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राष्ट्र रोने वालों को इतिहास नहीं याद रखता, निर्माता अमृतकाल लिखते हैं”-सुधांशु त्रिवेदी

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Dainik India News

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राष्ट्र रोने वालों को इतिहास नहीं याद रखता, निर्माता अमृतकाल लिखते हैं”-सुधांशु त्रिवेदी

सहकारिता भवन में आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान : सुधांशु त्रिवेदी ने कहा—“विपक्ष बहाने ढूँढता है, भारत लक्ष्य साध रहा है”

दैनिक इंडिया न्यूज़ लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी लखनऊ महानगर द्वारा सहकारिता भवन में आयोजित आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान के अंतर्गत प्रोफेशनल सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के समक्ष यह स्पष्ट आह्वान रखा है कि अमृत काल में भारत को किन लक्ष्यों को साधना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा घोषित पाँच प्राणों में पहला संकल्प—भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाना है। दूसरा—गुलामी की मानसिकता से पूर्ण मुक्ति, तीसरा—अपनी विरासत पर गर्व, और चौथा-पाँचवाँ—कर्तव्य का सामूहिक और अखंड भाव है।

https://youtu.be/wiyp7gCT2qk?si=5W9KyS0XBX0NoHA4

उन्होंने कहा कि जब तक भारत दूसरों पर निर्भर रहेगा, विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य चुनौती बना रहेगा। कोई भी देश—चाहे बड़ा हो या छोटा—यदि आत्मनिर्भर नहीं है, तो किसी भी वस्तु पर बाहरी निर्भरता उसके लिए बाधा बन जाती है।

अमेरिका के H-1B वीज़ा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका सामान्य और उच्च दक्षता वाले कार्यों के लिए दो प्रकार के वीज़ा प्रदान करता है। उच्च दक्षता वाले वीज़ा की संख्या सामान्यतः एक लाख होती है, जिनमें लगभग 70% भारतीयों को मिलते हैं, यह दर्शाता है कि दुनिया आज भारतीय दक्षता पर निर्भर है।
उन्होंने कहा—“पहले कहा जाता था कि अमेरिकी कंपनियाँ भारत आकर भारतीयों का रोजगार छीनेगी; लेकिन आज स्थिति उलट गई है। अब अमेरिका को लगता है कि भारतीय, अमेरिका जाकर अमेरिकियों का रोजगार छीन रहे हैं—यह भारतीय कौशल का सर्वोच्च प्रमाण है।”

ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने ब्रह्मोस सहित जिन रक्षा उपकरणों का इस्तेमाल किया, वे पूरी तरह भारतीय थे, जबकि पाकिस्तान ने सभी हथियार विदेशों से खरीदे। यह नई भारत की सामरिक आत्मनिर्भरता का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता के अनेक आयाम हैं—आर्थिक, सामरिक, ऊर्जा और खाद्यान्न—इन चारों में भारत को पूर्ण आत्मनिर्भर बनना ही होगा। इसके साथ ही सामाजिक और वैचारिक आत्मविश्वास भी अनिवार्य है, क्योंकि जब तक आत्मविश्वास नहीं होगा, आत्मनिर्भरता संभव नहीं।

सुधांशु त्रिवेदी ने बताया कि आज़ादी के बाद 1977 तक सभी ऑल इंडिया सर्विसेज की परीक्षाएँ अंग्रेजी में ही होती थीं, जिसकी अनिवार्यता अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में समाप्त की गई। मोदी सरकार ने इसे आगे बढ़ाते हुए इंजीनियरिंग और मेडिकल की शिक्षा भी 8–9 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराई है।

उन्होंने कहा कि अटल जी ने संयुक्त राष्ट्र में पहली बार हिंदी में भाषण देकर भारतीय भाषा-गौरव का शंखनाद किया था। अब वह समय बीत चुका है जब भारतीय वेशभूषा और परिवेश को पिछड़ेपन की नजर से देखा जाता था; आज हर भारतीय अपने अंदर गहरा आत्मविश्वास महसूस कर रहा है।

दीपावली पर भी प्रधानमंत्री के आह्वान पर देश आज स्वदेशी के साथ देव-दीपावली मनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता के कारण भारत—ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, डिजिटल ट्रांजैक्शन, चिकित्सा, खाद्यान्न और रक्षा—हर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तेज़ी से अग्रसर है। प्रधानमंत्री कहते हैं कि “भारत के परिवर्तन का समय यही है, यही सही समय है,”—और भारत का यह अमृत काल, अपने गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेते हुए भविष्य का निर्माण कर रहा है।

अपने संबोधन का समापन करते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा—
“गौरवशाली था भूत, भविष्य भी महान है,
अगर आप संभालें उसे, जो वर्तमान है।”

अभियान प्रदेश संयोजक बृज बहादुर, महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी और कार्यक्रम संयोजक अभिषेक खरे ने सुधांशु त्रिवेदी को आत्मनिर्भर भारत स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

मीडिया प्रभारी प्रवीण गर्ग ने बताया कि लखनऊ महानगर द्वारा आत्मनिर्भर भारत ब्रांड एंबेसडर के रूप में मनोनीत डॉ. संदीप गुप्ता, मणिपाल पब्लिक कॉलेज की प्राचार्या स्मिता सिंह और डॉ. अभिषेक बंसल को भी स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में व्यापारी नेता संदीप बंसल, महामंत्री राम अवतार कनौजिया, घनश्याम अग्रवाल, टिंकू सोनकर, आर.के. चारी, के.के. मिश्रा, मयंक बाजपेयी, दीपा मिश्रा सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे।

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