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संस्कार, कौशल और आत्मनिर्भरता का सशक्त संगम बना समर्थ भारत का कौशल विकास अभियान

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Dainik India News

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संस्कार, कौशल और आत्मनिर्भरता का सशक्त संगम बना समर्थ भारत का कौशल विकास अभियान

भाऊराव देवरस सेवा न्यास द्वारा समर्थ भारत के मार्गदर्शन में युवाओं एवं महिलाओं को मिल रही स्वावलंबन की नई उड़ान

ड्राइविंग से लेकर फैशन डिजाइनिंग,बेकरी, नर्सिंग सहायक, ब्यूटीशियन और बिजली उपकरण मरम्मत तकनीकी प्रशिक्षण तक अनेक रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम संचालित है

दैनिक इंडिया न्यूज़,22 जून 2026 लखनऊ। राष्ट्र निर्माण का आधार केवल शिक्षा नहीं, बल्कि संस्कारयुक्त कौशल, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता से परिपूर्ण नागरिक होते हैं। जब किसी प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य केवल तकनीकी दक्षता प्रदान करना न होकर व्यक्तित्व निर्माण, रोजगार सृजन और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास भी हो, तब वह एक साधारण प्रशिक्षण कार्यक्रम न रहकर सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी अभियान बन जाता है। इसी उद्देश्य को साकार करते हुए भाऊराव देवरस सेवा न्यास द्वारा संचालित समर्थ भारत आज युवाओं और महिलाओं के कौशल विकास एवं स्वावलंबन का एक प्रेरणादायी मॉडल बनकर उभर रहा है।

समर्थ भारत के माध्यम से युवाओं एवं महिलाओं को विभिन्न रोजगारपरक और स्वरोजगार आधारित प्रशिक्षण प्रदान किए जा रहे हैं। वर्तमान में ड्राइविंग प्रशिक्षण के साथ-साथ ब्यूटीशियन, फैशन डिजाइनिंग, नर्सिंग सहायक, बेकरी, एयर कंडीशनर रिपेयरिंग, रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन तथा आर.ओ. तकनीशियन जैसे पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि प्रशिक्षुओं को आत्मविश्वासी, सक्षम और आत्मनिर्भर नागरिक के रूप में विकसित करना है।

इसी क्रम में समर्थ भारत एवं राष्ट्रीय सनातन महासंघ के संयुक्त तत्वावधान में संचालित ड्राइविंग प्रशिक्षण कार्यक्रम समाज में विशेष आकर्षण और विश्वास का केंद्र बन रहा है। यह प्रशिक्षण केवल वाहन संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रतिभागियों में अनुशासन, धैर्य, जिम्मेदारी, सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता तथा सामाजिक दायित्वों की भावना का भी विकास कर रहा है।

ड्राइविंग प्रशिक्षण के प्रथम बैच में छह शिक्षार्थियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। इनमें दो प्रतिभागी ऐसे भी थे, जिन्होंने पूर्व में अन्य संस्थानों से प्रशिक्षण लिया था, लेकिन अपेक्षित आत्मविश्वास और व्यवहारिक दक्षता प्राप्त नहीं कर सके थे। समर्थ भारत के प्रशिक्षकों द्वारा व्यक्तिगत मार्गदर्शन, निरंतर अभ्यास और व्यवहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से उनके कौशल में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद सभी प्रतिभागियों ने कार्यक्रम के प्रति संतोष और विश्वास व्यक्त किया।

प्रथम बैच की सफलता का प्रभाव यह रहा कि कई प्रशिक्षार्थी स्वयं इस अभियान के प्रेरक बन गए। तीन प्रतिभागियों ने अपने परिचितों को प्रशिक्षण के लिए प्रेरित किया, जबकि अनेक लोग डिजिटल माध्यमों से इसकी जानकारी प्राप्त कर कार्यक्रम से जुड़े। समर्थ भारत की सेवा, राष्ट्रहित और आत्मनिर्भरता की विचारधारा से प्रभावित होकर भी बड़ी संख्या में लोग इस पहल का हिस्सा बन रहे हैं।

प्रथम बैच की उल्लेखनीय सफलता के बाद वर्तमान में संचालित द्वितीय बैच में 15 शिक्षार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इनमें दो युवा भविष्य में व्यावसायिक चालक बनने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि 13 महिलाएं आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और सामाजिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से ड्राइविंग प्रशिक्षण ग्रहण कर रही हैं। यह पहल महिलाओं को केवल वाहन संचालन का कौशल ही नहीं, बल्कि स्वतंत्र निर्णय क्षमता और आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का आत्मबल भी प्रदान कर रही है।

प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं में एक युवती ऐसी भी हैं, जो शीघ्र ही फिनलैंड जाने वाली हैं। वहां ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने के लिए उन्हें स्थानीय परीक्षण उत्तीर्ण करना होगा। इसी उद्देश्य से वे यहां प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं, जिससे विदेश में भी आत्मविश्वास और दक्षता के साथ स्वयं को स्थापित कर सकें। यह उदाहरण दर्शाता है कि उचित मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर भारतीय युवतियां वैश्विक स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं।

राष्ट्रीय सनातन महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेंद्र प्रताप सिंह ने इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में युवाओं और महिलाओं को केवल प्रेरक भाषणों की नहीं, बल्कि व्यवहारिक कौशल एवं रोजगारोन्मुखी अवसरों की आवश्यकता है। समर्थ भारत द्वारा संचालित यह अभियान उसी दिशा में एक दूरदर्शी, रचनात्मक और परिणामकारी प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल ड्राइविंग प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास, स्वाभिमान और सम्मानजनक जीवन की मजबूत नींव रखने का कार्य कर रही है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सेवा, संस्कार और स्वावलंबन पर आधारित ऐसे कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को जमीनी स्तर पर साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। जब समाज की संस्थाएं युवाओं की क्षमता को पहचानकर उन्हें अवसर प्रदान करती हैं, तब केवल व्यक्तियों का ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का भविष्य सशक्त होता है।

समर्थ भारत के इस व्यापक कौशल विकास अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर अनुभवी मार्गदर्शकों का सतत मार्गदर्शन प्राप्त है। इसके प्रमुख मार्गदर्शकों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल,अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख भरत भूषण , समर्थ भारत नई दिल्ली के संयोजक सोनल गुप्ता, सह संयोजक राकेश सहित उत्तर प्रदेश की टीम में मुख्यमंत्री के सलाहकार एवं सेवा निवृत भारतीय प्रशासनिक अधिकारी आई ए एस अवनीश अवस्थी,ए के टी यू के रजिस्ट्रार डॉ. प्रदीप बाजपेयी,देवेश कुमारश्रीवास्तव, एस के पांडेय,मनोज मिश्रा, लखनऊ विश्वविद्यालय के डॉ. अरुण द्विवेदी,सुरेंद्र चौहान,डॉ. आलोक कृष्ण, विधायक पवन सिंह जी, संजय राय,श्रीकांत यादव तथा संयोजक डॉ. विवेक सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इन सभी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में समर्थ भारत युवाओं और महिलाओं को कौशल, संस्कार और स्वावलंबन से जोड़ते हुए राष्ट्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे है।

कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार आधारित प्रशिक्षण का यह मॉडल आने वाले समय में देशभर के लिए प्रेरणा का केंद्र बन सकता है। समर्थ भारत का यह अभियान स्पष्ट संदेश देता है कि जब सेवा, संस्कार और कौशल एक साथ जुड़ते हैं, तब आत्मनिर्भर भारत का स्वप्न केवल कल्पना नहीं, बल्कि वास्तविकता बनकर उभरता है।

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