अतिवृष्टि, बाढ़, ओलावृष्टि और चक्रवात से बर्बाद हुई फसलों की भरपाई के लिए डीबीटी से हस्तांतरित हुई धनराशि; मुख्यमंत्री बोले—आपदा की घड़ी में किसानों और प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है सरकार। फसल क्षति के साथ मकान और पशुधन के नुकसान पर भी सहायता का दावा।

दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।प्राकृतिक आपदाओं की मार से खेती-किसानी की अर्थव्यवस्था को लगे झटके के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रभावित किसानों तक आर्थिक सहायता पहुंचाने की पहल की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश के 9,18,091 किसानों के बैंक खातों में 493 करोड़ रुपये की कृषि निवेश अनुदान राशि सीधे अंतरित की। अतिवृष्टि, बाढ़, ओलावृष्टि और चक्रवात से फसलें गंवाने वाले किसानों के लिए यह सहायता ऐसे समय में दी गई है, जब खेती को दोबारा पटरी पर लाने के लिए बीज, उर्वरक और अन्य कृषि निवेशों की उपलब्धता सबसे बड़ी जरूरत बन जाती है। सरकार का कहना है कि क्षतिपूर्ति की प्रक्रिया में तेजी लाकर प्रभावित परिवारों पर पड़े आर्थिक बोझ को यथासंभव कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में हाल के दिनों में हुई प्राकृतिक आपदाओं ने बड़े पैमाने पर फसलों को नुकसान पहुंचाया है। कई स्थानों पर जनहानि और पशुधन की क्षति भी हुई है। ऐसे हालात में प्रभावित किसानों को आपदा राहत कोष से आठ से दस दिनों के भीतर मुआवजा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। सरकार के अनुसार, राहत राशि सीधे बैंक खातों में भेजने का उद्देश्य सहायता वितरण में पारदर्शिता बनाए रखना और किसानों को समय पर आर्थिक संबल प्रदान करना है। हालांकि, इस व्यवस्था की वास्तविक प्रभावशीलता का आकलन इस बात से होगा कि नुकसान झेल चुके प्रत्येक पात्र किसान तक सहायता कितनी शीघ्र और किस सीमा तक पहुंचती है।

योगी आदित्यनाथ ने बताया कि चालू वर्ष के बरसाती मौसम में अब तक आपदाओं से प्रभावित किसानों और नागरिकों को लगभग एक हजार करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है। फसल क्षति के अतिरिक्त जिन परिवारों के मकान प्राकृतिक आपदाओं में क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत अलग से 1.20 लाख रुपये की सहायता दी गई है। यह राशि फसल नुकसान की क्षतिपूर्ति से अतिरिक्त है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, जिन परिवारों के मकान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं अथवा बाढ़ में बह गए हैं, उन्हें तत्काल आवास उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है, जबकि आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के मामलों में नियमानुसार सहायता दी जा रही है।

राहत व्यवस्था का दायरा केवल खेतों और मकानों तक सीमित नहीं रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर प्रभावित परिवार को 24 घंटे के भीतर चार लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। पशुधन की हानि होने पर भी नियमानुसार आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था है। सरकार का दावा है कि डिजिटल क्रॉप सर्वे के आधार पर जिन जनपदों की रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है, वहां क्षतिपूर्ति वितरण की प्रक्रिया तत्काल आगे बढ़ाई जा रही है। इस व्यवस्था में सर्वेक्षण की समयबद्धता और पात्रता का सही निर्धारण निर्णायक है, क्योंकि राहत की गति अंततः उन्हीं अभिलेखों और आकलनों पर निर्भर करती है जिनके आधार पर नुकसान का सत्यापन किया जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार किसानों की खुशहाली, समृद्धि और सम्मान के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आपदा से प्रभावित किसानों और परिवारों को संकट से उबारने के लिए सरकार हरसंभव सहायता उपलब्ध कराती रहेगी। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रभावित किसानों को कृषि निवेश अनुदान के प्रतीकात्मक चेक वितरित किए और विभिन्न विभागों की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने बच्चों का अन्नप्राशन भी कराया। इससे पहले मिशन शक्ति के अंतर्गत जागरूकता रैली-2026 को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

कर्जमाफी से खरीद व्यवस्था तक, सरकार ने गिनाईं कृषि क्षेत्र की उपलब्धियां
कार्यक्रम में प्रदेश सरकार की कृषि नीति और किसानों के हित में किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया गया। उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार, वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद किसानों की कर्जमाफी के लिए लगभग 36 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके साथ ही गेहूं और धान की खरीद व्यवस्था का विस्तार करने तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद बढ़ाने की बात कही गई। सरकार का दावा है कि पूर्ववर्ती सरकारों की तुलना में गेहूं और धान की खरीद तीन गुना से अधिक बढ़ी है। चना, मटर, मसूर, सरसों, मक्का, बाजरा और ज्वार जैसी फसलों की खरीद को भी प्रोत्साहित किया गया है। कृषि क्षेत्र में अब तक लगभग 69,163 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का आंकड़ा भी प्रस्तुत किया गया, जिसे किसानों को बीज, बिजली, उर्वरक और अन्य कृषि निवेश उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता से जोड़ा गया।
कृषि मंत्री ने बताया कि प्रदेश में पिछले वर्ष 752 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ। उन्होंने कहा कि किसानों की उपज का समय से भुगतान सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए गए हैं और गन्ना किसानों के भुगतान की व्यवस्था में सुधार किया गया है। उनके अनुसार, प्रदेश की 105 चीनी मिलें वर्तमान में 15 दिनों के भीतर भुगतान कर रही हैं। यह दावा ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की आय और भुगतान की समयबद्धता भी नीतिगत बहस के प्रमुख विषय बने हुए हैं।
फसल बीमा के मोर्चे पर भी सरकार ने आंकड़े प्रस्तुत किए। कृषि मंत्री के अनुसार, वर्ष 2017-18 से अब तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत लगभग 6,125 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराई गई है। वर्ष 2025-26 में करीब 7.31 लाख किसानों को 812.76 करोड़ रुपये दिए गए। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष लगभग 18 लाख किसानों ने फसल बीमा कराया था, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर लगभग 23 से 24 लाख हो गई है। मुख्यमंत्री ने बीमित किसानों के नुकसान का सर्वे शीघ्र पूरा कर क्षतिपूर्ति वितरित करने के निर्देश दिए हैं। अब चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि बीमा और आपदा राहत की अलग-अलग प्रक्रियाओं के बीच पात्र किसानों को अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े।
कार्यक्रम को सांसद रवि किशन शुक्ल ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर विधान परिषद सदस्य धर्मेन्द्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, बिपिन सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, श्रीराम चौहान, प्रदीप शुक्ल, महेन्द्र पाल सिंह और इंजीनियर सरवन कुमार निषाद सहित गोरखपुर के महापौर डॉ. मंगलेश कुमार श्रीवास्तव तथा उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारु चौधरी समेत अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
किसानों के लिए राहत का वास्तविक अर्थ केवल घोषित धनराशि नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में समय पर मिलने वाली सहायता है। 493 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष हस्तांतरण प्रभावित किसानों को तत्काल आर्थिक संबल देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसकी पूरी उपयोगिता तब सुनिश्चित होगी, जब नुकसान का आकलन, पात्रता का निर्धारण और शेष राहत प्रक्रियाएं भी उतनी ही तत्परता से पूरी हों, जितनी तेजी से सहायता राशि खातों में भेजने की घोषणा की गई है।