैं समस्त प्रदेशवासियों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ और कामना करता हूँ कि यह वर्ष हम सभी के जीवन में नई ऊर्जा, नई दिशा और नई चेतना लेकर आए।”
इस भव्य आयोजन में राष्ट्रीय सनातन महासंघ के सदस्य गण भी भारी संख्या में उपस्थित रहे, जिनकी सक्रिय सहभागिता ने आयोजन को व्यापक सामाजिक स्वरूप प्रदान किया। उनकी उपस्थिति ने यह स्पष्ट किया कि सनातन चेतना के इस महायज्ञ में समाज का प्रत्येक वर्ग सहभागी बनने को तत्पर है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक स्वांतरंजन जी की गरिमामयी उपस्थिति के साथ उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, भाजपा के वरिष्ठ युवा सम्राट नेता डॉ. नीरज सिंह, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी संतोष सिंह, पूर्व महापौर संयुक्ता भाटिया,महानगर पूर्व अध्यक्ष एवं एमएलसी मुकेश शर्मा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लखनऊ के विभाग प्रचारक अनिल जी, भाजपा के वरिष्ठ नेता रमेश तुफानी तथा लखनऊ सहित समस्त प्रदेश से पधारे अनेक गणमान्य व्यक्तित्व अत्यंत उत्साह एवं गरमजोशी के साथ उपस्थित रहे। (यहाँ अन्य नाम जोड़े जा सकते हैं।)
समापन की ओर बढ़ते इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक चेतना का उदय है। यह वह क्षण था, जब प्रत्येक हृदय में एक दीप प्रज्वलित हो चुका था—एक ऐसा दीप, जो केवल स्वयं को नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र को आलोकित करने का संकल्प लिए हुए था।

अंततः यह आयोजन एक अमिट संदेश देकर गया—जब दीपाग्नि प्रज्वलित होती है, तो वह केवल अंधकार को दूर नहीं करती, बल्कि एक नए युग के उदय का मार्ग प्रशस्त करती है। यही नव संवत्सर का सार है—एक नवीन आरंभ, एक नवीन संकल्प और एक जागृत, सशक्त भारत की ओर अग्रसरता।

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