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उत्तर प्रदेश स्टार्ट-अप नीति 2020 के अन्तर्गत कृषि, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, ऊर्जा, खादी, शिक्षा, पर्यटन, परिवहन सहित सभी क्षेत्रों के स्टार्टअप्स को मिल रहा है बढ़ावा

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Dainik India News

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अजय /डीडी इंडिया

बस्ती।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी प्रदेश के युवाओं को ऐसा माहौल दे रहे हैं कि वे नौकरी की तलाश न कर, नौकरी देने वाले बन रहे हैं। वर्तमान प्रदेश सरकार के पहले सभी प्रकार के उद्योगांे हेतु कोई समग्र स्टार्टअप नीति नहीं थी किन्तु वर्तमान सरकार ने कृषि, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, ऊर्जा, खादी, शिक्षा, पर्यटन, परिवहन इत्यादि सभी क्षेत्रों हेतु युवाओें के बीच उद्यमशीलता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक स्वतन्त्र एवं समग्र ’’उ0प्र0 स्टार्टअप नीति 2020’’ प्रख्यापित की है। इस नीति में बुन्देलखण्ड तथा पूर्वांचल क्षेत्र से संचालित स्टार्टअप और इन्क्यूबेटर्स तथा दिव्यांगजन, महिलाओं तथा ट्रॉसजेन्डर समुदाय के संस्थापकों/सह-संस्थापकों वाले स्टार्टअप्स के लिए 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त प्रोत्साहनों का प्राविधान किया गया है। उ0प्र0 स्टार्टअप नीति-2020 के कार्यान्वयन से प्रदेश में लगभग 50,000 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष एवं 1,00,000 व्यक्तियों हेतु अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की सम्भावना है।


इस नीति के अन्तर्गत प्रदेश की राजधानी लखनऊ में देश के सबसे बड़े इन्क्यूबेटर की स्थापना सहित प्रत्येक जनपद में कम से कम एक, 100 इन्क्यूबेटर्स की स्थापना तथा प्रदेश में सभी उद्योग क्षेत्रों- यथा कृषि, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, ऊर्जा, खादी, शिक्षा, पर्यटन, परिवहन इत्यादि क्षेत्रों की 10,000 स्टार्टअप्स की स्थापना तथा प्राविधिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, कृषि शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम से सम्बन्धित विभागों के सहयोग से 117 इन्क्यूबेटर्स की स्थापना 5 वर्षों में किया जाना परिलक्षित है। आईटी एवं इलेक्ट्रानिक्स विभाग द्वारा 13 नये इन्क्यूबेटर्स को मान्यता प्रदान की गई है और इस प्रकार राज्य भर में 37 से अधिक इन्क्यूबेटर पंजीकृत हैं।
वर्तमान में लगभग 4000 से अधिक स्टार्टअप उद्योग संवर्द्धन एवं आन्तरिक व्यापार विभाग, भारत सरकार के साथ पंजीकृत है और उनकी संख्या में निरन्तर वृद्धि हो रही है। सरकार द्वारा स्टार्ट-अप इकाइयांे के वित्तपोषण के लिए रू0 1,000 करोड़ के स्टार्ट-अप फण्ड की स्थापना की गयी है। प्रदेश में स्थापित होने वाले स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतु रू0 20 करोड़ की धनराशि सिडबी को विगत वित्तीय वर्ष में उपलब्ध करायी गई है। सिडबी द्वारा भी उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप्स को वितरण हेतु अन्य एन्जेल फण्ड्स को दे दिये गये हैं।


उ0प्र0 स्टार्टअप नीति-2020 के अन्तर्गत राज्य में 3 स्टेट ऑफ आर्ट उत्कृष्टता के केन्द्रों की स्थापना किया जाना परिलक्षित है। सेण्टर ऑफ एक्सीेलेन्स के रूप में विश्वस्तरीय बुनियादी ढॉचे के निर्माण की परिकल्पना की गई है जहॉ आर्टीफिशियल इन्टेलीजेन्स ;।प्द्धए ब्लॉकचेन, इन्टरनेट ऑफ थिंग्स ;प्व्ज्द्धए इण्डस्ट्रियल ।प्ए रोबोटिक्स तथा बिग डेटा एनॉलिटिक्स, क्लीन टेक ;ब्समंद.ज्मबीद्धए डिफेन्स, ऐजू-टेक ;म्कन.ज्मबीद्धए एग्री-टेक ;।हतप.ज्मबीद्धए हेल्थ-टेक ;भ्मंसजी.ज्मबीद्ध तथा सामाजिक अथवा राष्ट्रीय महत्व वाले अन्य क्षेत्रों में भारत और विदेश से 100 सर्वाधिक सम्भावनायुक्त उत्पादों पर आधारित स्टार्ट-अप्स होंगे। इस प्रकार का प्रथम उत्कृष्टता का केन्द्र, मेडिकल इलेक्ट्रानिक्स (स्वास्थ्य-प्रौद्योगिकी) के क्षेत्र में संजय गॉधी पोस्ट ग्रेजुएट इन्स्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइन्सेज में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इण्डिया, भारत सरकार के सहयोग से पहले ही विकसित किया जा रहा है, जो पूर्ण होकर संचालित हो रहे हैं। इस उत्कृष्टता के केन्द्र पर 5 वर्ष में मेडीटेक क्षेत्र की 50 स्टार्ट-अप इकाइयॉ पंजीकृत होना अनुमानित है जिनके द्वारा पीजीआई के चिकित्सकों के मार्गनिर्देशन में अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से चिकित्सा के क्षेत्र में आयातित उपकरणों/वस्तुओं का इस संस्थान में विकास/स्वदेशीकरण ;प्दकपहमदप्रंजपवदद्ध किया जायेगा।
इस नीति के अन्तर्गत एक अन्य उत्कृष्टता का केन्द्र, उदीयमान प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में ग्रेटर नोयडा में आईआईटी कानपुर तथा फिक्की के सहयोग से स्थापित किया जा रहा है। यह केन्द्र आगामी 5 वर्षों में आत्मनिर्भर हो जायेगा और 250 स्टार्टअप्स को उद्यमी के रूप में विकसित किये जाने का लक्ष्य रखा गया है।

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