लखनऊ स्थित क्षेत्र सम्पर्कप्रमुख के आवास पर सम्पन्न हुई उच्चस्तरीय विचार-संगोष्ठी, संस्कृत के पुनर्जागरण हेतु व्यापक कार्ययोजना पर मंथन
दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ, 31 जुलाई।भारतीय ज्ञान-परम्परा, सांस्कृतिक अस्मिता एवं राष्ट्रीय चेतना की मूलाधार संस्कृत भाषा के व्यापक पुनर्जागरण तथा जन-सामान्य के मध्य उसके पुनर्प्रतिष्ठापन के उद्देश्य से लखनऊ स्थित क्षेत्र सम्पर्कप्रमुख जितेन्द्र प्रताप सिंह के आवास पर क्षेत्रीय पदाधिकारियों की एक उच्चस्तरीय 'चाय पर चर्चा' एवं रणनीतिक विचार-संगोष्ठी सम्पन्न हुई। बैठक में आगामी 25 अगस्त से 31 अगस्त तक आयोजित होने वाले संस्कृत सप्ताह को सम्पूर्ण क्षेत्र में अभूतपूर्व जनसहभागिता, सांस्कृतिक गरिमा एवं संगठनात्मक समन्वय के साथ मनाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना पर गहन मंथन किया गया।
बैठक में संगठन मंत्री एवं क्षेत्र सम्पर्कप्रमुख के मध्य संस्कृत सप्ताह की रूपरेखा, कार्यक्रमों की कार्यप्रणाली, जन-जागरण अभियान तथा संगठनात्मक उत्तरदायित्वों पर विस्तारपूर्वक विमर्श हुआ। निर्णय लिया गया कि संस्कृत सप्ताह को केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित न रखकर उसे भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण एवं भाषायी स्वाभिमान के विराट लोक-अभियान का स्वरूप प्रदान किया जाएगा। इसके लिए क्षेत्र सम्पर्कप्रमुख जितेन्द्र प्रताप सिंह आगामी दिनों में क्षेत्रव्यापी प्रवास कर विभिन्न इकाइयों का मार्गदर्शन करेंगे तथा प्रत्येक कार्यक्रम के प्रभावी, सुव्यवस्थित एवं सफल क्रियान्वयन का प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण करेंगे।
बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि संस्कृतभारती न्यास, अवध प्रांत के नेतृत्व में अवध क्षेत्र में संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत वृहद स्तर पर संगोष्ठियों, संस्कृत संभाषण वर्गों, व्याख्यानमालाओं, छात्र-युवा संवाद, सांस्कृतिक आयोजनों एवं जन-जागरण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। संस्कृतभारती न्यास, अवध प्रांत के अध्यक्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह ने विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों, सांस्कृतिक मंचों एवं प्रबुद्ध नागरिकों के साथ व्यापक समन्वय स्थापित कर संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार, संरक्षण तथा संवर्धन हेतु अपेक्षित सहयोग सुनिश्चित कराने का आश्वासन दिया।
विचार-विमर्श में यह भी निर्णय लिया गया कि कर्णपुर प्रांत, गोरक्ष प्रांत एवं काशी प्रांत सहित सम्पूर्ण क्षेत्र की सभी इकाइयाँ केन्द्र द्वारा निर्धारित कार्यक्रमों का अनुशासित एवं समन्वित संचालन करेंगी, जिससे संस्कृत के प्रति समाज में नवीन अनुराग, भाषिक चेतना तथा सांस्कृतिक आत्मगौरव का व्यापक वातावरण निर्मित हो सके।
बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों ने एक स्वर से यह संकल्प व्यक्त किया कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की शाश्वत ज्ञान-परम्परा, दार्शनिक वैभव, सांस्कृतिक अखण्डता एवं राष्ट्रीय आत्मा की अभिव्यक्ति है। अतः संस्कृत सप्ताह को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाकर भारतीय सभ्यता के इस दिव्य वैचारिक आलोक को पुनः जन-जन के जीवन का अभिन्न अंग बनाने हेतु समर्पित भाव से कार्य किया जाएगा।