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आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान में नारी शक्ति का संगम — जब आत्मविश्वास ने लिया संकल्प का रूप

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Dainik India News

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आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान में नारी शक्ति का संगम — जब आत्मविश्वास ने लिया संकल्प का रूप

लखनऊ। शरद की सुनहरी दोपहर थी, जब हजरतगंज स्थित जिला सहकारिता भवन में दीपों की ज्योति ने एक नए विश्वास की लौ जलाई। “आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान” के तहत आयोजित महिला सम्मेलन में सभागार उम्मीद और उत्साह से भर उठा। मंच पर जैसे ही भाजपा के वरिष्ठ नेता नीरज सिंह, लखनऊ महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, महिला मोर्चा अध्यक्ष सीता नेगी, और महामंत्री अर्चना साहू ने दीप प्रज्ज्वलित किया — वातावरण में एक संदेश गूंज उठा, “अब भारत की नारी खुद अपने भविष्य की दिशा तय करेगी।”

सम्मेलन में उपस्थित महिलाओं की आंखों में चमक थी — आत्मनिर्भरता की, बदलाव की और अपने अस्तित्व को पहचानने की। वरिष्ठ नेता नीरज सिंह ने जब बोलना शुरू किया, तो हर शब्द मानो आत्मविश्वास का मंत्र बन गया। उन्होंने कहा, “महिलाओं का आत्मनिर्भर होना सिर्फ उनका हक नहीं, बल्कि भारत के विकास की रीढ़ है। आत्मनिर्भरता का अर्थ है — आर्थिक, मानसिक और सामाजिक रूप से इतना सक्षम होना कि जीवन के हर निर्णय में आत्मविश्वास झलके।”
उनके शब्दों ने सभागार में बैठी सैकड़ों महिलाओं के दिलों में यह विश्वास भर दिया कि अब कोई भी परिस्थिति उन्हें रोक नहीं सकती।

उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनेक योजनाएं शुरू की हैं।
‘नमो ड्रोन दीदी योजना’, जिसने ग्रामीण महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर नई दिशा दी है, अब महिलाओं को खेतों से लेकर आसमान तक उड़ान सिखा रही है।
इसके साथ ही ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’, ‘उज्ज्वला योजना’, और ‘महिला उद्यमिता योजना’ जैसी पहलें, आज उस बदलाव की मिसाल हैं जहाँ महिलाएं सिर्फ घर नहीं, अब समाज और अर्थव्यवस्था की धुरी बन चुकी हैं।
नीरज सिंह ने शिक्षा और कौशल विकास को नारी सशक्तिकरण की नींव बताते हुए कहा, “जब महिला शिक्षित होती है, तो सिर्फ परिवार नहीं, पूरा समाज शिक्षित होता है।”

सभा में जब भाजपा लखनऊ महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी ने बोलना शुरू किया, तो सभागार तालियों की गूंज से भर उठा।
उन्होंने कहा, “आत्मनिर्भर महिला समाज की सबसे मजबूत दीवार होती है। वह न केवल अपने परिवार को सशक्त बनाती है, बल्कि समाज में बदलाव की शुरुआत करती है। अगर हर घर में एक आत्मनिर्भर महिला हो, तो पूरा देश आत्मनिर्भर बन सकता है।”
उन्होंने आह्वान किया कि समाज, परिवार और सरकार — तीनों को मिलकर यह जिम्मेदारी उठानी होगी कि कोई भी महिला अवसर से वंचित न रहे।

इसके बाद मंच पर आईं लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, जिनके शब्दों में दृढ़ता और संवेदना दोनों थीं। उन्होंने कहा, “आज केंद्र और राज्य सरकारों ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए जो कदम उठाए हैं, वे आने वाले भारत की तस्वीर बदल रहे हैं। राजनीति में 33% आरक्षण देना सिर्फ अवसर नहीं, बल्कि सम्मान का प्रतीक है।”
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। कानून-व्यवस्था के सख्त ढांचे के कारण महिलाएं आज अधिक आत्मविश्वास के साथ अपने कार्यस्थलों पर योगदान दे रही हैं।
उनके शब्दों में वह गर्व झलक रहा था, जो हर सशक्त महिला की आंखों में दिखाई देता है।

सम्मेलन का वातावरण धीरे-धीरे प्रेरणा के उत्सव में बदल गया।
वहां मौजूद हर महिला इस विश्वास के साथ उठी कि आत्मनिर्भर भारत का सपना अब दूर नहीं है।
कार्यक्रम के अंत में पुनीता श्रीवास्तव, हेमा बिष्ट, शोभा रावत, सुनीता गोस्वामी, बबीता अग्रवाल, और समिता बपिला को “आत्मनिर्भर भारत ब्रांड एंबेसडर” के रूप में सम्मानित किया गया —
एक प्रतीक के रूप में कि अब हर महिला स्वयं बदलाव की दूत है।

सहकारिता भवन से जब महिलाएं बाहर निकलीं, तो उनके चेहरे पर केवल मुस्कान नहीं थी — वहाँ आत्मविश्वास का प्रकाश था।
यह सम्मेलन सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक संकल्प था —
एक ऐसे भारत का, जहाँ हर महिला अपनी ताकत को पहचानती है, अपनी दिशा खुद तय करती है, और अपने सपनों को हकीकत बनाती है।

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