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विकास और संरक्षण का संतुलित संकल्प: मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य वन्यजीव परिषद की 20वीं बैठक सम्पन्न

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Dainik India News

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विकास और संरक्षण का संतुलित संकल्प: मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य वन्यजीव परिषद की 20वीं बैठक सम्पन्न


दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ, 09 फरवरी 2026।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वन्यजीव संवेदनशील क्षेत्रों में प्रस्तावित समस्त विकास एवं निर्माण कार्य वैज्ञानिक मानकों, न्यूनतम पर्यावरणीय प्रभाव तथा विधिक प्रक्रियाओं के पूर्ण अनुपालन के साथ ही संपादित किए जाएं। उन्होंने दो टूक कहा कि विकास की प्रत्येक योजना में वन्यजीवों की सुरक्षा, उनके प्राकृतिक आवागमन और पारिस्थितिक निरंतरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री आज लोक भवन में आयोजित राज्य वन्यजीव परिषद की 20वीं बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
बैठक का वातावरण उस समय विशेष रूप से गौरवपूर्ण हो उठा, जब मुख्यमंत्री को प्रदेश में पर्यावरणीय चेतना के ऐतिहासिक प्रयासों के प्रतीक स्वरूप ‘लार्जेस्ट ऑनलाइन फोटो एल्बम – पीपुल प्लांटिंग प्लांट्स’ तथा 09 जुलाई 2025 को सम्पन्न वृहद वृक्षारोपण अभियान के लिए प्राप्त गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के प्रमाण पत्र सौंपे गए। इसके साथ ही एटा जनपद स्थित पटना पक्षी विहार को ‘वेटलैण्ड ऑफ इंटरनेशनल इम्पॉर्टेंस’ घोषित किए जाने का प्रमाण पत्र भी मुख्यमंत्री को प्रदान किया गया, जिसने प्रदेश की वैश्विक पर्यावरणीय पहचान को और सुदृढ़ किया।
मुख्यमंत्री ने परिषद के समक्ष यह स्पष्ट किया कि वन्यजीव क्षेत्रों से जुड़े सभी विकास प्रस्ताव संवेदनशीलता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और दूरदर्शिता के साथ तैयार किए जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी प्रस्ताव को प्रस्तुत करते समय संबंधित विभाग पर्यावरणीय जोखिम, जैव-विविधता पर संभावित प्रभाव, वन्यजीव मूवमेंट, वैकल्पिक मार्गों तथा आधुनिक तकनीकी समाधानों का विस्तृत और तथ्यपरक विश्लेषण अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें, ताकि विकास और संरक्षण के बीच स्थायी संतुलन सुनिश्चित किया जा सके।
वृक्ष कटाई के विषय पर मुख्यमंत्री का स्वर और अधिक कठोर दिखाई दिया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास की आड़ में पर्यावरण को क्षति पहुंचाने की अनुमति किसी भी दशा में नहीं दी जाएगी। वृक्षों की कटाई केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही की जाए और जहां विकल्प उपलब्ध हों, वहां ट्रेंचलेस टेक्नोलॉजी, एलिवेटेड स्ट्रक्चर तथा ईको-फ्रेंडली तकनीकों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के लिए विकास और वन्यजीव संरक्षण परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि परस्पर पूरक लक्ष्य हैं।
वेटलैण्ड संरक्षण पर विशेष बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वेटलैण्ड्स केवल जल संरचनाएं नहीं, बल्कि प्राकृतिक धरोहर और जैव-विविधता के जीवनदायी केंद्र हैं। प्रत्येक दशा में उनका संरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। कुछ वेटलैण्ड्स में सिल्ट जमाव की जानकारी पर मुख्यमंत्री ने तत्काल निराकरण के निर्देश देते हुए कहा कि यह कार्य ‘विकसित भारत–जी राम जी अभियान’ के अंतर्गत कराया जा सकता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ा जा सके।
बैठक के अंतिम चरण में परिषद के समक्ष वन्यजीव संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़े कुल 12 नए विकास प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए। इनमें सड़क चौड़ीकरण, पेट्रोल पंप एवं फ्यूल स्टेशन स्थापना, ट्यूबवेल प्रेशर सिस्टम, भूमिगत पाइपलाइन, मोबाइल टावर, ऑप्टिकल फाइबर केबल तथा संपर्क मार्ग निर्माण जैसी परियोजनाएं शामिल थीं। ये प्रस्ताव इटावा, गोंडा, पीलीभीत, बरेली, बांदा सहित विभिन्न जनपदों के ईको-सेंसिटिव जोन से संबंधित थे। परिषद द्वारा आवश्यक परीक्षणों के उपरांत इन परियोजनाओं पर सहमति प्रदान की गई।
इस प्रकार यह बैठक न केवल विकास परियोजनाओं पर निर्णय का मंच बनी, बल्कि यह स्पष्ट संदेश भी दे गई कि उत्तर प्रदेश विकास की राह पर आगे बढ़ते हुए भी प्रकृति, वन्यजीव और पर्यावरण से कोई समझौता नहीं करेगा—यही संतुलित विकास का वास्तविक मॉडल है।

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