पदभार ग्रहण करते ही इलेक्ट्रिक वाहन अपनाकर दिया स्वच्छ भारत का संदेश; 3,500 घंटे से अधिक उड़ान अनुभव और चार विशिष्ट सेवा अलंकरणों से अलंकृत वायुसेना प्रमुख को जितेन्द्र प्रताप सिंह ने दी शुभकामनाएँ, विमानों पर संस्कृत में ध्येय वाक्य अंकित करने का भी किया आग्रह

दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।भारतीय वायुसेना के नवनियुक्त प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने पदभार ग्रहण करते ही इलेक्ट्रिक वाहन अपनाकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया है। सैन्य नेतृत्व के सर्वोच्च दायित्व के साथ स्वच्छ परिवहन को प्राथमिकता देने की उनकी इस पहल को विशेष रूप से सराहा जा रहा है। यह कदम केवल व्यक्तिगत जीवनशैली का परिवर्तन नहीं, बल्कि सार्वजनिक जीवन में पर्यावरणीय उत्तरदायित्व को व्यवहार में उतारने का एक प्रेरक संदेश भी है।
एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित का सैन्य जीवन विशिष्ट उपलब्धियों से समृद्ध रहा है। परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, वायु सेना मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से अलंकृत दीक्षित को विभिन्न प्रकार के विमानों पर 3,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव प्राप्त है। उनका यह अनुभव भारतीय वायुसेना की पेशेवर दक्षता और नेतृत्व क्षमता का महत्वपूर्ण आधार है।

उनकी पर्यावरण-अनुकूल पहल की सराहना करते हुए संस्कृत भारती के पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के संगठन संपर्क प्रमुख जितेन्द्र प्रताप सिंह ने साधुवाद ज्ञापित किया और उनके नए दायित्व के लिए अंतर्मन से शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। सिंह ने उनकी सैन्य उपलब्धियों के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रदर्शित संवेदनशीलता को भी सराहनीय बताया।
इस अवसर से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक विषय भी उल्लेखनीय है। वायुसेना प्रमुख का पदभार ग्रहण करने से पूर्व हुई शिष्टाचार भेंट में जितेन्द्र प्रताप सिंह ने उनसे आग्रह किया था कि भारतीय वायुसेना के विभिन्न विमानों पर वायुसेना के ध्येय वाक्य को संस्कृत भाषा में भी उद्धृत करने की संभावनाओं पर विचार किया जाए।
सिंह ने एयर चीफ मार्शल दीक्षित से पुनः अपेक्षा की है कि यदि इस विषय में कोई वैधानिक अथवा संस्थागत बाधा न हो तो इस प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार किया जाए। उनका मानना है कि आधुनिक सैन्य सामर्थ्य के साथ भारत की प्राचीन भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को भी उचित स्थान मिलना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण की पहल और संस्कृत भाषा के इस आग्रह के माध्यम से भारतीयता के आधुनिक एवं सांस्कृतिक स्वरूप को एक साथ रेखांकित करने का प्रयास सामने आया है।