दैनिक इडिया न्यूज़ ,नई दिल्ली। SIR विवाद और मुख्य चुनाव आयुक्त के कथित एकतरफा फैसलों को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। राजकोट के राजकुमार कॉलेज में ‘संविधान और आम आदमी’ विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाने की प्रक्रिया ने नागरिकों के उस मूल अधिकार को खतरे में डाल दिया है, जो लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव है।
जस्टिस नरीमन ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से हटाए गए नामों और उनके खिलाफ हुई अपीलों का हवाला देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में मामलों में फैसला मतदाताओं के पक्ष में आया। उनके मुताबिक, करीब 22 लाख लोगों ने अपील की, जबकि बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हो सकते हैं जो कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए जरूरी संसाधन या पहुंच नहीं रखते। उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की मौजूदा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप कर व्यवस्था की कमियों को दूर करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
पूर्व जस्टिस ने चेतावनी देते हुए कहा कि किसी नागरिक को मताधिकार से बाहर करना महज प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि यदि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया गैर-कानूनी तरीके से होती है तो इसका सीधा असर चुनाव के परिणाम और लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर पड़ता है। अब सबकी नजरें सोमवार को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर हैं—जहां SIR विवाद के साथ-साथ चुनाव आयोग की शक्तियों और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े सवाल भी अहम बनकर सामने आ सकते हैं।