जितेंद्र प्रताप सिंह और सुखबीर सिंह दलाल की आत्मीय भेंट में बुजुर्गों के सम्मान से लेकर संस्कृत के उत्थान तक हुआ गहन मंथन

दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली। समाज, संस्कार और संस्कृति के प्रश्नों पर चिंतन करने वाले दो सार्वजनिक व्यक्तित्व जब एक साथ बैठे तो संवाद महज शिष्टाचार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि परिवार की टूटती आत्मीयता, बुजुर्गों के सम्मान, संस्कारों के संरक्षण और संस्कृत के पुनरुत्थान जैसे विषयों तक पहुंचा। नोएडा प्रवास पर मौजूद राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष एवं संस्कृत भारती के पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र संपर्क प्रमुख जितेंद्र प्रताप सिंह से राजधानी दिल्ली में मुंडका विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ भाजपा नेता सुखबीर सिंह दलाल की आत्मीय भेंट हुई। दोनों के बीच वर्तमान सामाजिक परिदृश्य को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ और इस बात पर विशेष मंथन किया गया कि बदलते समय में परिवार की उस भावनात्मक डोर को कैसे अक्षुण्ण रखा जाए, जो पीढ़ियों को परस्पर जोड़ती है।
चर्चा में बुजुर्गों के प्रति समाज और परिवार के दायित्व को विशेष स्थान मिला। दोनों ने इस बात पर विचार किया कि जिन हाथों ने परिवार की नींव रखी, जिन अनुभवों ने पीढ़ियों को दिशा दी और जिन संस्कारों ने जीवन को अर्थ प्रदान किया, उन्हीं बुजुर्गों का जीवन सम्मान, आत्मीयता और सुरक्षा से परिपूर्ण होना चाहिए। आधुनिकता की आपाधापी में यदि पीढ़ियों के बीच संवाद क्षीण होता है तो उसका प्रभाव केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सामाजिक संरचना तक पहुंचता है। इसी संदर्भ में दोनों ने परिवार को भारतीय समाज की मूल इकाई मानते हुए उसके संरक्षण और संस्कारों की पुनर्स्थापना को समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया।
संवाद का एक महत्वपूर्ण केंद्र संस्कृत के उत्थान और उसके व्यापक सामाजिक पुनर्संपर्क को लेकर भी रहा। दोनों ने संस्कृत को भारतीय ज्ञान-परंपरा, दर्शन, साहित्य और सांस्कृतिक चेतना की सुदीर्घ धारा से जोड़ते हुए नई पीढ़ी तक इसके सहज प्रसार की आवश्यकता पर चर्चा की। विचार-विमर्श में यह भाव प्रमुख रहा कि संस्कृत को केवल अतीत की भाषा के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय बौद्धिक विरासत और संस्कार-परंपरा को वर्तमान से जोड़ने वाले जीवंत सेतु के रूप में प्रतिष्ठित किया जाना चाहिए।
इस मुलाकात में संस्कृत भारती के लिए विशेष संस्कृत लिपि मे डाक निरूपण जारी होने का प्रसंग भी विशेष रूप से चर्चा में आया। कुछ समय पूर्व संस्कृत भारती के लिए डाक टिकट जारी होने को संस्कृत जगत के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए सुखबीर सिंह दलाल ने इसके लिए जितेंद्र प्रताप सिंह के उत्तरप्रदेश डाक परिमंडल द्वारा विशेष आवरण विशेष निरूपण के लिए उनके सफल प्रयास के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने जितेंद्र प्रताप सिंह के सामाजिक एवं सांस्कृतिक सरोकारों की सराहना करते हुए कहा कि “ऐसे व्यक्तित्वों का जीवन, जो समाज को नई राह दिखाने का कार्य करते हैं, किसी भगवत् आशीर्वाद से कम नहीं है।” उन्होंने कहा कि समाज को दिशा देने वाले प्रयास तभी स्थायी प्रभाव छोड़ते हैं, जब उनके पीछे व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं, बल्कि व्यापक लोकमंगल की भावना हो।
जितेंद्र प्रताप सिंह ने भी सुखबीर सिंह दलाल के सार्वजनिक जीवन और जनसरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की। दलाल मुंडका विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और वर्तमान में भाजपा से जुड़े वरिष्ठ नेता के रूप में सक्रिय हैं। मुलाकात के समापन पर दोनों ने एक-दूसरे के प्रयासों के लिए साधुवाद एवं धन्यवाद ज्ञापित किया। जितेंद्र प्रताप सिंह ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सुखबीर सिंह दलाल को शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए जनसेवा के उनके संकल्प की सफलता की कामना की तथा उनके पारिवारिकअनुभवों से आलोकित होने हेतू आभार व्यक्त किआ। मुलाकात का समापन आत्मीयता, पारस्परिक सम्मान और समाजहित में निरंतर सार्थक प्रयत्न करते रहने के संकल्प के साथ हुआ।