नई दिल्ली प्रवास के दौरान संस्कृत सप्ताह-2026 के कार्यक्रमों की दी जानकारी; पूर्वी उत्तर प्रदेश में संगठन के विस्तार, प्रयागराज-काशी प्रवास और सामाजिक सरोकारों पर हुई विस्तृत चर्चा
दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।संस्कृत भाषा, साहित्य और भारतीय ज्ञान-परंपरा के व्यापक प्रसार को लेकर संस्कृतभारती की गतिविधियों के बीच नई दिल्ली में संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण शिष्टाचार भेंट हुई। संस्कृतभारती पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के संपर्क प्रमुख जितेन्द्र प्रताप सिंह ने अखिल भारतीय संगठन मंत्री जयप्रकाश से भेंट कर हाल ही में संपन्न संस्कृत सप्ताह-2026 के अंतर्गत पूर्वी उत्तर प्रदेश में आयोजित विविध कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी साझा की। भेंट के दौरान संगठन के विस्तार से लेकर समाज के विभिन्न वर्गों तक संस्कृत के संपर्क को प्रभावी बनाने के विषय पर भी विचार-विमर्श हुआ।
जितेन्द्र प्रताप सिंह ने संस्कृत सप्ताह के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रमों का क्रमवार विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश क्षेत्र डाक परिमंडल द्वारा आयोजित विशेष स्टाम्प कैंसिलेशन तथा उससे जुड़े आयोजन की जानकारी दी। इसके साथ ही क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर संस्कृत भाषा, साहित्य और भारतीय ज्ञान-परंपरा को केंद्र में रखकर हुए कार्यक्रमों की गतिविधियों से भी अखिल भारतीय संगठन मंत्री को अवगत कराया।
भेंट के दौरान प्रमोद पंडित, क्षेत्रीय संगठन मंत्री के निर्देशन एवं नेतृत्व में पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र में संस्कृतभारती की गतिविधियों के विस्तार पर भी चर्चा हुई। संगठन की विभिन्न इकाइयों के माध्यम से संस्कृत को समाज के अधिक व्यापक वर्ग तक पहुंचाने के प्रयासों और उनके प्रभाव को लेकर भी विचार साझा किए गए। इसी क्रम में जयप्रकाश ने पूर्वी क्षेत्र में अपने प्रस्तावित प्रयागराज एवं काशी प्रवास से संबंधित विषयों पर भी जानकारी ली।
वार्ता का एक महत्वपूर्ण पक्ष संगठन के विभिन्न आयामों और सामाजिक दायित्वों को लेकर रहा। जयप्रकाश ने जितेन्द्र प्रताप सिंह को संगठन की कार्यपद्धति, विभिन्न गतिविधियों और सामाजिक संपर्क के विविध पक्षों से अवगत कराया। उन्होंने अपने प्रचारक जीवन के अनुभवों तथा राष्ट्र-समर्पण की भावना से जुड़े प्रसंग भी साझा किए और समाज के बीच निरंतर सक्रिय एवं समाजोन्मुखी संपर्क को संगठनात्मक कार्य की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया।
बैठक में व्यक्तिगत एवं सामाजिक विषयों पर भी विस्तृत परिचर्चा हुई। संगठन के कार्य को केवल गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय समाज के विभिन्न वर्गों के साथ सतत संवाद और संपर्क के माध्यम से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। संस्कृतभारती की गतिविधियों के माध्यम से संस्कृत भाषा के साथ उससे जुड़ी साहित्यिक और ज्ञानपरंपरा को व्यापक सामाजिक आधार देने के प्रयासों पर भी विचार हुआ।
जितेन्द्र प्रताप सिंह ने भेंट के दौरान प्राप्त मार्गदर्शन के लिए जयप्रकाश के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने संगठनात्मक दिशा-निर्देशन और अनुभव साझा करने के लिए साधुवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि संस्कृत भाषा, साहित्य और भारतीय ज्ञान-परंपरा के प्रसार के लिए संगठन के कार्य को समाज के अधिक व्यापक स्तर तक ले जाने के प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।