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नितिन नबीन की नई टीम में बड़ा फेरबदल, तीन चर्चित चेहरे बाहर

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Dainik India News

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नितिन नबीन की नई टीम में बड़ा फेरबदल, तीन चर्चित चेहरे बाहर


अमित मालवीय, अरुण सिंह और संजय मयूख को नहीं मिली जगह; अनुभवी चेहरों पर भरोसा कायम, कई नेताओं की जिम्मेदारियों में बदलाव से संगठन की नई रणनीति के संकेत

दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने संगठन की नई राष्ट्रीय टीम में व्यापक फेरबदल के साथ अनुभव और निरंतरता के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है। नई सूची में कई वरिष्ठ नेताओं को उनकी जिम्मेदारियों पर बरकरार रखा गया है, जबकि कुछ प्रमुख नेताओं के दायित्व बदले गए हैं। सबसे अधिक चर्चा उन तीन नामों को लेकर है, जिन्हें नई टीम में स्थान नहीं मिला—अमित मालवीय, अरुण सिंह और संजय मयूख। संगठन में लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाते रहे इन चेहरों की अनुपस्थिति ने नई टीम के गठन को लेकर राजनीतिक और संगठनात्मक हलकों में स्वाभाविक रूप से उत्सुकता बढ़ा दी है।

नई व्यवस्था में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी पर बरकरार रखा गया है। सौदान सिंह और शिव प्रकाश संयुक्त महामंत्री (संगठन) की भूमिका में बने रहेंगे। बैजयंत जय पांडा, रेखा वर्मा और प्रो. तारिक मंसूर को भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर निरंतरता मिली है। संगठन के सबसे महत्वपूर्ण पदों में से एक राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) की जिम्मेदारी बी.एल. संतोष के पास यथावत रखी गई है। यह निरंतरता बताती है कि नेतृत्व ने संगठन की मौजूदा संरचना के महत्वपूर्ण स्तंभों में तत्काल बदलाव के बजाय स्थायित्व को प्राथमिकता दी है।

राष्ट्रीय महामंत्रियों के स्तर पर भी अनुभव को महत्व दिया गया है। विनोद तावड़े और सुनील बंसल राष्ट्रीय महामंत्री के पद पर बने रहेंगे। वहीं तरुण चुग की भूमिका बदलते हुए उन्हें केंद्रीय कार्यालय प्रभारी बनाया गया है। ऋतुराज सिन्हा को राष्ट्रीय सचिव की पूर्व जिम्मेदारी से आगे बढ़ाकर सभी प्रकोष्ठों के संयुक्त समन्वयक की भूमिका दी गई है। अनिल एंटनी राष्ट्रीय सचिव के रूप में अपनी जिम्मेदारी जारी रखेंगे।

नई टीम में कुछ नेताओं को अपेक्षाकृत महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर संगठनात्मक भूमिका का विस्तार भी किया गया है। अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष रहे लाल सिंह आर्य को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि मुख्य प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी रहे अनिल बलूनी को मीडिया संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन बदलावों से संकेत मिलता है कि संगठन ने कुछ चेहरों को व्यापक राष्ट्रीय दायित्व देने के साथ भूमिकाओं का पुनर्संयोजन किया है।

सबसे उल्लेखनीय परिवर्तन उन नेताओं को लेकर है, जिन्हें इस बार राष्ट्रीय संगठन में स्थान नहीं मिला। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के स्तर पर सरोज पांडे, डी.के. अरुणा, एम. चुबा आओ, अब्दुल्ला कुट्टी, लक्ष्मीकांत वाजपेयी और लता उसेंडी नई सूची में नहीं हैं। राष्ट्रीय महामंत्री के पद से अरुण सिंह, दुष्यंत कुमार गौतम और राधा मोहन दास अग्रवाल भी बाहर हो गए हैं। इसके साथ ही राष्ट्रीय सचिवों की पिछली टीम के कई नाम नई संरचना में दिखाई नहीं देते।

राष्ट्रीय सचिव पद से बाहर होने वालों में अरविंद मेनन, पंकजा मुंडे, नरेंद्र सिंह, अलका गुर्जर, ओमप्रकाश धुर्वे, कमाख्या प्रसाद तासा, सुरेंद्र सिंह नागर, मनजिंदर सिंह सिरसा और ओम प्रकाश धनखड़ शामिल हैं। संगठन के वित्तीय ढांचे में भी परिवर्तन हुआ है। राजेश अग्रवाल कोषाध्यक्ष और नरेश बंसल सह-कोषाध्यक्ष के पद पर नई टीम में नहीं हैं।

आईटी, सोशल मीडिया और मीडिया संगठन में भी बदलाव विशेष रूप से ध्यान खींचते हैं। अमित मालवीय, जो लंबे समय से भाजपा के डिजिटल और सोशल मीडिया तंत्र का प्रमुख चेहरा रहे हैं, को राष्ट्रीय आईटी एवं सोशल मीडिया प्रभारी के रूप में नई टीम में स्थान नहीं मिला है। इसी तरह मीडिया सह-प्रभारी की भूमिका निभा रहे संजय मयूख भी नई सूची से बाहर हैं। इन दोनों के साथ राष्ट्रीय महामंत्री पद से अरुण सिंह की विदाई को संगठनात्मक पुनर्संरचना के प्रमुख संकेतों के रूप में देखा जा रहा है।

मोर्चा संगठनों में भी नेतृत्व परिवर्तन हुआ है। तेजस्वी सूर्या अब राष्ट्रीय अध्यक्ष, युवा मोर्चा के पद पर नहीं हैं। वनथी श्रीनिवासन महिला मोर्चा, के. लक्ष्मण ओबीसी मोर्चा, राजकुमार चाहर किसान मोर्चा, समीर उरांव अनुसूचित जनजाति मोर्चा और जमाल सिद्दीकी अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नई टीम में शामिल नहीं हैं। इससे स्पष्ट है कि बदलाव केवल केंद्रीय पदाधिकारियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पार्टी के विभिन्न मोर्चों तक संगठनात्मक पुनर्गठन का विस्तार हुआ है।

नितिन नबीन के नेतृत्व में गठित यह टीम ऐसे समय सामने आई है जब भाजपा संगठन को आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है। नबीन जनवरी 2026 में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे और उनके नेतृत्व में नई टीम को लेकर लंबे समय से राजनीतिक हलकों में प्रतीक्षा थी। नई संरचना में वरिष्ठ नेताओं को बनाए रखने और कई महत्वपूर्ण चेहरों को हटाने अथवा नई जिम्मेदारियां देने के बीच जो संतुलन बनाया गया है, वह आने वाले समय में पार्टी की संगठनात्मक प्राथमिकताओं का संकेत दे सकता है।

इस पूरी कवायद का सबसे बड़ा संदेश यही है कि नितिन नबीन ने संगठन में निरंतरता के साथ पुनर्संरचना का रास्ता चुना है। कुछ पुराने और प्रभावशाली चेहरों को जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया है, तो कई अनुभवी नेताओं पर भरोसा कायम रखा गया है। अब निगाह इस बात पर होगी कि नई टीम इन बदली हुई भूमिकाओं को जमीन पर किस तरह प्रभावी संगठनात्मक रणनीति में बदलती है और आने वाली राजनीतिक चुनौतियों के बीच भाजपा का केंद्रीय संगठन किस नई दिशा में आगे बढ़ता है।

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